• January 19, 2026

लखनऊ में अंजना वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दिव्य कला महाकुंभ 2025: दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन

लखनऊ, 29 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अंजना वेलफेयर सोसाइटी ने दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को मंच प्रदान करने के लिए दिव्य कला महाकुंभ 2025 का आयोजन किया। इस भव्य महोत्सव में दिव्यांग बच्चों ने गीत, संगीत, नृत्य, और थिएटर के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन को उत्तर प्रदेश सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ, जिसने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह महोत्सव न केवल दिव्यांग बच्चों की रचनात्मकता का उत्सव था, बल्कि समाज में समावेशिता और सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली संदेश भी दे गया।
दिव्य कला महाकुंभ: आयोजन का विवरण
‘एक्स’ पर उपलब्ध पोस्ट्स और स्थानीय समाचारों के अनुसार, यह आयोजन लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित किया गया। अंजना वेलफेयर सोसाइटी, जो लंबे समय से दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है, ने इस महोत्सव का आयोजन किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों दिव्यांग बच्चों ने हिस्सा लिया।
महोत्सव में गीत, संगीत, नृत्य, और थिएटर के माध्यम से बच्चों ने सामाजिक जागरूकता, समानता, और आत्मविश्वास जैसे संदेश दिए। एक बच्चे ने अपने नृत्य प्रदर्शन के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जबकि एक थिएटर ग्रुप ने दिव्यांगजनों के अधिकारों और समाज में उनकी स्वीकार्यता पर आधारित एक नाटक प्रस्तुत किया। दर्शकों ने इन प्रदर्शनों की खूब सराहना की, और कई ने इसे “प्रेरणादायक और भावनात्मक” बताया।
उत्तर प्रदेश सरकार का सहयोग
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आयोजन में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। समाज कल्याण विभाग और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने न केवल वित्तीय सहायता दी, बल्कि आयोजन के प्रचार-प्रसार और लॉजिस्टिक्स में भी मदद की। उत्तर प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “दिव्य कला महाकुंभ जैसे आयोजन दिव्यांग बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देते हैं और समाज में उनकी भूमिका को मजबूत करते हैं। हम ऐसे प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस आयोजन की सराहना की और अंजना वेलफेयर सोसाइटी को बधाई दी। उनके कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया, “यह महोत्सव दिव्यांगजनों की क्षमता और सृजनशीलता का उत्सव है। उत्तर प्रदेश सरकार हर उस पहल का समर्थन करेगी जो समावेशी समाज के निर्माण में योगदान देती है।”
प्रदर्शन और संदेश
महोत्सव में बच्चों ने विभिन्न कला रूपों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया:
  • गीत और संगीत: कई बच्चों ने शास्त्रीय और लोक संगीत की प्रस्तुतियां दीं। एक समूह ने भक्ति गीतों के माध्यम से आध्यात्मिकता का संदेश दिया, जबकि एक अन्य समूह ने देशभक्ति गीत गाकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
  • नृत्य: दिव्यांग बच्चों ने कथक, भरतनाट्यम, और लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया। एक व्हीलचेयर नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक कर दिया, जो दृढ़ संकल्प और हौसले का प्रतीक थी।
  • थिएटर: थिएटर प्रदर्शनों में सामाजिक मुद्दों जैसे शिक्षा, लैंगिक समानता, और दिव्यांगजनों के अधिकारों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। एक नाटक में बच्चों ने दिखाया कि कैसे शिक्षा और समर्थन के साथ दिव्यांगजन समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
‘एक्स’ पर एक यूजर ने लिखा, “लखनऊ में दिव्य कला महाकुंभ में दिव्यांग बच्चों का प्रदर्शन देखकर आंखें नम हो गईं। इन बच्चों ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं।”
अंजना वेलफेयर सोसाइटी की भूमिका
अंजना वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ में दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए समर्पित एक गैर-सरकारी संगठन है। यह संगठन शिक्षा, कौशल विकास, और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने का काम करता है। सोसाइटी की सचिव ने कहा, “दिव्य कला महाकुंभ हमारा प्रयास है कि समाज इन बच्चों की क्षमताओं को पहचाने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करे। हम उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय समुदाय के समर्थन के लिए आभारी हैं।”
सोसाइटी ने इस आयोजन के लिए महीनों तक बच्चों को प्रशिक्षण दिया, जिसमें संगीत, नृत्य, और थिएटर के विशेषज्ञों ने उनकी प्रतिभा को निखारा। आयोजन में शामिल बच्चों में से कई ने पहली बार इतने बड़े मंच पर प्रदर्शन किया, जिसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया।
प्रेरणा और सामाजिक प्रभाव
दिव्य कला महाकुंभ 2025 ने न केवल दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को प्रदर्शित किया, बल्कि समाज में उनके प्रति दृष्टिकोण को बदलने में भी योगदान दिया। यह आयोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित “दिव्य कला मेला” जैसे कार्यक्रमों की तर्ज पर था, जो दिव्यांगजनों की रचनात्मकता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देता है।
लखनऊ के इस महोत्सव ने स्थानीय समुदाय को यह संदेश दिया कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करना जरूरी है। कई दर्शकों ने कहा कि बच्चों के प्रदर्शन ने उन्हें प्रेरित किया और दिव्यांगजनों के लिए अधिक समावेशी नीतियों की जरूरत पर बल दिया। ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, “दिव्य कला महाकुंभ ने दिखाया कि सही मंच और समर्थन के साथ, दिव्यांग बच्चे चमत्कार कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को और ऐसे आयोजनों का समर्थन करना चाहिए।”
दिव्य कला मेला से प्रेरणा
यह आयोजन भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत 2024 में भुवनेश्वर में आयोजित “दिव्य कला मेला” से प्रेरित था, जहां दिव्यांग उद्यमियों और कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। लखनऊ का यह महोत्सव स्थानीय स्तर पर उसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास था, जिसमें कला और संस्कृति के माध्यम से दिव्यांगजनों को सशक्त बनाया गया।

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