निजी संपत्ति में नमाज या धार्मिक सभा पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Allahabad High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी निजी संपत्ति के भीतर धार्मिक सभा आयोजित करने या नमाज अदा करने पर कानूनन कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने Badaun जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वे एक निजी परिसर में स्थित मस्जिद में शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ रहे लोगों के कार्य में हस्तक्षेप न करें।
याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया आदेश
यह आदेश बदायूं निवासी अलीशेर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी संपत्ति के एक हिस्से में ‘वक्फ मस्जिद रजा’ स्थित है, जहां वह अपने परिवार और अन्य लोगों के साथ नमाज अदा करता है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि स्थानीय प्रशासन और अधिकारी उन्हें वहां शांतिपूर्ण तरीके से नमाज पढ़ने से रोक रहे हैं या इसमें बाधा डाल रहे हैं। इसके बाद मामले को अदालत में चुनौती दी गई।
कोर्ट ने अधिकारियों को हस्तक्षेप से रोका
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति Shekhar B. Saraf और न्यायमूर्ति Vivek Sharan की खंडपीठ ने की। अदालत ने एक पूर्व समन्वय पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि निजी परिसर में धार्मिक गतिविधियों के आयोजन के खिलाफ कानून में कोई प्रतिबंध नहीं है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिवादी अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के परिसर के भीतर नमाज अदा करने में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर भी दिया स्पष्टीकरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने Maranatha Full Gospel Ministries vs State of Uttar Pradesh मामले में 27 जनवरी को दिए गए फैसले का भी हवाला दिया।
इस रिट याचिका को निस्तारित करते हुए अदालत ने 25 फरवरी को अपने फैसले में कहा कि यदि सार्वजनिक मार्ग या सार्वजनिक संपत्ति पर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निजी संपत्ति के भीतर शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों में प्रशासन को अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।