• January 31, 2026

राहुल गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला: “गरीबों का सुरक्षा कवच छीन रही है भाजपा”

रायबरेली/नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक बार फिर तीखा हमला बोला है। अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली के दौरे के दौरान एक ‘मनरेगा चौपाल’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के सबसे गरीब तबके के ‘काम के अधिकार’ यानी मनरेगा योजना को सोची-समझी रणनीति के तहत खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने की है और वे देश में ‘राजा का शासन’ स्थापित करना चाहते हैं, जहां आम जनता की आवाज के बजाय केवल सत्ता के गलियारों से फैसले लिए जाएं।

राहुल गांधी ने मनरेगा की तुलना विवादास्पद ‘तीन कृषि कानूनों’ से करते हुए कहा कि भाजपा सरकार मजदूरों के साथ वैसा ही व्यवहार करने की तैयारी में है, जैसा उसने किसानों के साथ किया था। उन्होंने केंद्र द्वारा मनरेगा को बदलकर लाए गए नए कानून ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-GRAMG को गरीबों के खिलाफ एक साजिश करार दिया।

मनरेगा बनाम कृषि कानून: राहुल गांधी की चेतावनी

कांग्रेस नेता ने अपने संबोधन में विशेष रूप से कृषि कानूनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार ने तीन काले कृषि कानूनों के जरिए खेती-किसानी को बड़े उद्योगपतियों के हवाले करने की कोशिश की थी, ठीक उसी तरह अब मनरेगा को कमजोर कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। राहुल के मुताबिक, “यह केवल एक नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह उस कानूनी सुरक्षा को हटाने का प्रयास है जो यूपीए सरकार ने गरीबों को दी थी।”

उन्होंने तर्क दिया कि मनरेगा एक ‘मांग आधारित’ (Demand-driven) योजना थी, जिसमें मजदूर को काम मांगने पर रोजगार देना सरकार की कानूनी बाध्यता थी। लेकिन नए प्रावधानों के तहत इसे केंद्रीकृत किया जा रहा है, जिससे पंचायतों की शक्ति कम हो जाएगी और मजदूरों को काम के लिए नौकरशाहों के रहमोकरम पर निर्भर रहना होगा। राहुल ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जैसे किसानों ने एकजुट होकर सरकार को पीछे हटने पर मजबूर किया था, वैसे ही देश का मजदूर वर्ग भी अपने अधिकारों के लिए खड़ा होगा।

“बीजेपी चाहती है राजा का शासन”

भाजपा की विचारधारा पर प्रहार करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में दो विचारधाराओं की लड़ाई है। एक तरफ कांग्रेस है जो चाहती है कि शक्ति का विकेंद्रीकरण हो और पंचायतों के माध्यम से गांव का गरीब खुद अपने भाग्य का फैसला करे। वहीं दूसरी तरफ भाजपा और आरएसएस की सोच है जो देश में ‘राजा का शासन’ चाहती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी सत्ता को दिल्ली में केंद्रित करना चाहते हैं ताकि देश की संपत्ति पर कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों का नियंत्रण हो सके। राहुल ने सवाल उठाया कि क्यों महात्मा गांधी का नाम योजना से हटाया गया? उनके अनुसार, यह सीधे तौर पर बापू के विचारों और ग्रामीण स्वावलंबन की अवधारणा पर हमला है। उन्होंने कहा, “मोदी जी चाहते हैं कि भारत एक ऐसा देश बने जहां केवल एक व्यक्ति सब कुछ तय करे और बाकी जनता केवल आदेशों का पालन करे। हम इस तानाशाही सोच को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।”

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सुरक्षा कवच पर संकट

राहुल गांधी ने कोरोना काल का जिक्र करते हुए मनरेगा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब महामारी के दौरान देश की पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो गई थी और शहर से गांव लौटे लाखों मजदूरों के पास खाने के लाले पड़े थे, तब केवल मनरेगा ही वह सहारा था जिसने उन्हें भुखमरी से बचाया। सरकार अब उसी सुरक्षा कवच को छेद रही है।

कांग्रेस नेता ने बताया कि नए कानून के तहत फंडिंग का बड़ा बोझ राज्यों पर डाल दिया गया है। पहले केंद्र सरकार मजदूरी का 90% से 100% हिस्सा वहन करती थी, लेकिन अब राज्यों को 40% तक का योगदान देने के लिए कहा जा रहा है। राहुल का आरोप है कि भाजपा शासित राज्य इस फंड को रोकने का काम करेंगे, जिससे अंततः योजना दम तोड़ देगी। उन्होंने कहा कि मनरेगा के फंड को काटकर उसे बड़े कॉर्पोरेट घरानों की ओर मोड़ा जा रहा है, जबकि गरीब के हाथ खाली हो रहे हैं।

‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ और कांग्रेस की रणनीति

अपनी बात को जनता तक ले जाने के लिए कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है, जो 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि गरीबों की आजीविका बचाने का संघर्ष है। इस अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर पंचायतों के माध्यम से प्रस्ताव पारित करेंगे और जनता को बताएंगे कि कैसे उनके रोजगार के अधिकार पर हमला किया जा रहा है।

रायबरेली में आयोजित इस कार्यक्रम में भारी संख्या में ग्रामीण और मनरेगा कार्यकर्ता पहुंचे थे। राहुल ने उनसे संवाद करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर सरकार को चैन से नहीं बैठने देगी। उन्होंने मांग की कि मनरेगा को उसके पुराने स्वरूप में बहाल किया जाए और न्यूनतम मजदूरी को बढ़ाकर ₹400 प्रतिदिन किया जाए।

राजनीतिक निहितार्थ और भविष्य की राह

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ग्रामीण भारत में आर्थिक संकट एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दलों का मानना है कि ग्रामीण रोजगार में कटौती सीधे तौर पर वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। राहुल ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को 2024 के बाद के भारत की सबसे बड़ी लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘राजा का शासन’ जैसे शब्दों का उपयोग कर राहुल गांधी प्रधानमंत्री की कार्यशैली को लोकतंत्र के विपरीत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर केंद्र और विपक्ष के बीच कड़वाहट बढ़ा दी है, जिससे आने वाले बजट सत्र के भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। कांग्रेस अब देशभर के मजदूरों को एकजुट कर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है, जिसकी धमक आने वाले समय में दिल्ली की राजनीति में स्पष्ट सुनाई देगी।

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