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बरेली में पशु सेवा आश्रम से बकरे की चोरी: संचालिका ने 25 हजार रुपये खर्च कर छान डाला जिला, आखिरकार मिला ‘हीरा’

बरेली, 1 मई 2025: उत्तर प्रदेश के बरेली में एक अनोखी घटना ने सभी का ध्यान खींचा है। शहर के रिठौरा क्षेत्र में स्थित पशु सेवा आश्रम से एक पालतू बकरे ‘हीरा’ की चोरी के बाद आश्रम की संचालिका शालिनी अरोरा ने अपनी कार से जिले की हर गली और बाजार छान मारी। पांच दिन की अथक मेहनत और 25 हजार रुपये खर्च करने के बाद आखिरकार बकरा बारादरी थाने के बाहर मिला, लेकिन इस शर्त पर कि शालिनी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगी। इस घटना ने न केवल शालिनी के पशुओं के प्रति प्रेम को उजागर किया, बल्कि क्षेत्र में पशु चोरी की बढ़ती घटनाओं पर भी सवाल उठाए।
चोरी की घटना और शालिनी का संकल्प
मुंशी नगर निवासी शालिनी अरोरा रिठौरा के पास अपना पशु सेवा आश्रम चलाती हैं, जहां निराश्रित पशुओं की देखभाल की जाती है। शालिनी ने बताया कि दो साल पहले उन्होंने एक बकरी को रेस्क्यू किया था, जिसने डेढ़ साल पहले एक बकरे ‘हीरा’ को जन्म दिया। यह बकरा आश्रम का अभिन्न हिस्सा बन गया था और सभी का दुलारा था। बीते शुक्रवार को हीरा आश्रम के बाहर घूम रहा था, तभी बाइक सवार दो युवकों ने उसे चुरा लिया।
चोरी की खबर मिलते ही शालिनी ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। उन्होंने अपनी कार निकाली और अपने सहयोगी तौहीद सहित अन्य सदस्यों के साथ जिले भर में बकरे की तलाश शुरू कर दी। शालिनी ने जिले के हर कस्बे और बाजार को छान मारा, लेकिन शुरुआती चार दिन तक कोई सुराग नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने पेट्रोल, भोजन और अन्य खर्चों में करीब 25 हजार रुपये खर्च कर दिए, जबकि बकरे की अनुमानित कीमत केवल 5 हजार रुपये थी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और तलाश का अंत
शालिनी ने बारादरी थाने में चोरी की शिकायत दर्ज की, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। तलाश के दौरान उनकी एक पुलिसकर्मी से तकरार भी हुई, जिसने उनकी हिम्मत को और मजबूत किया। पांचवें दिन, बुधवार शाम को कुछ पशु कारोबारियों ने शालिनी से संपर्क किया और कहा कि उनका बकरा मिल सकता है, बशर्ते वे कोई कानूनी कार्रवाई न करें। शालिनी ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया, और आखिरकार ‘हीरा’ उन्हें बारादरी थाने के बाहर वापस मिल गया।
शालिनी ने बताया कि बकरा वापस मिलने की खुशी उनके लिए अनमोल थी, और इसीलिए उन्होंने कार्रवाई न करने का फैसला किया। हालांकि, इस घटना ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि शालिनी को अपनी मेहनत और संसाधनों से ही बकरा वापस मिला।
पशु चोरी की बढ़ती घटनाएं
बरेली में पशु चोरी की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। हाल के वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बकरे, मुर्गे और अन्य पशुओं को चुराकर बेचने के मामले शामिल हैं। उदाहरण के लिए, 2022 में बकरीद से पहले बरेली में एक सभासद के बेटे पर बकरा चोरी का आरोप लगा था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसी तरह, 2024 में शाही थाना क्षेत्र में एक मीट विक्रेता के 20 मुर्गों की चोरी हुई थी, जिनमें से कुछ को चोरों ने खा लिया और बाकी को बेच दिया।
हाल ही में बाराबंकी में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो पशुओं को चुराकर उनका मांस बेचता था। इस गिरोह से पशु, तमंचा और नकदी बरामद की गई थी। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि पशु चोरी का कारोबार संगठित रूप ले चुका है, और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में यह एक गंभीर समस्या बन रही है।
सामाजिक और प्रशासनिक पहलू
शालिनी अरोरा की इस कहानी ने उनके पशुओं के प्रति समर्पण को तो उजागर किया ही, साथ ही पशु सेवा आश्रम जैसे संस्थानों के महत्व को भी रेखांकित किया। शालिनी का कहना है कि उनके आश्रम में सभी पशु परिवार की तरह हैं, और ‘हीरा’ की चोरी उनके लिए व्यक्तिगत नुकसान जैसी थी। उनकी जिद और मेहनत ने पशु तस्करों को भी पसीना छुड़ा दिया।
हालांकि, इस घटना ने पुलिस और प्रशासन की उदासीनता को भी सामने लाया। शालिनी को अपनी शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें स्वयं जिले भर में भटकना पड़ा। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि पशु चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई और नियमित पुलिस गश्त की जरूरत है।

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