सुनीता विलियम्स की नासा से विदाई और भारत यात्रा: अंतरिक्ष से दिखने वाली पृथ्वी की एकता और मानवता को शांति का संदेश
नई दिल्ली: भारतीय मूल की दिग्गज अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में 27 वर्षों की शानदार और ऐतिहासिक सेवा के बाद अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) से सेवानिवृत्ति ले ली है। अपनी रिटायरमेंट के तुरंत बाद भारत के दौरे पर आईं 60 वर्षीय विलियम्स ने दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न केवल अपनी पेशेवर यात्रा के अनुभव साझा किए, बल्कि ब्रह्मांड के उस विशाल कैनवास से पृथ्वी की सुंदरता और मानवता की एकता का एक नया दृष्टिकोण भी पेश किया। अमेरिकन सेंटर में आयोजित “आंखें सितारों पर, पैर जमीन पर” (Eyes on the Stars, Feet on the Ground) नामक सत्र में उन्होंने बताया कि जब कोई व्यक्ति पृथ्वी की सीमाओं से बाहर निकलकर उसे एक संपूर्ण ग्रह के रूप में देखता है, तो इंसानी मतभेद और आपसी झगड़े कितने बेमानी और बेतुके लगने लगते हैं।
अंतरिक्ष यात्रा और जीवन के प्रति बदला हुआ नजरिया
सुनीता विलियम्स ने अपने संबोधन की शुरुआत इस बात से की कि अंतरिक्ष में बिताए गए समय ने उनके जीवन दर्शन को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि हम जमीन पर रहकर जिन मुद्दों, सीमाओं और विचारधाराओं पर घंटों बहस करते हैं या एक-दूसरे से मतभेद रखते हैं, वे अंतरिक्ष से देखने पर बहुत छोटी और ‘बेवकूफी भरी’ नजर आती हैं। उनके अनुसार, पृथ्वी ऊपर से किसी देश या नक्शे की तरह नहीं, बल्कि एक जीवित, सांस लेते हुए नीले गोले की तरह दिखती है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है।
विलियम्स ने साझा किया कि जब आप खिड़की से बाहर देखते हैं, तो आपको राजनीतिक सीमाएं नजर नहीं आतीं। आपको बस महासागरों का नीलापन, बादलों की सफेदी और जंगलों का हरापन दिखाई देता है। इस दृश्य ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि मानवता आखिर छोटे-छोटे स्वार्थों के लिए आपस में क्यों लड़ती है? उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि ब्रह्मांड की विशालता के सामने हमारी पृथ्वी एक नाजुक घर की तरह है, जिसे संजोकर रखने के लिए दुनिया के सभी देशों को आपसी विवाद भुलाकर साथ आना ही होगा।
बोइंग स्टारलाइनर का चुनौतीपूर्ण अनुभव: जब 8 दिन का मिशन 9 महीने में बदला
अपनी बातचीत के दौरान सुनीता विलियम्स ने अपने सबसे हालिया और चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष मिशन का भी जिक्र किया। गौरतलब है कि वे बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के पहले चालक दल परीक्षण उड़ान का हिस्सा थीं। तकनीकी खराबी के कारण इस मिशन में कई बाधाएं आईं और जो परीक्षण केवल आठ दिनों के लिए निर्धारित था, वह अप्रत्याशित रूप से नौ महीने से अधिक समय तक खिंच गया। इस लंबी अवधि को उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताया।
इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने इसे ‘टीम वर्क’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष की प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने और काम करने के लिए सहयोग ही एकमात्र विकल्प है। विलियम्स ने जोर देकर कहा कि अंतरिक्ष यात्रा वास्तव में एक ‘टीम खेल’ है, जहां आपकी जान आपके साथी के भरोसे होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जिस तरह अंतरिक्ष स्टेशन पर विभिन्न देशों के यात्री बिना किसी भेदभाव के एक साथ रहते और शोध करते हैं, ठीक वैसा ही सहयोग पृथ्वी पर भी संभव होना चाहिए।
अंतरिक्ष में अपने घर और जड़ों की तलाश
