• April 12, 2026

जग्गी हत्याकांड: अमित जोगी को हाई कोर्ट से उम्रकैद, सुप्रीम कोर्ट में 20 अप्रैल को सुनवाई

अमित जोगी, जो अजीत जोगी के बेटे और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष हैं, को छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले को अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जहां मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

23 साल बाद आया फैसला

करीब 23 साल पुराने इस मामले में फैसले का सतीश जग्गी ने स्वागत किया है। वहीं अमित जोगी ने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

विष्णु देव साय ने कोर्ट के फैसले को स्वागत योग्य बताया। वहीं दीपक बैज ने इसे न्यायालय का मामला बताते हुए टिप्पणी से दूरी बनाई।

क्या है पूरा मामला?

4 जून 2003 को रायपुर में रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 3 बाद में सरकारी गवाह बन गए।

31 मई 2007 को निचली अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। इसके खिलाफ सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसे बाद में हाई कोर्ट को भेज दिया गया।

 हाई कोर्ट का फैसला

मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 1000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे न भरने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।

फैसले के मायने

हाई कोर्ट के इस फैसले को न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता का उदाहरण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं और जब सबूत समान हों, तो सजा भी समान होनी चाहिए। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है, जहां से अंतिम फैसला आने के बाद इसका असर छत्तीसगढ़ की राजनीति और जोगी परिवार के भविष्य पर पड़ सकता है।

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