• July 18, 2026

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर संकट: अब उसी IAS अधिकारी के सामने पहुंचेगी आजम खान की अपील, जिन्हें कभी कहा था ‘तनखैय्या’

रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। यूनिवर्सिटी की 40 में से 38 इमारतों पर कार्रवाई की संभावना के बीच अब एक दिलचस्प प्रशासनिक और राजनीतिक पहलू भी सामने आया है।

यदि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ अपील करते हैं, तो उसकी सुनवाई रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अध्यक्ष और मुरादाबाद मंडल के आयुक्त (कमिश्नर) आईएएस अधिकारी आन्जनेय सिंह के समक्ष हो सकती है।

2019 का विवाद फिर चर्चा में

वर्ष 2019 में जब आन्जनेय सिंह रामपुर के जिलाधिकारी थे, तब आजम खान ने सार्वजनिक मंच से उन्हें “तनखैय्या” कहकर संबोधित किया था। उस समय दोनों के बीच कई प्रशासनिक मुद्दों को लेकर विवाद भी चर्चा में रहा था।

अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। आन्जनेय सिंह वर्तमान में मुरादाबाद मंडल के आयुक्त होने के साथ-साथ रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में यदि जौहर यूनिवर्सिटी की ओर से अपील दायर की जाती है, तो उसकी सुनवाई उनके अधिकार क्षेत्र में हो सकती है।

जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सक्रिय हुई सियासत

ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने रामपुर जाकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के प्रयास करने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि वे हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी ध्वस्तीकरण नोटिस को अनुचित बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

आजम खान के सामने कौन-कौन से विकल्प?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी के सामने फिलहाल तीन प्रमुख विकल्प मौजूद हैं—

1. RDA से भवनों का नियमितीकरण (कंपाउंडिंग)

यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के नक्शों को कंपाउंडिंग प्रक्रिया के माध्यम से नियमित कराने के लिए रामपुर विकास प्राधिकरण से अनुमति ली जा सकती है। इसके लिए विकास शुल्क, कंपाउंडिंग फीस, लेबर सेस और अन्य निर्धारित शुल्क जमा करने होंगे।

2. हाईकोर्ट का रुख

यूनिवर्सिटी प्रबंधन ध्वस्तीकरण नोटिस को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। हालांकि, भवनों के नियमितीकरण की प्रक्रिया अंततः विकास प्राधिकरण के माध्यम से ही पूरी करनी पड़ सकती है।

3. RDA अध्यक्ष से ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग

तीसरे विकल्प के तहत आजम खान या यूनिवर्सिटी प्रबंधन मुरादाबाद मंडल के आयुक्त एवं RDA अध्यक्ष आन्जनेय सिंह के समक्ष आवेदन देकर ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध कर सकते हैं।

38 इमारतों पर कार्रवाई का खतरा

जानकारों का अनुमान है कि यदि भवनों के नक्शों को नियमित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो इसमें 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आ सकता है। हालांकि, यह कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़ा नहीं है, बल्कि विषय से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान बताया जा रहा है।

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन आगे कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाता है और प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेता है।

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