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हमारे पास गाड़ी है, बंग्ला है, दौलत है.. तुम्हारे पास क्या है – नवेद शिकोह

 

हमारे पास गाड़ी है, बंग्ला है, दौलत है.. तुम्हारे पास क्या है ?

ग़रीब – इन्कमटैक्स और ईडी का डर नहीं है, सुकून है, इत्मेनान है, फ्री राशन है, किसान सम्मान निधि है, वृद्धा पेंशन है, विधवा पेंशन है, आयुष्मान योजना है, फ्री घर है, फ्री शौचालय है, बैंक एकाउंट हैं…
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अमीर- लेकिन काम और रोजगार कहां है ?
ग़रीब- बिना काम के ही काम चल रहा है। समय-समय पर बहुत सारे काम मिलते रहते हैं। नोटबंदी में ही हमें काम मिल जाता है। तुम जैसे अमीर हमारे ऊपर निर्भर हो जाते हैं। अमीर अगर टैक्स चोरी करके नोट दबाए बैठे हैं तो ये ज़ुल्म अमीर हम गरीबों के साथ करते हैं। टैक्स की रकम जनकल्याणकारी कामों में खर्च की जाती है, सरकार अमीरों से टैक्स लेकर गरीबों पर खर्च करती है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करती है।
अमीर जो काला धन दबाए बैठे होते हैं, नोटबंदी से उस रकम को बैंक में जमा करना ही पड़ता है। बैंक में जमा करेंगे तो वो टैक्स देना पड़ेगा जो मारे बैठे थे।
कुछ अमीर अपनी ऐसी अवैध रकम खुद बैंक में जमा नहीं कर सकते, या नहीं कर सकते हैं। इसलिए जब नोटबंदी होती है तो बहुत व्यवस्थित ढंग से सैकड़ों ग़रीबों के बैंक एकाउंट के जरिए थोड़ी-थोड़ी करके बड़ी रकम कंवर्ट कर ली जाती है।

मसलन हम ग़रीब इंसान या गरीब बेरोजगार हैं। हमें किसी ने दो-दो हजार के नोटों की दो लाख की रकम दी। दो महीने में चार-पांच बार में हम ग़रीब ने ये नोट पांच सौ के नोटों में कंवर्ट कर ली। गरीब ने इस काम के तीस हजार रुपए कमा लिए। इस तरह देश के करोड़ों गरीब अपने बैंक खाते के ज़रिए कुछ कमाई कर पाते हैं।
अमीर लोग गरीबों की ग़रीबी कम करने के लिए उन्हें नौकरी या रोजगार दें या ना दें, पर जब नौटबंदी होती है तब काले धन वाले कुछ रईस गरीबों को नोट बदलने का काम जरूर दें देतें हैं।

गरीब और अमीर की बहस में ग़रीब बोला- जनकल्याण के लिए हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी नोटबंदी की परंपरा जारी रखियेगा !
दो हजार का नोट बंद हो जाएगा, ये फिक्र की बात नहीं, फख़्र की बात है। अमीर की अमीरी और गरीब की ग़रीबी बढ़ती जाए तो फिक्र की बात है। लेकिन कोई व्यवस्था या सरकार अमीरों को गरीबों पर निर्भर करने की कोशिश करें तो फख्र होता है। इस तरह अमीरों की अमीरी कम होगी और गरीब की ग़रीबी कम होगी।
चार-पांच महीने के बाद दो हजार के नोट बंद हो जाएंगे। और फिर बड़े नोट छपेंगे। ब्लैकमनी वाले रईसजादे नये बड़े नोट भी दबा के रख लेंगे। और फिर इन नोटों की नोटबंदी हो, और एक बार फिर गरीबों की बल्ले-बल्ले और ब्लैकमनी वालों को नानी याद आएगी।
जब तक मोदी जी रहेंगे तब तक ऐसे ही जनकल्याणकारी परंपरा जारी रहेगी।
गरीब के इस तर्क के आगे अमीर ख़ामोश था।
– नवेद शिकोह

कुछ महीने बाद दो हजार का नोट बंद हो जाएगा। लम्बा समय अंतराल मिला से, जिसके पास जितने भी दो हजार रुपए के नोट हैं वो बैंक में जमा कर दें, या सौ-पांच हो

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