अमेरिका में तेलंगाना युवक की हत्या: डलास की सड़कों पर लुटेरों का कहर, परिवार शव लाने की गुहार लगाए
वाशिंगटन, 5 अक्टूबर 2025: अमेरिका के डलास शहर में तेलंगाना के एक युवा छात्र की लुटेरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना गत 15 दिनों में दूसरे तेलंगाना युवक की मौत है, जिसने भारतीय समुदाय में सनसनी फैला दी। परिवार सदमे में डूबा है और सरकार से शव भारत लाने की अपील कर रहा है। क्या है इस क्रूर हत्याकांड की पूरी कहानी? क्यों बार-बार तेलंगाना के युवा अमेरिका में खतरे का शिकार हो रहे हैं? आइए, इस दर्दनाक घटना की परतें खोलते हैं।
डलास गैस स्टेशन पर खौफनाक रात: चंद्रशेखर के सपनों का अंत
हैदराबाद के एलबी नगर निवासी 25 वर्षीय पोले चंद्रशेखर ने BDS पूरा करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए डलास पहुंचे थे। नॉर्थ टेक्सास यूनिवर्सिटी में डेटा एनालिटिक्स की मास्टर्स कर रहे वे पार्ट-टाइम गैस स्टेशन पर नौकरी करके खर्च चला रहे थे। 3 अक्टूबर की रात को स्टेशन पर कुछ अज्ञात लुटेरे घुसे। लूटपाट के इरादे से उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। चंद्रशेखर को सीने में दो गोलियां लगीं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी सांसें थम गईं। डलास पुलिस ने एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच जारी है। स्थानीय लोग उन्हें मेहनती और महत्वाकांक्षी युवक के रूप में याद कर रहे हैं। परिवार के अनुसार, चंद्रशेखर दलित समुदाय से थे और घर का इकलौता सहारा। उनकी मौत ने पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहां सहकर्मी उनकी तारीफ कर रहे। यह घटना अमेरिका में भारतीय छात्रों की असुरक्षा को उजागर करती है, जहां पार्ट-टाइम जॉब्स के दौरान अपराध का खतरा बढ़ जाता है। तेलंगाना सरकार ने भारतीय दूतावास से संपर्क साधा है।
परिवार का दर्द: माता-पिता की आहें, सरकार की संवेदना
चंद्रशेखर की मौत की खबर मिलते ही हैदराबाद में उनके माता-पिता रो-रोकर बुरे हाल में हैं। पिता का कहना है, “वह हमारा भविष्य था, अब सब खत्म हो गया।” घर पर सन्नाटा पसर गया है, जहां कभी सपनों की चर्चा होती थी। बीआरएस नेता टी. हरीश राव ने परिवार से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और शव लाने की मांग की। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने ट्वीट कर संवेदना व्यक्त की: “यह दुखद घटना पूरे राज्य को स्तब्ध कर गई है। सरकार हर संभव मदद करेगी।” उन्होंने दूतावास के साथ समन्वय कर शव की जल्द वापसी का आश्वासन दिया। परिवार ने विदेश मंत्रालय से भी अपील की है। पड़ोसी और रिश्तेदार उनके घर पहुंच रहे हैं, आंसू पोछ रहे हैं। चंद्रशेखर की मां ने कहा, “वह रोज फोन करता था, अब आवाज सुनाई नहीं देगी।” यह दर्द न सिर्फ एक परिवार का है, बल्कि उन हजारों भारतीयों का भी जो अमेरिका में सपने संजोए हैं। 2018 से अब तक 800 से ज्यादा भारतीय छात्रों की विदेश में मौत हो चुकी है, जिसमें अमेरिका सबसे ऊपर है। यह घटना सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करती है।
15 दिन पहले कैलिफोर्निया का खूनी हमला: निजामुद्दीन की कहानी
यह चंद्रशेखर की मौत से ठीक 15 दिन पहले, 3 सितंबर को कैलिफोर्निया के सांता क्लारा में तेलंगाना के महबूबनगर निवासी मोहम्मद निजामुद्दीन की हत्या हुई थी। 30 वर्षीय निजामुद्दीन ने 2016 में फ्लोरिडा कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया और सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी जुटाई। लेकिन रूममेट से AC को लेकर मामूली झगड़े ने तूल पकड़ा। पुलिस के पहुंचने पर निजामुद्दीन ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया, जिसके बाद पुलिस ने गोली मार दी। परिवार ने नस्लीय भेदभाव का आरोप लगाया, क्योंकि निजामुद्दीन ने सोशल मीडिया पर वर्कप्लेस हरासमेंट, वेज फ्रॉड और रेसियल डिस्क्रिमिनेशन की शिकायत की थी। उनके पिता ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखा। पुलिस जांच में कहा गया कि निजामुद्दीन रूममेट को पिन डाउन कर रहे थे। शव अभी भी अस्पताल में है, और परिवार MEA से मदद मांग रहा है। इन दो घटनाओं ने तेलंगाना के युवाओं में डर पैदा कर दिया। क्या अमेरिका में भारतीय छात्रों के लिए सुरक्षा नेटवर्क मजबूत होगा? यह सवाल अनुत्तरित है, लेकिन दर्द की लहर थमने का नाम नहीं ले रही।