ममता बनर्जी को एक और झटका: TMC के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा, बढ़ी पार्टी में बगावत
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी अंदरूनी असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी की राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफों का सिलसिला जारी रखते हुए वरिष्ठ नेता और सांसद प्रकाश चिक बराइक ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं।लगातार हो रहे इस्तीफों ने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की नेतृत्व क्षमता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के बीच कई सांसद और विधायक नेतृत्व से असहमति जता चुके हैं।
राज्यसभा में भी दिखी दरार
प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद राज्यसभा में टीएमसी की एकजुटता पर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के पास उच्च सदन में 10 सदस्य हैं, जबकि लोकसभा में उसका प्रतिनिधित्व 28 सांसदों के जरिए है। हाल के घटनाक्रमों ने संकेत दिए हैं कि पार्टी के भीतर दो अलग-अलग धड़े उभरते दिखाई दे रहे हैं।
कौन हैं प्रकाश चिक बराइक?
प्रकाश चिक बराइक पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले से आते हैं और टीएमसी के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते हैं। राजनीति में सक्रिय होने से पहले वे चाय बागान कर्मचारी और मजदूर नेता के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। टीएमसी ने उन्हें अगस्त 2023 में पश्चिम बंगाल से निर्विरोध राज्यसभा भेजा था। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में अलीपुरद्वार सीट से भी चुनाव लड़ा था। बराइक ने कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई उत्तरी बंगाल विश्वविद्यालय से संबद्ध सूर्यसेन कॉलेज, सिलीगुड़ी से की है।
सुखेंदु शेखर राय ने भी छोड़ी थी पार्टी
टीएमसी के वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर राय ने 8 जून 2026 को राज्यसभा और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले राय ने चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के लंबे शासन को चुनावी पराजय का प्रमुख कारण बताया था।
सुष्मिता देव के इस्तीफे से बढ़ीं अटकलें
पूर्व कांग्रेस नेता और टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने 10 जून 2026 को राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा राज्यसभा के सभापति द्वारा स्वीकार भी किया जा चुका है।इस्तीफे के तुरंत बाद उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। इसके बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
पार्टी के सामने बड़ी चुनौती
लगातार इस्तीफों और बगावती सुरों के बीच टीएमसी नेतृत्व के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में पार्टी के भीतर की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, जिसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।