हिंदू समाज से मिटे भेदभाव की दीवारें, ‘स्व’ के गौरव से बनेगा श्रेष्ठ भारत: नरेंद्र ठाकुर
लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने आह्वान किया है कि हिंदू समाज को जाति, भाषा, ऊंच-नीच और प्रांत के संकुचित दायरों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज में भेदभाव रहेगा, राष्ट्र की पूर्ण उन्नति संभव नहीं है। यह विचार उन्होंने गुरुवार को राजधानी लखनऊ में नारद जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
शताब्दी यात्रा: संघर्ष और संकल्प के 100 वर्ष
नरेंद्र ठाकुर ने संघ की विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आरएसएस की 100 वर्षों की यात्रा केवल कालखंड की गणना नहीं है, बल्कि यह ध्येय के प्रति अटूट निष्ठा की कहानी है। उन्होंने कहा, “हमारे स्वयंसेवकों ने अनेक उतार-चढ़ाव और संघर्ष देखे हैं, लेकिन लक्ष्य सदैव एक ही रहा—भारत माता की जय-जयकार और भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाना।”
संघ की कार्यपद्धति की विशिष्टता बताते हुए उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने संघ को व्यक्ति केंद्रित नहीं, बल्कि तत्व निष्ठ बनाया। यही कारण है कि संघ में किसी व्यक्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि ‘परम पवित्र भगवा ध्वज’ को सर्वोच्च मानकर उसे गुरु का स्थान दिया गया है।
सेवा और संगठन का विशाल नेटवर्क
वर्तमान में संघ के विस्तार की चर्चा करते हुए उन्होंने आंकड़े साझा किए कि आज देशभर में 85,000 से अधिक दैनिक शाखाएं और 32,000 से अधिक साप्ताहिक मिलन चल रहे हैं। वनवासी क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक, स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से समाज सेवा के अनगिनत कार्यों में लगे हैं। 32 से अधिक अनुषांगिक संगठन समाज के विभिन्न क्षेत्रों (शिक्षा, सेवा, मजदूर, विद्यार्थी आदि) में राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहे हैं।
भविष्य का मार्ग: ‘पंच परिवर्तन’ का आह्वान
नरेंद्र ठाकुर ने संघ के आगामी शताब्दी वर्ष की कार्ययोजना और समाज की दिशा पर विशेष चर्चा की। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से समाज सुधार का खाका प्रस्तुत किया:
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सामाजिक समरसता: हिंदू समाज के भीतर से छुआछूत और जातिगत भेदभाव को जड़ से मिटाना ताकि संपूर्ण समाज एक सूत्र में पिरोया जा सके।
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कुटुम्ब प्रबोधन: यदि परिवार की व्यवस्था संस्कारित और सुदृढ़ रहेगी, तभी समाज और राष्ट्र मजबूत होगा। परिवारों में संवाद और मूल्यों की स्थापना अनिवार्य है।
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पर्यावरण संरक्षण: जल, जमीन और जंगल की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य होना चाहिए।
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‘स्व’ का बोध: हमारी भाषा, वेशभूषा, खान-पान और विचार में अपनी संस्कृति का गौरव (स्व का भाव) झलकना चाहिए।
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नागरिक कर्तव्य: अधिकारों की बात करने के साथ-साथ हर व्यक्ति को देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध होना आवश्यक है।
सामयिक विषयों पर दृष्टिकोण
यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों से जुड़े एक प्रश्न पर उन्होंने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि चूंकि यह मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए संघ इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में समाज में सद्भाव और शांति बनी रहनी चाहिए।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस मीडिया संवाद कार्यक्रम में संयुक्त क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख एवं राष्ट्रधर्म के निदेशक मनोजकांत, प्रांत प्रचारक कौशल और प्रांत संघचालक सरदार स्वर्ण सिंह सहित कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विश्व संवाद केंद्र न्यास के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकारों ने भी सहभागिता की, जहाँ राष्ट्र के प्रति मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा हुई।