कोई मां भला कैसे निर्दयी हो सकती है? क्रूर हो सकती है? कैसे अपने जिगर के टुकड़े को बैग में पैक कर सड़क रास्ते लंबे सफर पर बेखौफ निकल सकती है? इसके जवाब मनोचिकित्सकों के पास अपने-अपने ढंग के और अलग भी हो सकते हैं। लेकिन गोवा में एक आम नहीं बल्कि बेहद खास वो मां जिसने देश-दुनिया को अपनी सफलता से आकर्षित किया और निर्दयता और क्रूरता की सारी हदें पार कर जाए तो […]Read More
राम की कहानी युगों से भारत को संवारने में उत्प्रेरक रही है। इसीलिए राष्ट्र के समक्ष सुरसा के जबड़ों की भांति फैले हुए सद्य संकटों की रामकहानी समझना और उनका मोचन इसी से मुमकिन है। शर्त यही है राम में रमना होगा, क्योंकि वे ”जन रंजन भंज न सोक भयं” हैं। बापू का अनुभव था कि जीवन के अंधेरे और निराश क्षणों में रामचरित मानस में उन्हें सुकून मिलता था। राम मनोहर लोहिया ने कहा […]Read More
असहयोग आंदोलन का समय। अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारों से पूरे देश के साथ इलाहाबाद भी गूंज रहा था। इसी दौरान जुलूस पर गोली चलाने के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष की तो मृत्यु हुई ही, कई छात्र घायल भी हुए और लापता भी। विश्वविद्यालय का हॉस्टल तुरंत बंद कर दिया गया। हजारों छात्र पुलिस से बचने के लिए अंडरग्राउंड हो गए। इस जुलूस में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के दो मित्र रामचंद्र द्विवेदी जो कि […]Read More
गुरु ग्रंथ साहिब में राम- इस शीर्षक से कुछ लोगों को आश्चर्य मिश्रित प्रसन्नता हो सकती है, लेकिन वास्तविकता यही है कि गुरु ग्रंथ साहिब में सैकड़ों बार राम शब्द का प्रयोग हुआ है। वैसे यहां ये बात स्पष्ट समझ लेनी होगी कि जहां कहीं भी इस शब्द का प्रयोग हुआ है, वहां ये त्रेता युग के राजा दशरथ के पुत्र रामचंद्र के रूप में हैं लेकिन इसके अलावे इस शब्द का प्रयोग अधिकतर निराकार […]Read More
हर साल जनवरी का महीने आते ही देश में गणतंत्र दिवस की तैयारियां अपने चरम पर पहुंच जाती हैं। राजधानी दिल्ली में तो गणतंत्र दिवस की तैयारियां बाकी जगहों से अधिक बड़े स्तर पर होती हैं क्योंकि राजधानी दिल्ली में ही गणतंत्र दिवस परेड निकलती है। उस परेड का हिस्सा वे बालवीर भी होते हैं, जिन्हें देश उनके साहस, सूझबूझ और शौर्य के लिए सम्मानित कर रहा होता है। वे जब राष्ट्रपति जी को सलामी […]Read More






