• February 24, 2026

गाजियाबाद में 10 मोरों की रहस्यमयी मौत: जहरीले कीटनाशक या दूषित पानी? पोस्टमॉर्टम और जांच जारी

गाजियाबाद: दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के पचायारा गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सोमवार को एक मूली के खेत के पास राष्ट्रीय पक्षी मोरों के 10 शव मिले, जबकि एक मोर बेहोश अवस्था में बरामद हुआ। इस घटना से स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया और वन विभाग-प्रशासन अलर्ट हो गया है।
घटना कैसे हुई?
पचायारा गांव के एक किसान ने अपनी गेहूं की फसल की जांच के दौरान खेत में गिरे हुए मोरों को देखा। तुरंत सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम में पशु चिकित्सक भी शामिल थे। कुल 11 मोर मिले, जिनमें से 10 की मौत हो चुकी थी। एक मोर जीवित था, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है।
वन विभाग की प्रारंभिक जांचवन विभाग की उप-मंडल अधिकारी (SDO) सलोनी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में संदेह है कि मोरों ने जहरीले कीटनाशक का सेवन किया या दूषित पानी पिया होगा। मोरों के शवों पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है ताकि मौत का सटीक कारण पता चल सके।
मंडल वन अधिकारी (DFO) ईशा सिंह ने बताया कि फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने घटनास्थल से मिट्टी और पानी के सैंपल एकत्र किए हैं। इन सैंपलों की लैब जांच से जहरीले पदार्थों की मौजूदगी का पता चलेगा।ग्रामीणों का गुस्सा: फैक्ट्रियों और जहर देने का आरोपघटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया है। स्थानीय लोग पड़ोसी बागपत जिले की फैक्ट्रियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका आरोप है कि उद्योगों से निकलने वाला जहरीला पानी नालों और यमुना नदी में बहाया जा रहा है, जिससे जानवर और पक्षी बार-बार मर रहे हैं।
एक ग्रामीण रविंद्र सिंह ने सनसनीखेज दावा किया कि मोरों को जानबूझकर जहर दिया गया। उन्होंने बताया कि घटनास्थल के आसपास से कई खाली कीटनाशक की बोतलें और पैकेट बरामद हुए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि फैक्ट्री मालिकों और प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
जांच में क्या हो रहा?

  • मोरों के शवों का पोस्टमॉर्टम
  • मिट्टी, पानी और आसपास के क्षेत्र के सैंपल की फोरेंसिक जांच
  • कीटनाशक पैकेटों की जांच
  • जीवित मोर की हालत पर नजर
  • स्थानीय फैक्ट्रियों और नालों से निकलने वाले पानी की जांच

वन विभाग और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और जल्द ही मौत के सही कारण का खुलासा होने की उम्मीद जताई है। इस घटना ने एक बार फिर पर्यावरण प्रदूषण और वन्यजीवों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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