हिमाचल प्रदेश के चुनाव तक पहुंचते-पहुंचते रैलियों और महारैलियों का दौर अपने चरम पर है । मुश्किल से सप्ताह भर का समय शेष है । राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, संविधान, कानून व्यवस्था, जाति और क्षेत्रीय समीकरण आदि महत्वपूर्ण विषय रहे हैं जिन का जिक्र दलों ने अपने-अपने हिसाब से परिस्थिति के अनुसार किया है अथवा कर रहे हैं । कौन कितना सफल रहा है यह परिणाम तय करेंगे । लोकसभा चुनाव […]Read More
आधुनिक चकाचौंध में टेक्नोलॉजी से लबरेज युग में देसी मटकों का क्रेज आज भी बरकरार है। दूषित पानी के इस्तेताल से बढ़ते मरीजों को जबसे चिकित्सकों ने मटके का पानी पीने की सलाह दी है, लोगों का रुझान अनायास घड़ों की ओर दौड़ा है। मिट्टी का ये आइटम न सिर्फ मन को भाता है, बल्कि चिलचिलाती गर्मी में सूखे गलों को भी तरबतर कर देता है। घड़े का पानी पीने में तरावट आती है। गले […]Read More
वैयक्तिक स्तर पर तो मृत्यु अपरिहार्य सत्य है, किन्तु प्रवाह रूप में जीवन धारा का सातत्य ही संसार को चलाये रखने वाली प्रक्रिया है। वर्तमान विकास यात्रा में प्रकृति के साथ आधुनिक संस्कृति का टकराव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता जा रहा है। जिसने सतत जीवन धारा को ही खंडित करना आरंभ कर दिया है। इस संस्कृति का आधार विज्ञान, तकनीक का गुलाम होकर भेदवादी शक्तियों की ताकत बनता जा रहा है। समग्रतावादी आध्यात्मिक चिंतन, जो […]Read More
ब्रह्मर्षि नारद कोई सामान्य महर्षि अथवा ब्रह्मर्षि नहीं है। वह समस्त जीव जगत के परम आचार्य हैं। वस्तुत सृष्टि में गुरुतत्व के मूल हैं। पथप्रदर्शक हैं। जीवन दृष्टि के एक मात्र प्रदाता हैं। इस सृष्टि के संचालन में सृष्टि को रचने वाले के एकमात्र सहयोगी और सुविचार प्रसारण के माध्यम हैं। नारद जी को जानना और समझना पूर्ण रूप से, एक सामान्य मनुष्य के लिए कठिन है। सृष्टि में सनातन के जो भी ग्रंथ अथवा […]Read More
इसे आप काल के चक्र का प्रवाह एवं पुनर्चक्रीकरण भी मान सकते हैं कि जिस भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में कभी 32 प्रतिशत का योगदान हुआ करता था, वह भारत एक बार फिर उसी दिशा में आगे बढ़ने लगा है। दुनिया के अर्थशास्त्री भारत के इस नए रूप को देख कर चमत्कृत हैं, वहीं अमेरिका को लगता है कि यदि इसी तरह से भारत आगे बढ़ता रहा तो कहीं ऐसा न हो कि डॉलर के […]Read More






