सीआईएसएफ में ‘वीआईपी कल्चर’ पर सर्जिकल स्ट्राइक: अब दौरों पर वरिष्ठ अफसरों को नहीं मिलेंगे महंगे गिफ्ट और बुके, खाने-रुकने का बिल भी खुद भरना होगा
नई दिल्ली: अर्धसैनिक बलों में लंबे समय से चली आ रही ‘दिखावे की संस्कृति’ और ‘अनावश्यक खर्चों’ पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सीआईएसएफ मुख्यालय ने एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए बल के भीतर चल रही फिजूलखर्ची को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्देश दिया है। नए नियमों के मुताबिक, अब यूनिट या बटालियन के दौरे पर जाने वाले किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को महंगे उपहार, मोमेंटो या फूलों के बुके (गुलदस्ते) नहीं दिए जाएंगे।
महानिदेशक (DG) की सहमति से जारी इस आदेश में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब दौरे पर जाने वाले अधिकारियों को अपने रहने और खाने-पीने का खर्च अपनी जेब से वहन करना होगा। यह कदम उस प्रथा को खत्म करने के लिए उठाया गया है जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के निरीक्षण या दौरे के दौरान स्थानीय यूनिटों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता था। मुख्यालय का मानना है कि इस तरह के अनावश्यक खर्च न केवल बल की छवि को धूमिल करते हैं, बल्कि सरकारी संसाधनों का अनुचित उपयोग भी हैं।
यूनिटों पर पड़ने वाला बोझ और ‘गिफ्ट’ संस्कृति पर पूर्ण प्रतिबंध
सीआईएसएफ मुख्यालय द्वारा पिछले सप्ताह एडीजी (एपीएस/नॉर्थ एंड साउथ), सभी सेक्टरों के आईजी, जोनल हेडक्वार्टर के डीआईजी और सभी यूनिटों व बटालियनों के कमांडरों को एक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बल की विभिन्न यूनिटों और प्रतिष्ठानों में जब भी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निरीक्षण या विजिट किया जाता है, तो उस दौरान दिखावे के नाम पर काफी धन खर्च किया जाता है।
आदेश में उल्लेख किया गया है कि स्वागत सत्कार के दौरान दिए जाने वाले महंगे गिफ्ट और मोमेंटो पूरी तरह से ‘फिजूलखर्ची’ की श्रेणी में आते हैं। इससे संगठन का अनावश्यक खर्च बढ़ता है। नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी सीनियर अफसर के स्वागत के दौरान अब ‘गिफ्ट और मोमेंटो’ देने की प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि यह खर्च अनुचित है और इसे आसानी से बचा जा सकता है ताकि उस धन का उपयोग बल के जवानों के कल्याण और अन्य आवश्यक कार्यों में किया जा सके।
‘बिल चुकाएं या टीए/डीए छोड़ें’: रहने और खाने के खर्च पर सख्ती
अक्सर यह देखा गया है कि जब भी कोई उच्च अधिकारी किसी यूनिट के दौरे पर जाता है, तो स्थानीय यूनिट उनके रहने और खान-पान का सारा प्रबंध करती है, जिसका भुगतान यूनिट के फंड से या अन्य गुप्त स्रोतों से किया जाता है। दूसरी तरफ, दौरे पर आए अधिकारी सरकार से यात्रा भत्ता (TA) और दैनिक भत्ता (DA) क्लेम करते हैं, जो उनके व्यक्तिगत खर्चों के लिए होता है।
इस दोहरी प्रणाली को खत्म करने के लिए सीआईएसएफ मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि अब जो भी अधिकारी विजिट पर पहुँचेगा, वह अपने रहने और खाने का बिल खुद चुकाएगा। यदि वह अधिकारी ‘जीओ मैस’ (Gazetted Officers’ Mess) में ठहरता है, तो उसे वहां के रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि करनी होगी और खाने व रुकने का निर्धारित बिल जमा करना होगा। पत्र में कड़े शब्दों में कहा गया है कि कुछ अधिकारी नियमानुसार बिल चुकाने से गुरेज करते हैं, जो अब अनुशासनहीनता माना जाएगा। चूंकि अधिकारियों को इन दौरों के लिए सरकार से पर्याप्त भत्ता मिलता है, इसलिए यूनिट पर बोझ डालना नैतिक और कानूनी रूप से गलत है।
बुके प्रथा का अंत: ‘ड्यूटी है, जश्न नहीं’
सीआईएसएफ के नए आदेश में ‘बुके’ यानी फूलों के गुलदस्ते देने की प्रथा को भी बंद करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यालय ने तर्क दिया है कि जब कोई अधिकारी सरकारी कार्य से किसी यूनिट में जाता है, तो वह उसकी आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा है। ड्यूटी के निर्वहन के लिए इस तरह के भव्य स्वागत और फूलों के प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है।
अधिकारियों को यह याद दिलाया गया है कि सादगी बल का मूल मंत्र होना चाहिए। गुलदस्तों और मालाओं पर होने वाला खर्च भले ही व्यक्तिगत स्तर पर कम लगे, लेकिन पूरे देश में फैली सीआईएसएफ की सैकड़ों यूनिटों के स्तर पर यह एक बड़ी राशि बन जाती है। इस कदम का उद्देश्य अधिकारियों को यह अहसास कराना है कि उनका दौरा एक पेशेवर निरीक्षण है, न कि कोई सामाजिक उत्सव। इससे निचले स्तर के अधिकारियों और जवानों के बीच भी एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि वरिष्ठ नेतृत्व सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को प्राथमिकता दे रहा है।
छवि सुधारने और वित्तीय अनुशासन की ओर एक कदम
मुख्यालय के पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि इस तरह की फिजूलखर्ची से संगठन और यूनिट की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब स्थानीय स्तर पर जवानों और जूनियर अधिकारियों को वीआईपी सत्कार के लिए इंतजामों में जुटना पड़ता है, तो उससे उनकी मूल ड्यूटी और मनोबल प्रभावित होता है। सीआईएसएफ अब एक ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना चाहता है जहाँ जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीआईएसएफ का यह आदेश अन्य अर्धसैनिक बलों (जैसे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी) के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है। ‘वीआईपी कल्चर’ को खत्म करने की दिशा में यह एक साहसिक शुरुआत है। इससे न केवल सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि बल के भीतर एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी माहौल तैयार होगा।
आदेश का कार्यान्वयन और निगरानी
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सभी यूनिट कमांडरों को हिदायत दी गई है कि वे अपने क्षेत्र में आने वाले किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के लिए उपहार या फूलों का प्रबंध न करें। यदि कोई अधिकारी नियमों का उल्लंघन करता है या बिल चुकाने में आनाकानी करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग सीधे मुख्यालय को की जा सकती है।
सीआईएसएफ के इस कदम की सोशल मीडिया और सुरक्षा हलकों में काफी सराहना हो रही है। लोग इसे ‘न्यू इंडिया’ की बदलती प्रशासनिक कार्यशैली के रूप में देख रहे हैं, जहाँ पद के रुतबे से अधिक कर्तव्य और सादगी को महत्व दिया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अन्य विभाग और बल इस अनुकरणीय कदम को कितनी जल्दी अपनाते हैं।