• February 24, 2026

भोपाल में कांग्रेस की किसान महापंचायत: सीएम मोहन यादव का राहुल गांधी पर तीखा हमला, माफी मांगने की सलाह

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज कांग्रेस द्वारा किसान महापंचायत का आयोजन किया गया है। इस महापंचायत में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की भागीदारी होने वाली है। इस कार्यक्रम को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी बहस छिड़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी पर किसानों के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए उन्हें उज्जैन के महाकाल मंदिर जाकर माफी मांगने की सलाह दी है।
कांग्रेस का दावा:
राष्ट्रीय किसान अभियान की शुरुआतकांग्रेस इस महापंचायत को राष्ट्रीय स्तर पर किसान अभियान की शुरुआत बता रही है। पार्टी का कहना है कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील किसान विरोधी है और इससे किसानों के हितों को नुकसान पहुंचेगा। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां किसानों को कमजोर कर रही हैं, जिसके खिलाफ यह महापंचायत एकजुटता का प्रतीक है।
सीएम मोहन यादव का पलटवार:
सरकार के कार्यों को बताया ऐतिहासिकमुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के कार्यों को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सिंचाई क्षेत्र का विस्तार किया, टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए और सोयाबीन किसानों के लिए भावांतर योजना के तहत 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है। सीएम ने दावा किया कि इन कदमों से किसानों को समृद्धि मिली है।
उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा, “कांग्रेस ने 55 वर्षों के शासन में जो काम नहीं किए, वह हमारी सरकार ने कम समय में कर दिखाए हैं। कांग्रेस के राज में सबसे ज्यादा कॉटन मिलें बंद हुईं, जिससे किसानों और मजदूरों को नुकसान पहुंचा।
एआई समिट प्रदर्शन पर टिप्पणी:
‘गंदी मानसिकता’एआई समिट के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए सीएम यादव ने कहा कि कपड़े उतारकर विरोध जताना गंदी मानसिकता का परिचायक है। इससे न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश की छवि खराब होती है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि राजनीति में सकारात्मक मुद्दों पर ध्यान दें, न कि भ्रम फैलाने पर।यह महापंचायत मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है, जहां किसान मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। किसान संगठनों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस आयोजन के परिणामों पर टिकी हुई है।
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