• January 31, 2026

भारतीय मीडिया जगत में बड़ा उछाल: 2029 तक एक अरब पार होगी टीवी दर्शकों की संख्या, IIM अहमदाबाद की रिपोर्ट में खुलासा

अहमदाबाद: डिजिटल क्रांति और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते दबदबे के बीच भारतीय टेलीविजन जगत के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद की एक नवीनतम शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीवी दर्शकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी जारी रहेगी और साल 2029 तक यह आंकड़ा एक अरब (100 करोड़) के मील के पत्थर को पार कर सकता है। यह रिपोर्ट उन धारणाओं को चुनौती देती है जिनमें कहा जा रहा था कि इंटरनेट के विस्तार से टीवी के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

आईआईएम अहमदाबाद के ‘ब्रिज डिसा सेंटर फॉर डाटा साइंस एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (CDSA) द्वारा समर्थित इस विश्लेषण अध्ययन का शीर्षक ‘भारत में टीवी का भविष्य’ रखा गया है। इस विस्तृत रिपोर्ट को संस्थान के प्रोफेसर विश्वनाथ पिंगली और प्रोफेसर अंकुर सिन्हा ने तैयार किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के टेलीविजन परिदृश्य में प्रति वर्ष दो से तीन प्रतिशत की एक स्थिर और टिकाऊ वृद्धि दर बनी रहेगी, जो अगले पांच वर्षों में इसे एक नए शिखर पर ले जाएगी।

आर्थिक विकास और साक्षरता दर का सीधा असर

रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि भारत का टेलीविजन बाजार केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि देश के आर्थिक संकेतकों का प्रतिबिंब भी है। शोधकर्ताओं के अनुसार, देश की बढ़ती ‘डिस्पोजेबल आय’ (खर्च योग्य आय) और साक्षरता दर में सुधार का सीधा प्रभाव कंटेंट की खपत पर पड़ रहा है। जैसे-जैसे लोगों की आर्थिक स्थिति सुधर रही है, टेलीविजन सेट खरीदना और डीटीएच या केबल कनेक्शन लेना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के प्रसार से सूचनात्मक और शैक्षिक कंटेंट की मांग बढ़ी है, जिसने दर्शकों को टीवी स्क्रीन से जोड़े रखा है। रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि इंटरनेट की बढ़ती पहुंच टीवी को खत्म करने के बजाय उसके पूरक के रूप में काम कर रही है। स्मार्ट टीवी और हाइब्रिड सेट-टॉप बॉक्स के जरिए लोग इंटरनेट और पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग दोनों का आनंद ले रहे हैं।

ग्रामीण भारत और कम आय वाले राज्य बनेंगे ‘ग्रोथ इंजन’

इस अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों और कम आय वाले राज्यों पर केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में टीवी दर्शकों की संख्या में सबसे अधिक विस्तार इन्हीं क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में, जहां वर्तमान में टीवी की पहुंच विकसित राज्यों की तुलना में कम है, वहां आय का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।

आईआईएम की रिपोर्ट का अनुमान है कि जब इन राज्यों की आय का स्तर उच्च आय वाले राज्यों के वर्तमान स्तर के करीब पहुंचेगा, तो टीवी दर्शकों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल आएगा। ग्रामीण इलाकों में बिजली की बेहतर उपलब्धता और बुनियादी ढांचे के विकास ने भी टीवी को घर-घर पहुंचाने में मदद की है। रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञापनदाताओं और ब्रॉडकास्टर्स के लिए आने वाले समय में ग्रामीण बाजार ही सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।

जनसांख्यिकीय पैटर्न और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का विश्लेषण

‘भारत में टीवी का भविष्य’ रिपोर्ट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टेलीविजन खपत को आकार देने वाले विभिन्न जनसांख्यिकीय पैटर्न का भी गहराई से विश्लेषण करती है। प्रोफेसर पिंगली और सिन्हा ने अपनी जांच में जनसंख्या की संरचना, परिवारों की आर्थिक स्थिति और उनके आसपास के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (Digital Ecosystem) को शामिल किया है।

अध्ययन में पाया गया कि भारतीय परिवारों में टीवी आज भी एक ‘सामूहिक अनुभव’ (Joint Family Experience) का हिस्सा है। व्यक्तिगत उपकरणों (मोबाइल) पर कंटेंट देखने के बावजूद, परिवार के साथ बैठकर समाचार, खेल और मनोरंजन कार्यक्रम देखने की संस्कृति अभी भी बहुत मजबूत है। यही कारण है कि भारतीय बाजार पश्चिमी देशों की तुलना में अलग व्यवहार कर रहा है, जहां ‘कॉर्ड-कटिंग’ (केबल टीवी छोड़ना) का चलन अधिक है।

निष्कर्ष और भविष्य की राह

कुल मिलाकर, आईआईएम अहमदाबाद की यह रिपोर्ट भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग के लिए एक मजबूत भविष्य की तस्वीर पेश करती है। यह बताती है कि भारत एक बहु-स्क्रीन वाला राष्ट्र बन रहा है जहां मोबाइल और टीवी एक साथ सह-अस्तित्व में रहेंगे। 2029 तक एक अरब दर्शकों का लक्ष्य न केवल ब्रॉडकास्टर्स के लिए खुशखबरी है, बल्कि यह वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक संकेत है कि भारतीय टीवी बाजार में अभी निवेश की अपार संभावनाएं बची हुई हैं।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *