सिंध पर राजनाथ का तीर: पाकिस्तान की नींद हराम, जहर उगलते हुए क्यों कांप उठा लाहौर?
नई दिल्ली, 24 नवंबर 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान, जो सिंधी समाज सम्मेलन में निकला, ने पाकिस्तान को रातों की नींद उड़ा दी। “सिंध सभ्यतागत रूप से हमेशा भारत का था, सीमाएं बदल सकती हैं – कौन जानता है, कल फिर लौट आए!” ये शब्द सुनते ही इस्लामाबाद में हंगामा मच गया। विदेश मंत्रालय ने तुरंत बयान ठोंका – “ये हिंदुत्व की विस्तारवादी सोच है, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन!” लेकिन आखिर सिंध पर ये जिद क्यों? 1947 का वो दर्द, जो आज भी सिंधी हिंदुओं को सताता है, क्या अब भू-राजनीतिक खेल का हथियार बन गया? पाकिस्तान ने कश्मीर, पूर्वोत्तर और अल्पसंख्यकों को घसीटा, लेकिन राजनाथ का इशारा साफ था – इतिहास दोहरा सकता है। क्या ये सिर्फ बयानबाजी है या कुछ बड़ा संकेत?
राजनाथ का ऐतिहासिक इशारा: सिंध को ‘घर वापसी’ का सपना दिखाया
नई दिल्ली। रविवार को दिल्ली के एक सिंधी समाज सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जो कहा, वो सिर्फ भाषण नहीं, एक राजनीतिक बम था। एलके अडवानी का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि उनकी पीढ़ी के सिंधी हिंदू कभी 1947 के बंटवारे को दिल से नहीं मान सके। “सिंधु नदी हिंदुओं के लिए पवित्र है, जैसे मक्का का ज़मज़म। आज भौगोलिक रूप से सिंध पाकिस्तान में है, लेकिन सभ्यतागत रूप से हमेशा भारत का अभिन्न अंग रहा। सीमाएं स्थायी नहीं होतीं – हो सकता है कल फिर सिंध भारत लौट आए!” ये शब्द सुनकर तालियां तो गूंजीं, लेकिन पाकिस्तान में घबराहट फैल गई। सिंध, पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत और कराची की राजधानी वाला आर्थिक हब, अब विवाद के केंद्र में। राजनाथ ने सांस्कृतिक बंधन पर जोर दिया, लेकिन पाक को लगा – ये क्षेत्रीय महत्वाकांक्षा का संकेत है। विपक्ष ने भी सवाल उठाए, लेकिन बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक सत्य बताया। क्या ये बयान पाक के आंतरिक असंतोष को भुनाने की चाल है?
पाकिस्तान का तीखा पलटवार: ‘विस्तारवादी हिंदुत्व’ का ठीकरा फोड़ा
इस्लामाबाद। राजनाथ के बयान पर पाकिस्तान ने सोमवार सुबह ही कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा, “ये बयान भ्रमपूर्ण और खतरनाक रूप से पुनरीक्षणवादी है। ये विस्तारवादी हिंदुत्व मानसिकता को उजागर करता है, जो स्थापित वास्तविकताओं को चुनौती देता है। अंतरराष्ट्रीय कानून, सीमाओं की अखंडता और राष्ट्रों की संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन!” पाक ने भारत को आईना दिखाया – “अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर ध्यान दो, जहां हिंसा भड़काने वालों को बख्शा जाता है। पूर्वोत्तर में भेदभाव और अलगाव की आग बुझाओ।” कश्मीर को घसीटते हुए कहा, “संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत विवाद सुलझाओ। हम शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएंगे।” सिंध को अपना अभिन्न प्रांत बताते हुए पाक ने इसे तनाव बढ़ाने वाली साजिश कहा। लेकिन आलोचकों का मानना है कि पाक का ये डर सिंध में बढ़ते अलगाववाद से जुड़ा है, जहां सिंधी राष्ट्रवादी भारत की ओर आंखें उठा रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव का नया मोड़: कश्मीर से सिंध तक, क्या बदलेगा खेल?
राजनाथ के बयान ने भारत-पाक रिश्तों में नया मोड़ ला दिया। पाक ने इसे ‘उत्तेजक बयानबाजी’ बताकर शांति की अपील की, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये सिंध के आंतरिक संकट को उजागर करता है। वहां पाक की आर्थिक लूट और जनसांख्यिकीय बदलाव से सिंधी असंतुष्ट हैं। जेएसएमएम जैसे संगठनों ने राजनाथ का समर्थन किया – “ये हमारी एकता और सुरक्षा की उम्मीद है। सिंध भारत के साथ संघीय गठबंधन के लिए तैयार।” भारत में बीजेपी ने इसे सांस्कृतिक सत्य बताया, जबकि कांग्रेस नेता राशिद अलवी ने कहा, “सिर्फ सिंध क्यों? पूरा पाकिस्तान ले लो!” कश्मीर पर पाक का दोहरा चरित्र साफ – खुद आग लगाओ, फिर शांति की बात करो। पूर्वोत्तर और अल्पसंख्यक मुद्दे उठाकर पाक ने भारत को घेरने की कोशिश की, लेकिन राजनाथ का संदेश साफ था – इतिहास दोहरा सकता है। अब सवाल ये कि क्या ये बयानबाजी रुकेगी या सीमाओं पर असर डालेगी? क्षेत्रीय शांति दांव पर है।