• January 31, 2026

दावोस शिखर सम्मेलन 2026: कर्नाटक के लिए निवेश का नया सवेरा, मंत्री एमबी पाटिल ने पेश की 46 द्विपक्षीय बैठकों की रिपोर्ट

बंगलूरू: विश्व आर्थिक मंच (WEF) के वार्षिक शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद कर्नाटक के भारी और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने राज्य के आर्थिक भविष्य को लेकर एक सकारात्मक और उत्साहजनक तस्वीर पेश की है। शनिवार को बंगलूरू में आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पाटिल ने स्विट्जरलैंड के दावोस में हुई उच्च स्तरीय बैठकों का विवरण साझा किया। उन्होंने दावा किया कि हालांकि दावोस यात्रा के दौरान किसी औपचारिक समझौते या एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर नहीं किए गए, लेकिन इस वैश्विक मंच का उपयोग कर्नाटक के लिए एक ‘मजबूत निवेश पाइपलाइन’ तैयार करने में बेहद प्रभावी ढंग से किया गया है। मंत्री के अनुसार, वैश्विक दिग्गज कंपनियों और निवेशकों के साथ हुई ये चर्चाएं आने वाले समय में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

एमबी पाटिल ने अपनी यात्रा के दौरान की गई सक्रियता का ब्यौरा देते हुए बताया कि उन्होंने कुल 46 द्विपक्षीय बैठकें कीं, जिनमें दुनिया भर की प्रमुख कंपनियों, प्रभावशाली निवेशकों, प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों और विभिन्न देशों के नीति-निर्धारकों के साथ संवाद स्थापित किया गया। इन बैठकों की विविधता का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इनमें 26 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 15 से अधिक प्रमुख भारतीय औद्योगिक घराने शामिल थे। मंत्री ने जोर देकर कहा कि दावोस में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं था, बल्कि राज्य की औद्योगिक क्षमता को दुनिया के सामने इस तरह से प्रस्तुत करने के लिए था कि निवेशक कर्नाटक को भारत में अपने पहले गंतव्य के रूप में देखें।

इन बैठकों के मुख्य फोकस क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए पाटिल ने बताया कि विचार-विमर्श का दायरा अत्यंत विस्तृत था। इसमें भविष्य की तकनीक और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों जैसे एयरोस्पेस और रक्षा, उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing), स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy), डेटा केंद्र, डिजिटल बुनियादी ढांचा, जीवन विज्ञान, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा, खाद्य प्रसंस्करण और पेय पदार्थ जैसे पारंपरिक लेकिन तेजी से बढ़ते क्षेत्रों की कंपनियों के साथ भी गहन चर्चा हुई। मंत्री का मानना है कि इन क्षेत्रों में निवेश न केवल राज्य के राजस्व को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए उच्च-तकनीकी रोजगार के लाखों नए अवसर भी पैदा करेगा।

कर्नाटक के रणनीतिक महत्व को वैश्विक मानचित्र पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्री पाटिल ने सरकार-दर-सरकार (G2G) स्तर पर भी महत्वपूर्ण बातचीत की। उन्होंने जानकारी दी कि लिकटेंस्टीन और सिंगापुर जैसे देशों के नेतृत्व के साथ चर्चा की गई ताकि द्विपक्षीय सहयोग को एक नई दिशा दी जा सके। इन संवादों का मुख्य उद्देश्य संयुक्त रूप से निवेश आकर्षित करना और कर्नाटक के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालना था। सिंगापुर के साथ सहयोग को लेकर विशेष रूप से चर्चा हुई, क्योंकि वह दक्षिण-पूर्व एशिया में कर्नाटक का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार रहा है।

दावोस यात्रा के दौरान केवल कॉर्पोरेट जगत ही नहीं, बल्कि वैश्विक विचारकों और आर्थिक विशेषज्ञों के साथ भी कर्नाटक के प्रतिनिधिमंडल ने संवाद किया। मंत्री एमबी पाटिल ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रथम उप प्रबंध निदेशक गीता गोपीनाथ और देश के प्रसिद्ध युवा उद्यमी निखिल कामत जैसी दिग्गज हस्तियों के साथ हुई अपनी मुलाकातों का विशेष रूप से उल्लेख किया। इन बैठकों में वैश्विक आर्थिक रुझानों, बदलती हुई भू-राजनीतिक स्थितियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की निरंतर बढ़ती भूमिका पर विस्तार से विचार साझा किए गए। पाटिल ने कहा कि इन विशेषज्ञों से मिले सुझावों का उपयोग राज्य की भविष्य की औद्योगिक नीतियों को और अधिक धारदार बनाने में किया जाएगा।

विश्व आर्थिक मंच के नेतृत्व के साथ हुई बैठकों के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा कि उन्होंने अपलिंक के प्रमुख जॉन डटन और डब्ल्यूईएफ में अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश के प्रमुख सीन डोहर्टी से मुलाकात की। इस मुलाकात का प्राथमिक उद्देश्य डब्ल्यूईएफ के वैश्विक मंचों के साथ कर्नाटक की रणनीतिक भागीदारी को और अधिक संस्थागत और मजबूत बनाना था। नवाचार (Innovation), व्यापार सुगमता और स्थिरता (Sustainability) के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिससे कर्नाटक को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (Global Best Practices) को अपनाने में मदद मिलेगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाटिल ने एक महत्वपूर्ण बिंदु पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि दावोस में हुई चर्चाओं का मुख्य फोकस केवल कागजी समझौतों पर नहीं, बल्कि निवेश को आसान बनाने वाले व्यावहारिक उपायों पर था। उन्होंने बताया कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने कर्नाटक में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्रों को विस्तार देने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। विशेष रूप से विमानन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कर्नाटक की भौगोलिक स्थिति और कुशल मानव संसाधन को देखते हुए कंपनियां राज्य में बड़े निवेश की योजना बना रही हैं।

एमबी पाटिल ने अंत में विश्वास जताया कि दावोस में बोए गए ये बीज जल्द ही धरातल पर बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स के रूप में दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जो इन संभावित निवेशकों के साथ निरंतर संपर्क में रहेगी और उनकी जरूरतों को समझते हुए त्वरित समाधान प्रदान करेगी। मंत्री के इस बयान ने राज्य के व्यापारिक जगत में एक नई ऊर्जा भर दी है, और अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये ‘मजबूत पाइपलाइन’ कब वास्तविक परियोजनाओं में तब्दील होती है। 2026 की शुरुआत में मिली यह सकारात्मक दिशा कर्नाटक को भारत के औद्योगिक पावरहाउस के रूप में और अधिक सशक्त बनाने का वादा करती है।

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