उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग करने का ऐलान, नया पाठ्यक्रम होगा लागू
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Madhulika- April 19, 2026
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने मदरसों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। हरिद्वार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने घोषणा की कि राज्य में मदरसा बोर्ड को भंग किया जाएगा और आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी मदरसों में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब राज्य में मदरसों के लिए अलग पाठ्यक्रम नहीं चलेगा। सभी मदरसों को Uttarakhand Board of School Education के निर्धारित पाठ्यक्रम को अपनाना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य छात्रों को एक समान और मानकीकृत शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सीएम धामी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो मदरसे सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर ऐसे मदरसों को बंद भी किया जा सकता है।
इस फैसले के बाद राज्य में शिक्षा व्यवस्था और मदरसों की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
क्या है मदरसा बोर्ड?
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड एक राज्य स्तरीय संस्था है, जो मदरसों की मान्यता, संचालन और शिक्षा व्यवस्था की देखरेख करती है। राज्य के सभी मदरसों के लिए बोर्ड से मान्यता लेना आवश्यक होता है, तभी उन्हें सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।
मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है?
मदरसों में दो प्रकार की शिक्षा दी जाती है—धार्मिक और सामान्य। धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत कुरान, हदीस, अरबी भाषा और इस्लामिक इतिहास पढ़ाया जाता है, जबकि सामान्य शिक्षा में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय शामिल होते हैं।