October 4, 2026

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अखिलेश यादव का BJP पर हमला: अयोध्या से ग्राम प्रधान विवाद तक साधा निशाना, न्यायिक जांच और हाईकोर्ट के फैसले का किया जिक्र

लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लगातार दो पोस्ट कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान गबन मामले से लेकर ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मुद्दे तक सरकार को घेरते हुए कई सवाल उठाए।

अयोध्या मामले पर BJP पर साधा निशाना

अखिलेश यादव ने अपने पहले पोस्ट में राम मंदिर में कथित चढ़ावा और दान गबन मामले का जिक्र करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस मामले से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और कहा कि इस प्रकरण में सच्चाई सामने आनी चाहिए। सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कई मामलों का खुलासा होना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘भगवान के ऑडिट से कोई नहीं बचेगा’

अपने बयान में अखिलेश यादव ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हर मामले का हिसाब जनता और कानून के सामने आएगा। उन्होंने विभिन्न मुद्दों का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की।

ग्राम प्रधानों के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

अपने दूसरे पोस्ट में सपा अध्यक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिप्पणी की गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रधानों के सामने नई परेशानियां खड़ी हो गई हैं। अखिलेश यादव का दावा है कि सरकार के आदेश के बाद कई प्रधानों ने विकास कार्यों को लेकर जनता से वादे किए थे, लेकिन न्यायालय के फैसले के बाद वे असमंजस की स्थिति में हैं। उनका कहना है कि इससे गांवों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

खर्च और भुगतान को लेकर जताई चिंता

सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि कई ग्राम प्रधानों को अब इस बात की चिंता है कि कार्यकाल से जुड़े खर्चों और विकास कार्यों के भुगतान को लेकर भविष्य में कानूनी या वित्तीय दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार की अधिसूचना को असंवैधानिक माना गया है तो उस अवधि में हुए खर्चों को लेकर भी विवाद उत्पन्न हो सकता है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जहां सपा सरकार के फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों मुद्दों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

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