विलियम्स ने एक बहुत ही मानवीय पहलू पर बात करते हुए बताया कि हर अंतरिक्ष यात्री जब पहली बार शून्य में पहुंचता है, तो उसका पहला उद्देश्य अपने घर को ढूंढना होता है। उन्होंने बताया कि उनके पिता भारत से हैं और मां स्लोवेनिया से, इसलिए अंतरिक्ष से वे हमेशा इन दोनों देशों के भूगोल को निहारती रहती थीं। उन्होंने कहा, “जब आप अंतरिक्ष में जाते हैं, तो हम सभी स्वाभाविक रूप से उन स्थानों की तलाश करते हैं जिन्हें हम अपना घर कह सकें। यह जुड़ाव की एक सहज मानवीय भावना है।”
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह खोज केवल भारत या स्लोवेनिया तक सीमित नहीं रहती। धीरे-धीरे यह अहसास होने लगता है कि किसी एक घर या शहर की तलाश वास्तव में पूरी पृथ्वी के प्रति एक व्यापक प्रेम में बदल जाती है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी केवल चट्टानों का ढेर नहीं है, बल्कि यह एक गतिशील और जीवित ग्रह है। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे वे अंतरिक्ष से ऋतुओं के बदलने को देख सकती थीं। महासागरों में जब शैवाल (Algae) खिलते थे, तो पानी के रंगों का बदलना, उत्तरी गोलार्ध में बर्फ की चादरों का फैलना और अंटार्कटिका के पास की विशाल बर्फ संरचनाएं, ये सब पृथ्वी के जीवंत होने का प्रमाण देते हैं।
आपसी बहस और मतभेदों की निरर्थकता
सुनीता विलियम्स ने एक बहुत ही रोचक और व्यक्तिगत उदाहरण देते हुए शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऊपर से इस खूबसूरत और जीवंत ग्रह को देखने के बाद लोगों के बीच किसी भी तरह के मतभेद की बात बहुत अजीब लगती है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मैं शादीशुदा हूं, मेरा एक पति है और हमारे बीच भी बहस होती है। मैं समझती हूं कि बहस क्यों होती है, लेकिन जब आप पृथ्वी को उस परिप्रेक्ष्य (Perspective) से देखते हैं, तो लगता है कि आखिर क्यों? हम किस बात पर लड़ रहे हैं? वह सब बहुत बेतुका और बेमानी लगने लगता है।”
उन्होंने विश्व के नेताओं और आम नागरिकों को यह संदेश देने की कोशिश की कि हम सभी एक ही ‘स्पेसशिप’ यानी पृथ्वी पर सवार यात्री हैं। यदि हम इस ग्रह की सहजता और सुंदरता को बनाए रखना चाहते हैं, तो हमें मिलकर काम करना ही होगा। उनके अनुसार, शांति और सहयोग केवल नैतिक सिद्धांत नहीं हैं, बल्कि मानवता के अस्तित्व के लिए आवश्यक शर्तें हैं।
डर, प्रकृति का सम्मान और भविष्य की पीढ़ी को संदेश
जब सत्र के दौरान उनसे उनके डरों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सहजता और हास्य के साथ जवाब दिया। उन्होंने बताया कि वे जिस क्षेत्र में रहती हैं, वहां जंगली भालू पाए जाते हैं और उन्हें डर लगता है कि कहीं वे गलती से किसी सोते हुए भालू को न जगा दें। इस हल्के-फुल्के जवाब के पीछे उन्होंने एक गहरा संदेश छिपाया। उन्होंने कहा कि इंसानों को ब्रह्मांड में अपनी वास्तविक स्थिति का ज्ञान होना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि हम इस पृथ्वी के मालिक नहीं, बल्कि इसके पर्यावरण का एक हिस्सा हैं।
उन्होंने युवाओं और भावी अंतरिक्ष यात्रियों को सलाह दी कि वे अपने आसपास की प्रकृति और जानवरों के प्रति हमेशा सावधान और सम्मानजनक रहें। उनके अनुसार, अंतरिक्ष हमें विनम्रता सिखाता है। वह हमें बताता है कि हम कितने छोटे हैं और हमारा यह ग्रह कितना अनमोल है। रिटायरमेंट के बाद भी विलियम्स का इरादा विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में काम करते रहने का है, ताकि वे अगली पीढ़ी को सितारों तक पहुंचने के लिए प्रेरित कर सकें और साथ ही उनके पैर जमीन पर टिके रहने की अहमियत समझा सकें।
सुनीता विलियम्स की यह भारत यात्रा केवल एक पूर्व अंतरिक्ष यात्री का दौरा नहीं है, बल्कि यह उस दृष्टि का साझाकरण है जो सरहदों से परे जाकर पूरी मानवता को एक परिवार के रूप में देखती है। उनका अनुभव हमें याद दिलाता है कि भले ही वे अब सक्रिय रूप से नासा की सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनकी उपलब्धियां और उनके द्वारा दिया गया एकता का संदेश आने वाले दशकों तक वैश्विक समुदाय का मार्गदर्शन करता रहेगा।