• May 17, 2026

बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर रोहित पवार का जवाब, बोले- जाना होता तो कब का चला गया होता

शरद पवार गुट की एनसीपी (NCP-SP) के विधायक रोहित पवार ने बीजेपी में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि उन्हें बीजेपी में जाना होता, तो वह पहले ही शामिल हो चुके होते। उन्होंने कहा, “अगर मुझे बीजेपी में शामिल होना होता, तो मैं कब का हो गया होता। फिर मैं इतनी मेहनत और संघर्ष क्यों करता?”

रोहित पवार ने कहा कि राजनीतिक अफवाहों में उलझने के बजाय नेताओं को जनता के असली मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश और महाराष्ट्र के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिन पर चर्चा होना ज्यादा जरूरी है।

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए रोहित पवार ने कहा कि यह समस्या जल्द खत्म होने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि आरक्षण के समाधान के लिए संसद में संवैधानिक बदलाव की आवश्यकता होगी। इसके लिए सत्ता में बैठी सरकार से संवाद कर ठोस समाधान निकालना जरूरी है।

उन्होंने कहा, “आज असली मुद्दे पेट्रोल-डीजल की कीमतें, बढ़ती महंगाई, किसानों को फसलों का उचित दाम न मिलना और महिलाओं की सुरक्षा हैं। राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा इन विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।”

गौरतलब है कि इससे पहले रोहित पवार ने दावा किया था कि एनसीपी के कुछ नेता बीजेपी में शामिल होने की तैयारी में हैं। बुधवार को उन्होंने कहा था कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नेतृत्व में करीब 22 विधायक एनसीपी छोड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि शिवसेना के कुछ विधायक भी मानसिक रूप से बीजेपी में जाने के लिए तैयार हैं।

रोहित पवार के अनुसार, फिलहाल विधायक दल-बदल इसलिए नहीं कर रहे क्योंकि उन्हें इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ना पड़ सकता है। उन्होंने कहा था कि कई नेता 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने रोहित पवार के इन दावों को खारिज कर दिया। तटकरे ने कहा कि रोहित पवार का “मानसिक संतुलन बिगड़ गया है”, इसलिए वे इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रोहित पवार खुद बीजेपी में शामिल होना चाहते थे।

सुनील तटकरे ने कहा, “हम एनडीए का हिस्सा हैं और अपनी पार्टी व जनाधार को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। हमारी प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा पर सवाल उठाने का अधिकार किसी को नहीं है।”

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