• January 31, 2026

आसमान में खो गई देश की बड़ी हस्तियां: बारामती हादसे ने ताजा की उन विमान दुर्घटनाओं की याद, जिनमें भारत ने खोए अपने अनमोल रत्न

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह हुए दर्दनाक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन ने एक बार फिर देश को उन जख्मों की याद दिला दी है, जो समय-समय पर विमान दुर्घटनाओं ने भारत को दिए हैं। बारामती के रनवे के पास हुए इस क्रैश लैंडिंग में 66 वर्षीय अजित पवार समेत कुल छह लोगों की मौत हो गई। यह घटना एक ऐसे समय में हुई है जब देश पहले ही अहमदाबाद के मेघाणीनगर में हुए भीषण बोइंग 787 ड्रीमलाइनर हादसे के गम से उबरने की कोशिश कर रहा था, जिसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी सवार थे। भारत का इतिहास गवाह है कि तकनीकी खराबी, खराब मौसम या मानवीय चूक के कारण आसमान में हुए हादसों ने देश के परमाणु कार्यक्रम के शिल्पकारों से लेकर, भावी प्रधानमंत्रियों और जनप्रिय मुख्यमंत्रियों तक को हमसे छीन लिया है।

विमान हादसों के इस काले इतिहास की शुरुआत नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ मानी जाती है। 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ताइहोकू एयरपोर्ट पर एक जापानी सैन्य विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर आई, जिसमें दावा किया गया कि महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी बुरी तरह जल गए थे और अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर दशकों तक रहस्य बना रहा, लेकिन हाल के वर्षों में सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों ने इसी विमान हादसे की पुष्टि की है। इसी तरह, भारत के परमाणु विज्ञान के जनक होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु ने पूरे विश्व को चौंका दिया था। 24 जनवरी 1966 को एअर इंडिया की उड़ान 101 स्विट्जरलैंड की आल्प्स पहाड़ियों में मोंट ब्लांक से टकरा गई थी। महज 56 साल की उम्र में भाभा का जाना भारत के परमाणु शक्ति बनने के सपने के लिए एक बहुत बड़ा झटका था, जिसके पीछे पायलट और जिनेवा एटीसी के बीच हुए गलत संचार को कारण बताया गया।

भारतीय राजनीति में संजय गांधी का निधन एक ऐसी घटना थी जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। 23 जून 1980 को नई दिल्ली के सफदरजंग हवाई अड्डे पर एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान जब संजय गांधी खुद विमान उड़ा रहे थे, तब एक हवाई करतब के दौरान प्लेन अनियंत्रित होकर गिर गया। मात्र 33 साल की उम्र में उनके निधन ने कांग्रेस और देश की राजनीति की दिशा बदल दी। इसी तरह, ग्वालियर राजघराने के वारिस और कांग्रेस के कद्दावर नेता माधवराव सिंधिया का अंत भी आसमान में ही हुआ। 30 सितंबर 2001 को एक चुनावी रैली के लिए जा रहे सिंधिया का चार्टर्ड विमान मैनपुरी के पास खराब मौसम की भेंट चढ़ गया। इस हादसे में न केवल एक कुशल राजनेता खो गया, बल्कि उनके साथ सवार पत्रकारों और पायलटों की भी मौत हो गई।

दक्षिण भारत की राजनीति और प्रशासन ने भी ऐसे कई घाव झेले हैं। 3 मार्च 2002 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीएमसी बालयोगी का हेलीकॉप्टर आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में तकनीकी खराबी के कारण क्रैश हो गया। एक सक्रिय लोकसभा अध्यक्ष का इस तरह जाना संसदीय इतिहास की बड़ी क्षति थी। वहीं, 17 अप्रैल 2004 को बेंगलुरु के पास एक छोटे विमान हादसे में दक्षिण भारतीय फिल्मों की सुपरस्टार और ‘सूर्यवंशम’ फेम अभिनेत्री सौंदर्या (केएस सौम्या) का निधन हो गया। वे उस समय केवल 32 वर्ष की थीं और एक राजनीतिक अभियान के लिए जा रही थीं।

विमान हादसों की यह फेहरिस्त यहीं नहीं रुकती। 31 मार्च 2005 को हरियाणा के दो दिग्गज मंत्रियों—प्रसिद्ध उद्योगपति ओपी जिंदल और सुरेंद्र सिंह—की मौत सहारनपुर के पास एक हेलीकॉप्टर क्रैश में हुई। इसके बाद 3 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लामला के घने जंगलों में लापता हो गया। करीब 24 घंटे के बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद उनके और अन्य चार सहयोगियों के शव बरामद हुए। ठीक दो साल बाद, 2011 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोर्जी खांडू का हेलीकॉप्टर तवांग के पास 13 हजार फीट की ऊंचाई पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चार दिनों की मशक्कत के बाद उनका मलबा मिल सका।

आधुनिक भारत के सबसे बड़े सैन्य झटकों में से एक दिसंबर 2021 की वह घटना है, जब देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का एमआई-17 हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर के पास गिर गया। इस हादसे में जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 11 अन्य सैन्य अधिकारियों की मौत हो गई। हालिया रिपोर्टों में इस हादसे का कारण मानवीय चूक बताया गया है। भारतीय इतिहास में राजनेताओं के विमान हादसों की कड़ी में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता का नाम भी शामिल है, जिनका विमान 1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने मार गिराया था। आज बारामती में अजित पवार का जाना उसी दुखद सिलसिले की एक और कड़ी है, जो हमें याद दिलाती है कि आसमान की इन यात्राओं ने देश से उसकी अनमोल प्रतिभाएं समय-समय पर छीनी हैं।

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