बजट 2026-27: भारतीय खेलों के स्वर्णिम भविष्य की नींव, वित्त मंत्री ने खेल बजट में की 1133 करोड़ की भारी बढ़ोतरी, ‘खेलो इंडिया मिशन’ का हुआ आगाज़
नई दिल्ली: भारत को एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने रविवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में युवा मामले और खेल मंत्रालय के लिए खजाने का द्वार खोल दिया गया है। सरकार ने इस बार खेल क्षेत्र के लिए कुल 4479.88 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट 3346.54 करोड़ रुपये की तुलना में 1133.34 करोड़ रुपये अधिक है। बजट में की गई यह प्रभावशाली वृद्धि न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशने के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ जैसे नए और महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की शुरुआत भी करेगी।
इस बजट की सबसे क्रांतिकारी घोषणा खेल सामग्री निर्माण क्षेत्र (Sports Goods Manufacturing) को लेकर रही है। भारत के इतिहास में पहली बार खेल सामग्री उद्योग के लिए 500 करोड़ रुपये का एक समर्पित और विशेष आवंटन किया गया है। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाले और किफायती खेल उपकरण बनाने का वैश्विक केंद्र बनने की अपार क्षमता है। उन्होंने खेल मंत्री मनसुख मांडविया के विजन को मजबूती देते हुए कहा कि यह निवेश अनुसंधान, नवाचार और डिजाइन पर केंद्रित होगा। इस पहल का सीधा उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ के तहत उन स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना है जो वैश्विक मानकों के खेल उपकरण तैयार करना चाहते हैं। खेल मंत्रालय ने इस ऐतिहासिक कदम का स्वागत करते हुए जल्द ही एक विस्तृत कार्ययोजना पेश करने की बात कही है।
खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और देश के प्रमुख स्टेडियमों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) को भी इस बजट से बड़ी राहत मिली है। साई के बजट को 880 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 917.38 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह वृद्धि राष्ट्रीय शिविरों के बेहतर आयोजन और खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होगी। हालांकि, एक ओर जहाँ प्रशिक्षण पर जोर दिया गया है, वहीं डोपिंग रोधी एजेंसियों के बजट में कुछ कटौती भी देखी गई है। राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला और राष्ट्रीय डोपिंग-विरोधी एजेंसी (नाडा) के बजट में मामूली कमी की गई है, जिससे डोपिंग के खिलाफ अभियान की भावी रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं।
बजट का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम का विस्तार है। सरकार ने अगले दशक के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि खेल अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार और कौशल विकास का एक बड़ा जरिया बन चुका है। नए मिशन के तहत मूलभूत से लेकर विशिष्ट स्तर तक के प्रशिक्षण केंद्रों का एक जाल बिछाया जाएगा। इसमें खेल विज्ञान, उन्नत तकनीक और प्रशिक्षकों के व्यवस्थित विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हालांकि खेलो इंडिया कार्यक्रम के लिए इस वर्ष 924.35 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के 1000 करोड़ के मूल आवंटन से कम है, लेकिन पिछले वर्ष के वास्तविक खर्च (700 करोड़) को देखते हुए यह एक व्यावहारिक और बड़ी राशि मानी जा रही है।
आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रमंडल खेलों के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में 78 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की है। इस वर्ष जुलाई-अगस्त में ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के लिए 50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जो पिछले साल केवल 28.05 करोड़ रुपये थे। इसके साथ ही, खिलाड़ियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को भी 28 करोड़ से बढ़ाकर 40 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पदक विजेताओं के मनोबल को बढ़ाने का काम करेगा। राष्ट्रीय खेल संघों के लिए सहायता राशि में भी 25 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब यह आंकड़ा 425 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
युवा विकास के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े वित्तीय आवंटन किए हैं। युवा हॉस्टलों के बजट में इस बार अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिली है। पिछले वर्ष जहां इसके लिए महज 1.10 करोड़ रुपये थे, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर 19.20 करोड़ रुपये कर दिया गया है। साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के बजट को 275 करोड़ से बढ़ाकर 357.39 करोड़ रुपये किया गया है, जो युवाओं की सामाजिक भागीदारी बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, मणिपुर स्थित राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय और कुछ अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बजट में कटौती की गई है, जो इस बजट का एक चुनौतीपूर्ण पहलू हो सकता है।
कुल मिलाकर, निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया यह बजट भारतीय खेलों को एक नई दिशा देने वाला है। खेल सामग्री निर्माण में आत्मनिर्भरता, ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभा खोज के लिए ‘खेलो इंडिया मिशन’ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयारियों के लिए बढ़ा हुआ फंड यह स्पष्ट करता है कि सरकार अगले दशक को भारतीय खेलों का ‘स्वर्णिम दशक’ बनाना चाहती है। यह बजट न केवल पदक की उम्मीदों को पंख देगा, बल्कि खेल क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।