लखनऊ: आलमबाग के केसरी खेड़ा में भीषण आग, 100 से ज्यादा झोपड़ियां राख, बुझाने में लगे पांच घंटे
लखनऊ, 23 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमबाग थाना क्षेत्र में स्थित केसरी खेड़ा की मलिन बस्ती में मंगलवार देर रात एक भीषण आग लगने से 100 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस हादसे में कोई जनहानि तो नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। आग पर काबू पाने में दमकल विभाग को पांच घंटे से अधिक समय लग गया। स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के लिए राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, और आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।
घटना का विवरण
केसरी खेड़ा की मलिन बस्ती में मंगलवार रात करीब 11:30 बजे अचानक आग की लपटें उठने लगीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत एक झोपड़ी से हुई, जो तेज हवाओं और पास-पास बनी झोपड़ियों के कारण तेजी से फैल गई। बस्ती में मौजूद ज्यादातर झोपड़ियां कच्ची थीं, जिनमें लकड़ी, प्लास्टिक, तिरपाल और बांस का इस्तेमाल हुआ था। इसके अलावा, कई झोपड़ियों में रखे रसोई गैस सिलेंडरों में हुए धमाकों ने आग को और भयावह बना दिया।
स्थानीय निवासी रामू (35) ने बताया, “रात को अचानक चीख-पुकार मची। हमने देखा तो एक झोपड़ी में आग लगी थी, और देखते ही देखते लपटें पूरी बस्ती में फैल गईं। हमने पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं कर सके।” आग की सूचना मिलते ही आलमबाग पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं।
दमकल विभाग का ऑपरेशन
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) मंगेश कुमार ने बताया कि आग की सूचना रात 11:45 बजे मिली थी। इसके बाद, आलमबाग, सरोजिनी नगर, और पीजीआई फायर स्टेशनों से 12 दमकल गाड़ियां और हाइड्रोलिक मशीनें तुरंत रवाना की गईं। आग की भयावहता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल गाड़ियां भी बुलाई गईं। सीएफओ ने कहा, “आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण था क्योंकि झोपड़ियां एक-दूसरे से सटी हुई थीं, और गैस सिलेंडरों के धमाकों से स्थिति और जटिल हो गई थी।”
दमकल कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से आसपास की झोपड़ियों को खाली कराया और आग को फैलने से रोकने के लिए कड़ी मशक्कत की। करीब पांच घंटे की मेहनत के बाद, बुधवार तड़के 4:30 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। इस दौरान, दमकल कर्मियों ने कई गैस सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

नुकसान का आकलन
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस आग में 100 से 120 झोपड़ियां पूरी तरह जलकर राख हो गईं। इन झोपड़ियों में रहने वाले ज्यादातर परिवार दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, और छोटे-मोटे काम करने वाले थे। आग ने उनके कपड़े, बर्तन, नकदी, और अन्य जरूरी सामान को नष्ट कर दिया। कई परिवारों ने बताया कि उनके पास अब कुछ भी नहीं बचा है।
स्थानीय निवासी शांति देवी (42) ने रोते हुए कहा, “हमारी झोपड़ी में सब कुछ जल गया। मेरे बच्चों के स्कूल के कागजात, कपड़े, और कुछ पैसे जो मैंने मेहनत से जोड़े थे, सब खत्म हो गया। अब हम कहां जाएंगे?” एक अन्य पीड़ित मोहम्मद इरफान (30) ने बताया कि उनकी झोपड़ी में रखा राशन और काम का सामान भी जल गया, जिससे उनका परिवार अब भोजन के लिए भी तरस रहा है।
प्रशासन की ओर से राहत कार्य
आग की घटना के बाद जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने तत्काल राहत कार्य शुरू किए। लखनऊ के जिलाधिकारी (डीएम) सूर्यपाल गंगवार ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ितों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। डीएम ने कहा, “हमने प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, और कंबल की व्यवस्था की है। नुकसान का आकलन किया जा रहा है, और पीड़ितों को सरकारी योजनाओं के तहत मुआवजा प्रदान किया जाएगा।”
प्रशासन ने नजदीकी सामुदायिक केंद्र में पीड़ितों के लिए अस्थायी कैंप लगाए हैं, जहां उन्हें भोजन, पानी, और बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और स्थानीय नेताओं ने भी पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।
आग का कारण और जांच
आग लगने का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। दमकल विभाग के अधिकारियों का मानना है कि प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या रसोई में खाना बनाते समय गैस लीक होने की संभावना जताई जा रही है। सीएफओ मंगेश कुमार ने कहा, “हम फॉरेंसिक टीम की मदद से आग के कारणों की जांच कर रहे हैं। गैस सिलेंडरों के धमाकों ने आग को और बढ़ाया, लेकिन इसका मूल कारण जल्द पता लगाया जाएगा।”
पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है। आलमबाग थाना प्रभारी ने बताया कि स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, और यह भी जांच की जा रही है कि कहीं यह आग दुर्घटना के बजाय किसी साजिश का परिणाम तो नहीं है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। एक्स पर कई यूजर्स ने पीड़ित परिवारों के लिए सहायता की मांग की और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया। एक यूजर ने लिखा, “केसरी खेड़ा की आग ने सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया। सरकार को तुरंत इन लोगों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए।”
राजनीतिक दलों ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, “मलिन बस्तियों में आग की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, लेकिन न तो सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही समय पर राहत पहुंचती है।” वहीं, बीजेपी के स्थानीय विधायक ने पीड़ितों को हर संभव मदद का वादा किया।
बार-बार आग की घटनाएं और चिंता
लखनऊ में हाल के महीनों में आग की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। हाल ही में, ओशोनगर में 200 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख हो गई थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि मलिन बस्तियों में कच्ची झोपड़ियां, अवैध बिजली कनेक्शन, और गैस सिलेंडरों का असुरक्षित उपयोग आग की घटनाओं का प्रमुख कारण है।
सुरक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड फायर ऑफिसर संजीव गुप्ता ने कहा, “मलिन बस्तियों में अग्निशमन उपकरणों की कमी और संकरी गलियां दमकल गाड़ियों के लिए चुनौती पैदा करती हैं। प्रशासन को इन क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए।”