लखनऊ अग्निकांड की जांच के लिए SIT गठित, जानिए कौन हैं IAS अमृत अभिजात और IPS प्रवीण कुमार
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। जांच दल में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन) अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। एसआईटी को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
कौन हैं अमृत अभिजात?
अमृत अभिजात वर्ष 1995 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 21 जून 1968 को बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ी मल कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान अमृत अभिजात आगरा, कानपुर नगर, मुजफ्फरनगर और प्रयागराज के जिलाधिकारी रह चुके हैं। उन्हें बड़े प्रशासनिक आयोजनों के सफल प्रबंधन के लिए जाना जाता है। प्रयागराज महाकुंभ की तैयारियों और प्रबंधन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव और मिशन निदेशक के रूप में भी सेवाएं दी हैं।
कौन हैं प्रवीण कुमार?
प्रवीण कुमार वर्ष 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 26 जून 1972 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में हुआ था। वर्तमान में वह लखनऊ जोन में अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर कार्यरत हैं। शैक्षणिक रूप से भी उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने बीई (ऑनर्स), एलएलबी और एलएलएम की डिग्रियां हासिल की हैं। प्रवीण कुमार को उत्तर प्रदेश पुलिस के तेज-तर्रार और प्रभावी अधिकारियों में गिना जाता है। कानून-व्यवस्था और संवेदनशील मामलों के संचालन में उनका अनुभव काफी व्यापक माना जाता है।
फॉरेंसिक टीम ने शुरू की जांच
अलीगंज अग्निकांड की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की छह सदस्यीय टीम भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। टीम का नेतृत्व निदेशक आदर्श कुमार कर रहे हैं। फॉरेंसिक जांच के जरिए आग लगने के कारणों और सुरक्षा मानकों में संभावित लापरवाही की पड़ताल की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद स्थानीय निवासियों ने रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन और अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रही ऐसी इमारतें भविष्य में भी बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने की सहायता राशि की घोषणा
घटना की सूचना मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल भी जाना। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। अब सभी की निगाहें एसआईटी जांच पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि इस भीषण हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सकेगी।