9 फरवरी 1951: आजाद भारत की पहली जनगणना शुरू हुई, तब आबादी थी सिर्फ 36 करोड़ – आज पहुंची 147 करोड़ के पार
आजाद भारत की पहली जनगणना 1951 में आयोजित की गई। इसकी शुरुआत 9 फरवरी 1951 को हुई और यह 28 फरवरी 1951 तक चली। इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च तक पुनरीक्षण (रिवीजन) का काम किया गया। इस जनगणना में लोगों से नाम, पारिवारिक संबंध, जन्म स्थान, लिंग, आयु, आर्थिक स्थिति, मुख्य और सहायक आजीविका, धर्म, मातृभाषा और साक्षरता जैसी विस्तृत जानकारी एकत्र की गई। यह जनगणना इसलिए भी खास थी क्योंकि देश के बंटवारे के बाद सीमाएं बदल गई थीं, लाखों लोग पलायन कर आए थे और धार्मिक संरचना में बड़ा बदलाव आया था। यह आंकड़े नीति-निर्माण के लिए आधार बने।
1951 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल आबादी 36,10,88,090 (लगभग 36.11 करोड़) दर्ज की गई। उस समय के कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े:
- साक्षरता दर: केवल 18%
- औसत जीवन प्रत्याशा: सिर्फ 32 वर्ष
- लिंगानुपात: प्रति 1000 पुरुषों पर 946 महिलाएं
- धार्मिक संरचना: हिंदू 84.1%, मुस्लिम 9.8%, ईसाई 2.3%, सिख 1.9%, अन्य
वर्तमान में भारत की आबादी कितनी है?
वर्तमान समय (फरवरी 2026) में भारत की आबादी 147 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है। विश्वसनीय अनुमानों (जैसे Worldometer और UN डेटा) के अनुसार:
- फरवरी 2026 में वर्तमान आबादी लगभग 147.16 करोड़ (1,471,600,000+) है।
- मिड-2026 अनुमान: 147.66 करोड़ (1,476,625,576) के आसपास।
प्रति वर्ष लगभग 1.2-1.5 करोड़ लोगों की वृद्धि हो रही है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। भारत विश्व की कुल आबादी का करीब 17-18% हिस्सा रखता है। आज के प्रमुख बदलाव:
- साक्षरता दर: 80% से अधिक
- जीवन प्रत्याशा: काफी बढ़कर 70+ वर्ष के आसपास
- 2011 जनगणना के अनुसार धार्मिक संरचना: हिंदू 79.8%, मुस्लिम 14.2%, ईसाई 2.3%, सिख 1.7%
भारत में जनगणना का इतिहास
भारत में जनगणना हर 10 साल में होती है। आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोरोना महामारी और अन्य कारणों से स्थगित हो गई है और अभी तक पूरी नहीं हुई। नियमित जनगणना ब्रिटिश काल में शुरू हुई:
- पहली आधिकारिक जनगणना: 1872 में वायसराय लॉर्ड मेयो के समय
- नियमित 10-वर्षीय चक्र: 1881 से शुरू
हालांकि प्राचीन काल में भी जनगणना के उल्लेख मिलते हैं—ऋग्वेद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और अकबर के ‘आइन-ए-अकबरी’ में जनसंख्या गणना का जिक्र है। आजादी के बाद जनगणना विकास योजनाओं, संसाधन वितरण और नीतियों का आधार बनी है। अगली जनगणना के आंकड़े देश की प्रगति को और स्पष्ट करेंगे।