• February 26, 2026

उस्मान हादी हत्याकांड: ‘इंकलाब मंच’ ने पुलिस की चार्जशीट को नकारा, न्याय न मिलने पर देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी

ढाका: बांग्लादेश की राजनीति में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या का मामला अब एक नए और गंभीर मोड़ पर आ गया है। हादी की राजनीतिक पार्टी ‘इंकलाब मंच’ ने ढाका पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे ‘तथ्यों के साथ खिलवाड़’ करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि पुलिस इस जघन्य हत्याकांड के पीछे छिपे असली चेहरों और सरकारी तंत्र की मिलीभगत को छिपाने की कोशिश कर रही है। मंगलवार को ढाका में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंकलाब मंच के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र बनाएंगे। यह विवाद तब बढ़ा है जब बंगाली समाचार पत्र ‘प्रथम आलो’ ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस की जांच और पार्टी के दावों के बीच के विरोधाभास को उजागर किया है।

पुलिस की चार्जशीट और मुख्य आरोपियों का विवरण

ढाका महानगर पुलिस की अपराध शाखा (DB) ने मंगलवार को इस बहुचर्चित हत्याकांड के संबंध में औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस ने मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद सहित कुल 17 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है। पुलिस की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शरीफ उस्मान हादी की हत्या पूरी तरह से एक ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का परिणाम थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी साजिश अवामी लीग के वार्ड पार्षद तैजुल इस्लाम चौधरी बप्पी के इशारे पर रची गई थी। चार्जशीट में कहा गया है कि कथित शूटर फैसल करीम मसूद सीधे तौर पर अवामी लीग की छात्र इकाई ‘छात्र लीग’ से सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था और उसने पार्षद के निर्देशों का पालन करते हुए इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस का मानना है कि हादी की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी राजनीतिक सक्रियता के कारण स्थानीय स्तर पर उनके विरोधी उनसे डरे हुए थे।

‘इंकलाब मंच’ का पलटवार: पार्षद के बस की बात नहीं

पुलिस के इन दावों पर इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस की चार्जशीट को ‘हास्यास्पद’ और ‘तैयार किया गया स्क्रिप्ट’ बताया। जाबेर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शरीफ उस्मान हादी कोई छोटे स्तर के नेता नहीं थे जिनकी हत्या केवल एक स्थानीय वार्ड पार्षद के निर्देश पर कर दी जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक पार्षद के पास इतना साहस और संसाधन हो सकते हैं कि वह इतने बड़े स्तर के नेता की दिनदहाड़े हत्या करवा सके और उसके बाद पुलिस की गिरफ्त से बचने का प्रयास करे? जाबेर ने तर्क दिया कि कोई भी विवेकशील व्यक्ति यह विश्वास नहीं करेगा कि इस हत्याकांड की कड़ियां केवल एक पार्षद तक सीमित हैं। उनके अनुसार, यह पुलिस द्वारा मामले को रफा-दफा करने और ऊपर बैठे असली गुनहगारों को बचाने की एक सोची-समझी कोशिश है।

सरकारी तंत्र और संगठित गिरोह की मिलीभगत का आरोप

इंकलाब मंच का दावा है कि हादी की हत्या में केवल स्थानीय अपराधी ही नहीं, बल्कि एक पूरा संगठित आपराधिक गिरोह और सरकारी तंत्र के कुछ प्रभावशाली हिस्से शामिल थे। पार्टी के नेताओं का मानना है कि हादी जिस तरह से व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, उससे सत्ता के गलियारों में बैठे लोग असुरक्षित महसूस कर रहे थे। अब्दुल्ला अल जाबेर ने आरोप लगाया कि हत्या के बाद जिस तरह से सबूतों को मिटाने की कोशिश की गई और जांच में देरी की गई, वह बिना किसी उच्च स्तरीय संरक्षण के संभव नहीं था। उन्होंने मांग की कि जांच के दायरे में उन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक हस्तियों को भी लाया जाना चाहिए जो पर्दे के पीछे से इस पूरी साजिश को अंजाम दे रहे थे। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वे इस ‘अधूरी चार्जशीट’ के खिलाफ कानूनी और लोकतांत्रिक दोनों रास्तों से लड़ेंगे।

न्याय की मांग और हिंसक आंदोलन की चेतावनी

उस्मान हादी हत्याकांड को लेकर बांग्लादेश के छात्र समुदाय में भारी आक्रोश व्याप्त है। इंकलाब मंच ने चेतावनी दी है कि वे हादी की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। पार्टी ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि असली दोषियों, जिन्होंने इस हत्या की योजना बनाई थी, को न्याय के कटघरे में नहीं लाया गया, तो उन्हें सड़कों पर उतरकर ‘हिंसक आंदोलन’ के लिए मजबूर होना पड़ेगा। पार्टी के सदस्य सचिव ने कहा, “जब तक असली दोषियों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया जाता, तब तक हमारा संघर्ष थमेगा नहीं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों का सिलसिला तेज किया जाएगा, जिससे प्रशासन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

बांग्लादेश में बढ़ती राजनीतिक हिंसा और सुरक्षा पर सवाल

शरीफ उस्मान हादी की हत्या और उसके बाद की जांच प्रक्रिया ने एक बार फिर बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवालिया निशान लगा दिया है। मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज ने भी चिंता व्यक्त की है कि यदि राजनीतिक हत्याओं की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हुई, तो देश में अराजकता का माहौल बन सकता है। हादी की हत्या को केवल एक व्यक्ति की मौत के रूप में नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक असहमति के दमन के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बांग्लादेश की अदालतें पुलिस की इस विवादास्पद चार्जशीट को स्वीकार करती हैं या फिर इंकलाब मंच के दबाव में आकर मामले की पुन: जांच के आदेश दिए जाते हैं। आने वाले हफ्ते ढाका की सड़कों पर राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा सकते हैं।

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