राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संसद में ऐतिहासिक संबोधन: ‘विकसित भारत’ का रोडमैप और आतंकवाद पर कड़े प्रहार का उद्घोष
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्र के नाम एक दूरदर्शी और सशक्त संदेश दिया। बजट सत्र की शुरुआत में दिए गए इस अभिभाषण में राष्ट्रपति ने जहां एक ओर देश की सांस्कृतिक विरासत और महापुरुषों के योगदान को नमन किया, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के मोर्चे पर सरकार की भविष्य की रणनीतियों का खाका भी पेश किया। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 के साथ भारत इस शताब्दी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है और पिछले एक दशक में मजबूत की गई नींव अब ‘विकसित भारत’ की भव्य इमारत बनाने के लिए तैयार है।
अभिभाषण की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति ने भारत की महान विरासत और हाल के वर्षों में मनाए गए उत्सवों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछला वर्ष भारत की तीव्र प्रगति और अपनी जड़ों की ओर लौटने के उत्सव के रूप में यादगार रहा। पूरे देश में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का उल्लास मनाया जा रहा है, जो बंकिम चंद्र चटर्जी की उस कालजयी रचना के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है जिसने स्वाधीनता संग्राम में प्राण फूंके थे। राष्ट्रपति ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती जैसे आयोजनों को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सुदृढ़ करने वाला बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब देश अपने पूर्वजों और नायकों के योगदान को याद करता है, तो नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है, जो राष्ट्र निर्माण की गति को और तेज करती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राष्ट्रपति मुर्मू का रुख अत्यंत कड़ा और निर्णायक नजर आया। श्री गुरु तेग बहादुर जी के उपदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमें न तो किसी को डराना चाहिए और न ही किसी से डरना चाहिए। इसी निडर भावना के साथ भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया ने भारतीय सशस्त्र बलों की उस वीरता को देखा है जिसने आतंकवाद के गढ़ों को नेस्तनाबूद कर दिया। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया कि भारत पर होने वाले किसी भी हमले का जवाब अब बेहद मजबूत और निर्णायक होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के एक हिस्से के रूप में ‘सिंधु जल संधि’ को स्थगित रखने के फैसले और ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में हो रहे कार्यों की भी जानकारी दी।
आर्थिक और ग्रामीण सुधारों की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत-ग्राम विकास कानून’ की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस नए कानून के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को विस्तार दिया जाएगा और अब गांवों में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाएगी। राष्ट्रपति के इस ऐलान का सत्तापक्ष के सांसदों ने मेजें थपथपाकर स्वागत किया, हालांकि इस दौरान सदन में विपक्षी सांसदों का विरोध भी देखने को मिला जो इस कानून के प्रावधानों को लेकर अपनी असहमति जता रहे थे। राष्ट्रपति ने इसे ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।
नारी शक्ति के उत्थान को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने एक गौरवशाली उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) से महिला कैडेटों का पहला बैच सफलतापूर्वक उत्तीर्ण हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस विश्वास का प्रमाण है कि देश के सर्वांगीण विकास में महिलाएं अब नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। सरकार की प्रगतिशील नीतियों के कारण ही आज महिलाएं हर चुनौतीपूर्ण और महत्वाकांक्षी क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।
अभिभाषण के समापन की ओर बढ़ते हुए राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि 2026 से शुरू हो रहा यह नया दौर भारत की वैश्विक साख को और ऊँचा ले जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछला दशक नींव मजबूत करने का था और अब समय उस पर तेजी से आगे बढ़ने का है। यह संबोधन केवल सरकार की उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं था, बल्कि एक उभरते हुए नए भारत की वह हुंकार थी जो अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क, अपनी विरासत के प्रति गौरवशाली और अपने विकास के लक्ष्यों के प्रति संकल्पबद्ध है। राष्ट्रपति मुर्मू के इस संबोधन ने आगामी बजट सत्र और देश की भावी नीतिगत दिशा के लिए एक सुस्पष्ट और प्रेरक मंच तैयार कर दिया है।