• March 10, 2026

मिस्र में होने वाले ‘ब्राइट स्टार’ अभ्यास के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी रवाना

 मिस्र में होने वाले ‘ब्राइट स्टार’ अभ्यास के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी रवाना

मिस्र के मोहम्मद नागुइब सैन्य अड्डे पर 31 अगस्त से शुरू होने वाले अभ्यास ‘ब्राइट स्टार’ में हिस्सा लेने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ी मंगलवार को वायु सेना के परिवहन विमान से रवाना हो गई। इस टुकड़ी में 137 कर्मी शामिल हैं। 14 सितंबर तक चलने वाले इस अभ्यास में शामिल होने के लिए वायु सेना की टीम दो दिन पहले ही जा चुकी है।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक यह तीन सेनाओं का एक बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका नेतृत्व यूएस सेंटकॉम और मिस्र की सेना करेगी। इसकी शुरुआत 1977 के कैंप डेविड समझौते के दौरान अमेरिका और मिस्र के बीच द्विपक्षीय द्विवार्षिक प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में हुई थी। अभ्यास का पहला संस्करण वर्ष 1980 में मिस्र में आयोजित किया गया था। 1995 के बाद से अन्य देशों की भागीदारी के लिए इस अभ्यास का विस्तार किया गया। ब्राइट स्टार का पिछला अभ्यास साल 2021 में हुआ था, जिसमें 21 देशों की सेनाओं ने भाग लिया था।

अभ्यास ‘ब्राइट स्टार’ में इस वर्ष 34 देश हिस्सा लेंगे। यह मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र में होने वाला अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास होगा। यह पहली बार है कि भारतीय सशस्त्र बल 549 कर्मियों के साथ ‘ब्राइट स्टार’ अभ्यास में भाग ले रहा है। भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व 23 जाट बटालियन की टुकड़ी करेगी। काहिरा एयरबेस में होने वाले अभ्यास ब्राइट स्टार के इस संस्करण में पहली बार भारत की वायु सेना भी हिस्सा लेगी। द्विवार्षिक बहुपक्षीय त्रि-सेवा अभ्यास में भाग लेने के लिए आईएएफ की टुकड़ी दो दिन पहले रवाना हो गई है। भारत ने पांच लड़ाकू मिग-29, दो टैंकर विमान आईएल-78, दो सी-130 और दो सी-17 परिवहन विमान भी भेजे हैं।

इस अभ्यास में उभरते गैर परंपरागत खतरों से निपटने और विश्व शांति बनाए रखने के उद्देश्य से भाग लेने वाले देशों के बीच बड़ी संख्या में क्षेत्रीय साझेदारी बढ़ाने पर केंद्रित प्रशिक्षण गतिविधियां होंगी। ”ब्राइट स्टार” में सामरिक परिस्थिति पर आधारित एक संयुक्त हथियार लाइव फायरिंग अभ्यास भी शामिल होगा। साइबर सुरक्षा को लेकर समसामयिक विषयों पर एक पैनल चर्चा आयोजित करने की भी योजना है, जिसमें भाग लेने वालों में भारतीय सशस्त्र बल प्रमुख हैं। अभ्यास के दौरान भारतीय सेना को रक्षा सहयोग बढ़ाने के अलावा अन्य सेनाओं के साथ सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों को साझा करने का एक अनूठा अवसर मिलेगा। भारतीय सेना को इस अभ्यास से समृद्ध पेशेवर अनुभव की उम्मीद है।

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