तनाव के बीच भारत को राहत: ‘जग लाडकी’ टैंकर 80,800 टन कच्चा तेल लेकर मुंद्रा पहुंचा
लखनऊ/नई दिल्ली, 18 मार्च 2026: देश में LPG आपूर्ति को लेकर चिंता के बीच एक राहतभरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर ‘जग लाडकी’ बुधवार को संयुक्त अरब अमीरात से अपनी यात्रा पूरी कर गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंच गया। इस टैंकर में लगभग 80,800 मीट्रिक टन ‘मुरबान’ कच्चा तेल लदा हुआ है।
यह टैंकर रविवार सुबह फुजैराह बंदरगाह से रवाना हुआ था, जो वहां हुए हमले के ठीक एक दिन बाद की घटना है। 14 मार्च 2026 को फुजैराह के तेल टर्मिनल पर हुए हमले के दौरान ‘जग लाडकी’ ‘सिंगल पॉइंट मूरिंग’ पर कच्चा तेल लोड कर रहा था। हमले के कारण बंदरगाह का कामकाज कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ, लेकिन इसके बावजूद जहाज सुरक्षित रूप से रवाना होने में सफल रहा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जहाज भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैराह से रवाना हुआ और बिना किसी बाधा के भारत पहुंचा। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
‘जग लाडकी’ इस संकटग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित निकलने वाला तीसरा भारतीय टैंकर है। इससे पहले ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं। इन घटनाओं के बीच रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है, हालांकि उसने संयुक्त अरब अमीरात के बंदरगाहों को लेकर संभावित हमलों की चेतावनी भी दी है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि जारी संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
इससे पहले भारत के दो LPG कैरियर जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ कुल 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर देश पहुंचे थे। ‘शिवालिक’ सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा, जबकि ‘नंदा देवी’ मंगलवार को गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर सुरक्षित पहुंचा। ‘नंदा देवी’ में 46,500 मीट्रिक टन LPG लदी थी।
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन सुशील कुमार सिंह के अनुसार, वाडिनार बंदरगाह पर ‘नंदा देवी’ से LPG को ‘BW Birch’ नामक छोटे जहाज में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। यह गैस आगे तमिलनाडु के एन्नोर और पश्चिम बंगाल के हल्दिया बंदरगाहों तक पहुंचाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि ट्रांसफर प्रक्रिया लगभग 1,000 टन प्रति घंटे की रफ्तार से होती है और पूरे ऑपरेशन को पूरा करने में करीब दो दिन लग सकते हैं। पोर्ट अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि सभी कार्य पूरी दक्षता और सुरक्षा के साथ संपन्न हों।