बलिया में आयुष्मान कार्ड धारक की शिकायत: दाईं आंख के ऑपरेशन के बजाय बाईं आंख में पट्टी बांधकर भेजा घर, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
बलिया, 19 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने वाले एक मरीज ने गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। मरीज का दावा है कि उनकी दाईं आंख का ऑपरेशन होना था, लेकिन अस्पताल ने गलती से बाईं आंख में पट्टी बांधकर उन्हें घर भेज दिया। इस शिकायत के बाद जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विजयपति द्विवेदी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह घटना आयुष्मान भारत योजना के तहत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है।
शिकायत का विवरण
मामला बलिया के एक निजी अस्पताल का बताया जा रहा है, जो आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध है। शिकायतकर्ता, जिनका नाम गोपनीय रखा गया है, ने बताया कि उनकी दाईं आंख में दृष्टि संबंधी समस्या थी, जिसके लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी थी। मरीज ने आयुष्मान कार्ड के जरिए इस अस्पताल में इलाज शुरू कराया, जो योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज प्रदान करता है।
आरोप है कि ऑपरेशन के बाद अस्पताल स्टाफ ने उनकी बाईं आंख पर पट्टी बांध दी, जबकि उनकी बाईं आंख में कोई समस्या नहीं थी। मरीज को जब इस गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद मरीज ने जिला स्वास्थ्य विभाग में शिकायत दर्ज की, जिसके आधार पर सीएमओ ने तत्काल जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
सीएमओ की प्रतिक्रिया
सीएमओ डॉ. विजयपति द्विवेदी ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा, “हमें मरीज की ओर से लिखित शिकायत प्राप्त हुई है, जिसमें चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया गया है। मैंने तुरंत एक जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए हैं, जो इस मामले की तह तक जाएगी। अगर अस्पताल की ओर से कोई लापरवाही पाई गई, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मरीज को उचित इलाज और न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
सीएमओ ने यह भी बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों की नियमित निगरानी की जाती है, और ऐसी शिकायतें मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाती है। बलिया में योजना के तहत 14 अस्पताल, जिनमें 2 सरकारी और 12 निजी शामिल हैं, मरीजों को मुफ्त इलाज प्रदान करते हैं।

आयुष्मान भारत योजना और बलिया में चुनौतियां
आयुष्मान भारत योजना के तहत बलिया में 1,94,220 पात्र लाभार्थियों में से 1,75,000 को गोल्डन कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसमें मोतियाबिंद जैसे नेत्र ऑपरेशन भी शामिल हैं। हालांकि, बलिया में आयुष्मान कार्ड बनवाने और योजना के तहत इलाज में कई चुनौतियां सामने आई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में, बांसडीह नगर पंचायत और ब्लॉक की ग्राम सभाओं में कार्ड बनवाने में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। स्थानीय आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की उदासीनता और तकनीकी समस्याओं के कारण कई पात्र लोग योजना का लाभ नहीं ले पाए। इस ताजा घटना ने योजना के कार्यान्वयन और अस्पतालों की जवाबदेही पर नए सवाल खड़े किए हैं।
मरीज और परिजनों की चिंता
मरीज के परिजनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया है। एक परिजन ने कहा, “हमने आयुष्मान कार्ड पर भरोसा करके इलाज शुरू कराया था, लेकिन ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर दाईं आंख का इलाज समय पर नहीं हुआ, तो मरीज की दृष्टि को और नुकसान हो सकता है।” परिजनों ने मांग की है कि दोषी अस्पताल और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और मरीज का सही इलाज सुनिश्चित किया जाए।
विशेषज्ञों की राय
नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों के ऑपरेशन में ऐसी गलती गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का मामला है। बलिया के एक वरिष्ठ नेत्र सर्जन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “ऑपरेशन से पहले मरीज की आंखों की पूरी जांच और दस्तावेजीकरण किया जाता है। अगर गलत आंख पर पट्टी बांधी गई, तो यह प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि को दर्शाता है। ऐसी गलतियां मरीज की स्थिति को और जटिल कर सकती हैं।”
प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य के कदम
जांच कमेटी को अगले कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। अगर अस्पताल की लापरवाही सिद्ध होती है, तो उसे आयुष्मान भारत योजना की सूची से हटाया जा सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। इसके अलावा, जिला प्रशासन ने अन्य आयुष्मान कार्ड धारकों से अपील की है कि वे किसी भी शिकायत के लिए सीएमओ कार्यालय या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5145 पर संपर्क करें।
बलिया में पहले भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। हाल ही में, फर्जी नर्सिंग अधिकारियों की नियुक्ति का मामला उजागर हुआ था, जिसके बाद सीएमओ ने सख्त कदम उठाए थे। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की सतर्कता और जवाबदेही को और मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित किया है।