शिवसेना कोई पार्टी नहीं बल्कि एक विचार है, भाजपा इसे कभी खत्म नहीं कर सकती: उद्धव ठाकरे
महानगरपालिका चुनावों के नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट पैदा हो गई है। हाल ही में संपन्न हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में अपनी पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कड़ा संदेश दिया है। अपने पिता और शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बाल ठाकरे की जन्मशती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं है, बल्कि एक विचारधारा है जिसे खत्म करना भाजपा के बस की बात नहीं है। उन्होंने भाजपा की जीत को एक ‘बड़ी भूल’ और ‘छल’ करार दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) एक विचार है, पार्टी मात्र नहीं
मुंबई के षणमुखानंद हॉल में शुक्रवार को कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने कहा कि भाजपा को लगता है कि बीएमसी की सत्ता छीनकर और पार्टी में फूट डालकर वे शिवसेना को मिटा देंगे, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि शिवसेना एक विचार है जो महाराष्ट्र के हर घर में बसता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की सत्ता का दुरुपयोग कर ‘ठाकरे’ नाम को मिटाने की साजिश रची जा रही है, लेकिन जनता इस विरासत को कभी मिटने नहीं देगी। उद्धव ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि उनके पिता ने शिवसेना का गठन मराठी मानुष के अधिकारों की रक्षा के लिए किया था और आज भी वे उसी रास्ते पर अडिग हैं।
उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि आज जो लोग बीएमसी पर कब्जा करने का जश्न मना रहे हैं, वे यह भूल गए हैं कि अगर शिवसेना का साथ नहीं मिला होता, तो भाजपा कभी भी मंत्रालय या बीएमसी मुख्यालय की दहलीज तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने पुराने दिनों की याद दिलाते हुए कहा कि शिवसेना ने ही भाजपा को मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में पैर जमाने में मदद की थी, लेकिन अब वही भाजपा शिवसेना को ही निगलना चाहती है।
बीएमसी चुनाव के चौंकाने वाले नतीजे और गठबंधन का असर
15 जनवरी को हुए बीएमसी चुनाव के नतीजों ने मुंबई की राजनीति में तीन दशकों से चले आ रहे ठाकरे परिवार के वर्चस्व को हिलाकर रख दिया है। 227 सीटों वाली इस नगर निगम में भाजपा 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 29 सीटें हासिल की हैं। भाजपा और शिंदे गुट के इस ‘महायुति’ गठबंधन ने बहुमत के आंकड़े को छू लिया है, जिससे देश की सबसे अमीर नगर निगम की चाबी अब भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के पास चली गई है।
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस चुनाव में एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे की पार्टी मनसे ने हाथ मिलाया था। मनसे को हालांकि केवल 6 सीटें ही मिलीं, लेकिन इस ‘शिवशक्ति’ गठबंधन ने कई क्षेत्रों में भाजपा को कड़ी टक्कर दी। इसके बावजूद, वे महायुति को बहुमत हासिल करने से नहीं रोक सके। उद्धव ने कहा कि भले ही नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन उनकी पार्टी नगर निगम में एक मजबूत और सजग विपक्ष की भूमिका निभाएगी।
‘गुलामों का बाजार’ और धनबल के आरोप
कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे से पहले मंच पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी भाजपा पर जमकर प्रहार किया। राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की तुलना ‘गुलामों के बाजार’ से की। उन्होंने हाल के निकाय चुनावों, विशेषकर कल्याण-डोंबिवली का जिक्र करते हुए कहा कि आज की राजनीति में जनमत का सम्मान नहीं बल्कि नेताओं की ‘नीलामी’ हो रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि यह समय हार मानकर बैठने का नहीं, बल्कि फिर से खड़े होने का है।
उद्धव ठाकरे ने भी इन आरोपों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस बीएमसी चुनाव में जिस स्तर पर धनबल और सत्ता का दुरुपयोग हुआ, वैसा पहले कभी नहीं देखा गया। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में जानबूझकर खामियां रखी गईं और कई स्थानों पर ‘दोहरे मतदाताओं’ की समस्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर शिवसेना (यूबीटी) की टीम ने बूथ स्तर पर सतर्कता बरतकर इन दोहरे मतदाताओं की पहचान नहीं की होती, तो नतीजे और भी बुरे हो सकते थे। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा मुंबई को केवल एक रियल एस्टेट का टुकड़ा मानती है और इसे निगलने की कोशिश कर रही है।
सांस्कृतिक पहचान और ‘जय महाराष्ट्र’ का नारा
राजनीतिक चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे ने सांस्कृतिक मुद्दों को भी छुआ। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा पहली कक्षा से हिंदी को अनिवार्य करने के फैसले की कड़ी आलोचना की। हालांकि सरकार ने बाद में इस फैसले को वापस ले लिया था, लेकिन उद्धव ने इसे महाराष्ट्र पर ‘गैर-मराठी संस्कृति’ थोपने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि शिवसेना कभी भी हिंदी के खिलाफ नहीं रही है, लेकिन मराठी के ऊपर किसी भी भाषा को थोपना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को आगाह किया कि आज ‘जय महाराष्ट्र’ का नारा और मराठी अस्मिता खतरे में है। उद्धव ने अपील की कि हर कार्यकर्ता और मराठी व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में ‘नमस्ते’ या ‘हेलो’ की जगह ‘जय महाराष्ट्र’ को अभिवादन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए ताकि हमारी पहचान बनी रहे।
भविष्य की रणनीति: नए सिरे से शुरुआत
चुनाव में मिली हार को स्वीकार करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि अब हमें नए सिरे से शुरुआत करनी होगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे हार से निराश न हों बल्कि जनता के बीच जाकर भाजपा की साजिशों का पर्दाफाश करें। उन्होंने दोहराया कि सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन जो विचार और संकल्प बाल ठाकरे ने दिया था, वह अमर है। उद्धव ठाकरे का यह भाषण स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले समय में मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मराठी अस्मिता’ और ‘विचारधारा’ की यह लड़ाई और भी तेज होने वाली है।