सन्यास परम्परा में हमारे दादा गुरू स्वामी शांतानन्द महाराज और मेरे गुरूदेव जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जो वरिष्ठ ट्रस्टी हैं। मैं आन्दोलन की दृष्टि से तीसरी पीढ़ी से हूं। यह बातें अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने एक साक्षात्कार में कही। प्रस्तुत है हिन्दुस्थान समाचार के वरिष्ठ संवाददाता बृजनन्दन राजू से उनकी बातचीत के संक्षिप्त अंश। राम मंदिर आन्दोलन के लिए आपने संघर्ष किया है। प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही […]Read More
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अब स्मृति-जागृत भारत अपने मन और काया पर आघात नहीं
भाजपा के पूर्व राज्सभा सांसद एवं पांचजन्य के पूर्व संपादक तरूण विजय ने कहा कि अयोध्या की उन गलियों से गुजरते हुए जहां इन आंखों ने नब्बे-बयानबे में हिंदू नेताओं की हिंदू पुलिस द्वारा रक्तरंजित कारसेवक संहार देखा था आज भी सिहरन होती है, आंखें विस्फारित होकर राम-शरद कोठारी के चित्र देखती हैं उनके अधरों से निकले जय सिया राम के स्वर सुनायी देते हैं। उन्होंने कहा कि भारत जागृत हो गया है। अब स्मृति-जागृत […]Read More
राम मंदिर उद्घाटन वाले दिन बंगाल में नहीं रहेगी छुट्टी!
सोमवार 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन देश के कई राज्यों ने छुट्टी की घोषणा की है। कई बड़े संस्थानों में भी छुट्टियां रहेंगी। इसे लेकर बंगाल भाजपा ने भी राज्य सरकार से राज्य में छुट्टी की मांग की थी, लेकिन इस पर सरकार ने चुप्पी साथ रखी है। इस बीच राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है की छुट्टी के बारे में कोई निर्देश नहीं […]Read More
आज विश्व राममय है। केवल भारत ही नहीं, दुनिया भर श्रीराम की चर्चा है। श्रीअयोध्या जी की चर्चा है और लोग मांग रहे हैं श्रीरामचरित मानस। वह मानस जिसके लिए स्वयं गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिख दिया-रचि महेश निज मानस राखा ।। इस मानस की आस्था को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ठीक से जानते थे। इसीलिए उन्होंने संघ की स्थापना के संकल्प में कहा था कि राष्ट्र को एक सूत्र […]Read More
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर राष्ट्रीय गौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक
हमारे भारत का इतिहास पिछले लगभग डेढ़ हजार वर्षों से आक्रांताओं से निरंतर संघर्ष का इतिहास है। आरंभिक आक्रमणों का उद्देश्य लूटपाट करना और कभी-कभी (सिकंदर जैसे आक्रमण) अपना राज्य स्थापित करने के लिए होता था। परंतु इस्लाम के नाम पर पश्चिम से हुए आक्रमण यह समाज का पूर्ण विनाश और अलगाव ही लेकर आए। देश-समाज को हतोत्साहित करने के लिए उनके धार्मिक स्थलों को नष्ट करना अनिवार्य था, इसलिए विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत में […]Read More






