हरिद्वार में अमित शाह की हुंकार: “अब हिंदुत्व की बात करने में कोई डर नहीं, भारतीय परंपरा में ही दुनिया की हर समस्या का समाधान”
हरिद्वार: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे के दौरान गुरुवार को धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचे। यहाँ उन्होंने तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत करते हुए न केवल सरकार के एजेंडे को स्पष्ट किया, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण पर भी जोर दिया। बैरागी कैंप में आयोजित शांतिकुंज के शताब्दी समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते हुए अमित शाह ने कहा कि देश में एक बड़ा वैचारिक परिवर्तन आया है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि एक समय था जब लोग सार्वजनिक रूप से हिंदुत्व की बात करने से कतराते या डरते थे, लेकिन आज पूरे आत्मविश्वास के साथ चारों ओर हिंदुत्व का नारा गूंज रहा है।
अपने संबोधन में गृह मंत्री ने शांतिकुंज के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी के योगदान को अविस्मरणीय बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ऋषि परंपरा और आध्यात्मिकता में वह शक्ति है जो विश्व की समस्त आधुनिक समस्याओं का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर सकती है। अमित शाह ने शांतिकुंज के माध्यम से चल रहे गायत्री आंदोलन को ‘युग परिवर्तन’ का आधार करार दिया।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य: युगदृष्टा और सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत
शांतिकुंज के शताब्दी समारोह और अखंड ज्योति पत्रिका के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गृह मंत्री ने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के जीवन और उनके कार्यों को नमन किया। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी ने अपने छोटे से जीवनकाल में वह काम कर दिखाया जो कई युगों में संभव होता है। अमित शाह के अनुसार, उनके द्वारा शुरू किया गया आंदोलन आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जिसके तहत विश्वभर में 15 करोड़ से अधिक अनुयायी आध्यात्मिकता और सदाचार के मार्ग पर चल रहे हैं।
अमित शाह ने विशेष रूप से जाति और लिंग भेद के खिलाफ आचार्य जी के संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा, “पंडित श्रीराम शर्मा ने समाज के हर वर्ग, हर जाति और हर लिंग के व्यक्ति को गायत्री मंत्र के माध्यम से आत्म-कल्याण का मार्ग दिखाया। उन्होंने उन रूढ़ियों को तोड़ा जिन्होंने समाज को जकड़ रखा था और आध्यात्मिकता को जन-जन के लिए सुलभ बनाया।” उन्होंने ‘अखंड ज्योति’ की शताब्दी को राष्ट्र की वैचारिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।
वर्ष 1925-26: राष्ट्रीय पुनर्जागरण का ऐतिहासिक कालखंड
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक संदर्भ साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925-26 भारत के इतिहास में ‘राष्ट्रीय पुनर्जागरण’ का वर्ष था। इसी कालखंड में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और अखंड ज्योति का दीप जलाया था, और संयोगवश इसी कालखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) यानी ‘संघ परिवार’ की स्थापना भी हुई थी।
गृह मंत्री ने कहा कि इन दोनों ही आंदोलनों का मूल उद्देश्य एक ही था—भारत को उसकी खोई हुई सांस्कृतिक पहचान वापस दिलाना और राष्ट्र को गौरवशाली बनाना। उन्होंने कहा कि आज जब हम इन शताब्दी समारोहों को मना रहे हैं, तो हमें उस विजन को याद रखना चाहिए जिसने दासता के कालखंड में भी स्वाभिमान की लौ जलाए रखी थी। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़कर विकसित भारत के संकल्प को सिद्ध करें।
हिंदुत्व का गौरव और बदलता भारत
अमित शाह ने वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिवेश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज भारत अपनी विरासत पर गर्व करना सीख गया है। उन्होंने कहा, “एक दौर वह भी था जब ‘हिंदुत्व’ शब्द को लेकर एक प्रकार की हिचक या डर का माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान के साथ अपनाया है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदुत्व केवल एक पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति है जो वसुधैव कुटुंबकम (पूरा विश्व एक परिवार है) के सिद्धांत पर आधारित है। उनके अनुसार, आज दुनिया जब जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तो वह समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। योग, आयुर्वेद और गायत्री साधना जैसे भारतीय मूल्य ही वैश्विक शांति का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
पतंजलि में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का उपहार
हरिद्वार दौरे के दौरान गृह मंत्री ने पतंजलि योगपीठ द्वारा नवनिर्मित ‘पतंजलि इमरजेंसी एंड क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल’ का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि भारत अब आयुर्वेद के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं (Critical Care) के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग जो गायत्री उपासना और योग के साथ जुड़े हैं, उनकी यह जिम्मेदारी है कि वे स्वस्थ भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
अमित शाह ने डॉ. चिनमय पंड्या (शांतिकुंज के प्रति कुलपति) के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि नई ऊर्जा और जोश के साथ आगामी सौ वर्षों के लक्ष्य निर्धारित करने होंगे। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज जैसे संस्थानों को शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रसार का केंद्र बने रहना चाहिए। गृह मंत्री ने भरोसा जताया कि गायत्री परिवार के करोड़ों कार्यकर्ता भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने के सपने को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राष्ट्रवाद की नई दिशा
गृह मंत्री के इस दौरे और उनके बयानों को राजनीतिक विश्लेषक ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की धार को और तेज करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार की विकास यात्रा और देश की आध्यात्मिक यात्रा एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने शांतिकुंज की टोली और गायत्री परिवार के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि जिस अखंड ज्योति को 100 साल पहले जलाया गया था, वह आज करोड़ों हृदयों को प्रकाशित कर रही है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों से प्रेरित होकर भारत अपनी सभ्यतागत विजय की ओर अग्रसर होगा। हरिद्वार की इस पावन धरती से अमित शाह का यह संदेश न केवल आध्यात्मिक था, बल्कि इसमें राष्ट्र निर्माण की एक गहरी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता भी झलक रही थी।