“मैं अपने बच्चों को भीख मांगते देख लूंगी, परंतु मैं राजनीति में कदम नहीं रखूंगी।” यह पीड़ा सोनिया गांधी की थी जो उन्होंने अपने पति एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को खोने के बाद व्यक्त की थी। यह एक मां और औरत की पीड़ा थी, क्योंकि राजीव को खोने के बाद सोनिया अकेली पड़ गई थीं। वह डरी और सहमी थीं, क्योंकि पारिवारिक संघर्ष में वह अकेली थीं। उन्हें सबसे अधिक फिक्र दोनों बच्चों राहुल […]Read More
देश में गंभीर तार्किक एवं अन्य चुनौतियों के बावजूद लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का विचार दशकों से चर्चा के केंद्र में है। इसका मकसद भारतीय चुनाव चक्र की अनावश्यक पुनरावृत्ति को रोकना है। हालांकि वर्ष 1967 तक ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ की अवधारणा के तहत देश में चुनाव हुए हैं, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने से पहले राज्यों की विधानसभा और लोकसभा के बार-बार भंग होने के कारण यह सिलसिला थम […]Read More
परब्रह्म के पूर्ण प्रतीक जो लीला रूप में अनुभवगम्य होते हैं। अक्षय स्नेह के स्रोत रस से परिपूर्ण श्रीकृष्ण इंद्रियों के विश्व में आनंद के निर्झर सरीखे हैं। उनका सान्निध्य चैतन्य की सरसता के साथ सारे जगत को आप्लावित और प्रफुल्लित करता है। श्रीमद्भगवद्गीता में विभूति योग की व्याख्या करते हुए श्रीकृष्ण खुद को ऋतुओं में वसंत घोषित करते हैं : ऋतूनाम् कुसुमाकर: । श्रीमद्भागवत के दशम स्क्न्ध में रास प्रवेश करते हुए उनकी निराली […]Read More
समान नागरिक संहिता बनाने के मामले में उत्तराखंड सरकार ने जिस तरीके से पहल की है, उससे हम सब के जेहन में एक अहम सवाल यह है कि क्या केंद्र की एनडीए सरकार इस पर कानून बनाकर संपूर्ण देश में लागू कर सकती है? अब देश के अन्य राज्यों ने भी इस पर कानून बनाने की योजना बनानी शुरू कर दी है। अगर हर राज्य समान नागरिक संहिता पर अलग- अलग कानून बनाते हैं तो […]Read More
इसमें दो राय नहीं कि सूचना-मनोरंजन की पारंपरिक उपाधि सदैव रेडियो के हिस्से ही रहेगी। आज का दिन रेडियो के लिए खास है। क्योंकि समूचा संसार आज ‘विश्व रेडियो दिवस’ मना रहा है। रेडियो की अहमियत मानव जीवन से कितना वास्ता रखती है, जिसका अंदाज मौजूदा वर्ष-2024 की थीम से लगा सकते हैं। इस बार की थीम ‘सूचना देने, मनोरंजन करने और शिक्षित करने वाली एक सदी’ रखी गई है जिसका उद्देश्य रेडियो के उल्लेखनीय […]Read More






