भगवान श्रीराम का अतीत इतना व्यापक और विस्तारित है कि उस पर समझ और संज्ञान की सीमाएं हैं। उन्हें चिह्नित करना बहुत दूर की कौड़ी है। भारतीय समाज में श्रीराम उस वट वृक्ष की तरह हैं जिसकी छत्रछाया में भक्त, आलोचक, आम, खास, आराधक, विरोधी, संबोधक सबके सब न जाने कितने सालों से एक साथ चले आ रहे हैं। ‘श्रीराम’ भारतीय चिंतन परंपरा का सबसे चहेता चेहरा हैं। उनमें निर्गुणों व सगुणों सब ही का […]Read More
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास साधारण नहीं है । इसमें बलिदान के कुछ ऐसे प्रसंग भी हैं, जिन्हें पढ़कर आत्मा काँप उठती है। क्राँतिकारी सूर्यसेन और तारकेश्वर दत्त को फाँसी देने से पहले अमानवीय यातनाएँ दी गई। हथौड़े से दाँत तोड़े गये नाखून उखाड़े गये और फाँसी के बाद शव समन्दर में फेंक दिये गये। इतिहास के पन्नों में अधूरी सी यह कहानी उन क्रान्तिकारियों की है, जिन्होंने चटगांव बंदरगाह पर अंग्रेजों का शस्त्रागार लूटकर […]Read More
युग प्रवर्तक, भारत के गौरव पुरुष, वेदांत दर्शन के मर्मज्ञ, कर्मयोगी,भारत माता के सच्चे सपूत, युवाओं के प्रेरणा स्रोत स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी,1863 में कोलकाता में हुआ था। इनका मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था । इनके पिता विश्वनाथ दत्त उच्च न्यायालय कोलकाता में वकील थे। मां भुवनेश्वरी देवी ग्रहणी थी। 12 जनवरी को संपूर्ण भारत में विवेकानंद जी का जन्मदिन युवा दिवस के रूप मे मनाया जाता है। सर्वप्रथम 1984 में भारत सरकार […]Read More
युवा वर्ग सही मार्ग से न भटके, इसके लिए युवा शक्ति को जागृत कर उसे देश के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हुए सही दिशा में प्रेरित एवं प्रोत्साहित करना और उचित मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में राष्ट्रीय युवा दिवस की प्रासंगिकता बहुत बढ़ जाती है, जो प्रतिवर्ष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 12 जनवरी को मनाया जाता है। हमें भूलना नहीं चाहिए कि देश की आजादी की लड़ाई में अपना सब […]Read More
आज पूरी दुनिया उत्सुकता के साथ 22 जनवरी के ऐतिहासिक क्षण का इंतजार कर रही है। दुनिया में कोई भी देश हो, अगर उसे विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचना है, तो उसे अपनी विरासत को संभालना ही होगा। हमारी विरासत, हमें प्रेरणा देती है, हमें सही मार्ग दिखाती है। इसलिए आज का भारत, पुरातन और नूतन दोनों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ रहा है। एक समय था जब अयोध्या में रामलला टेंट में […]Read More






