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शिल्पकार और कारीगरों में देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की क्षमता : शेखावत

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने रविवार को कहा कि पीढ़ीगत काम करने वाले हस्तशिल्पियों, कामगारों की कला और हुनर में भारत की अर्थव्यवस्था के उन्नयन की क्षमता है। जरूरत इनके कौशल को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने की है। इसके लिए प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू की गई है। इस योजना में आगामी पांच साल में तेरह हजार करोड़ रुपयो का निवेश किया जाएगा। इसके लिए देश की 18 कलाओं को चिह्नित किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर रविवार को यह योजना पूरे देश में लॉन्च की गई। उदयपुर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने कहा कि प्राचीन काल में भारतीय संस्कृति व सभ्यता में हस्तशिपियों, स्थाप्त्यकर्मियों, लोहकारों और धातुकर्मियों का अद्भुत योगदान था। पीढ़ी दर पीढ़ी इस तरह की कलाओं से जुड़े हुए लोग अपने कामों में प्रवीणता प्राप्त करते थे। हमारे शिल्पकर्मियों ने ऐसे नायाब नमूने प्रस्तुत किए, जिस पर पूरा विश्व आज भी चकित दृष्टि से देखता है। काल के प्रवाह में कलाएं खोती गईं, लेकिन अब भारतीय हस्तशिल्प की पहचान पूरे विश्वभर में बनने लगी है। उसकी मांग बढ़ने लगी है। ऐसी परिस्थिति में हम एक बार फिर अपनी हस्तशिल्प कर्मियों के जीवन में उन्नति लाने के लिए हम उनका हाथ पकड़कर उन्हें खड़ा करें तो वे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नया आयाम दें, अपितु भारत की पहचान एक बार फिर से विश्व में पुन: स्थापित करने में मददगार हो सकते हैं।

शेखावत ने कहा कि भारत आज वैश्विक परिदृश्य में नई पहचान बना रहा है। इस पहचान को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने हमें एक मंत्र और दिया, वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट। आज देश के अनेक हिस्सों में इस योजना के तहत उस जिले में लोगों की दक्षता को आगे बढ़ाकर रोजगार के नए कामों का सृजन किया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की जानकारी दी कि इस योजना में देशभर की 18 विधाओं को चिह्नित किया है। इसमें 13 हजार करोड़ रुपये का निवेश आगामी पांच वर्षों में किया जाएगा। कारीगरों और शिल्पगारों को केवल पांच प्रतिशत के ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे उन्हें कच्चा माल खरीदने और उसके वितरण में सहायता मिलेगी। इस योजना में उन्हें नई तकनीक से जोड़ने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें मानदेय दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद उसके व्यवसाय को चलाने के लिए टूलकिट खरीदने के लिए 15 हजार रुपये का संबल दिया जाएगा।

शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित बनाने का सकंल्प लिया है। सामान्य मानवी के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए कई योजनाएं प्रारंभ की हैं। इसी प्रकार की एक योजना केन्द्र सरकार ने कोरोनाकाल में स्ट्रीट वेंडरों के लिए शुरू की थी। स्वनिधि नामक इस योजना से देश के लाखों स्ट्रीटवेंडरों को अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। केंद्रीय मंत्री ने अधिकारियों का आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और स्वनिधि योजना में अधिक से अधिक कारीगारों को जोड़ें।

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