अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा प्रहार: “शंकराचार्य का अपमान और पूंजीवाद को बढ़ावा दे रही है सरकार”
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। लखनऊ में मीडिया को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी नीतियों के माध्यम से न केवल देश की आध्यात्मिक गरिमा को चोट पहुँचा रही है, बल्कि वह ‘अधर्म’ के मार्ग पर चल रही है। उन्होंने विशेष रूप से प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के साथ हुए प्रशासनिक विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा के शासन में पूज्य संतों और शंकराचार्यों का अपमान किया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति के लिए शुभ संकेत नहीं है।
अखिलेश यादव ने इस दौरान दिवंगत समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि आज के दौर में जब देश सांप्रदायिक एजेंडे और बेलगाम पूंजीवाद की गिरफ्त में है, तब समाजवादी आंदोलन की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि भाजपा की नीतियां केवल मुट्ठी भर उद्योगपतियों के लाभ के लिए बनाई जा रही हैं, जिससे समाज में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई गहरी होती जा रही है।
शंकराचार्य का अपमान और भाजपा का ‘अधर्म’
मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान हुए एक विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का स्थान हिंदू धर्म में सर्वोच्च है और उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार या प्रशासनिक बाधा डालना अक्षम्य है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि भाजपा खुद को धर्म का रक्षक बताती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह अपने राजनीतिक हितों के लिए धर्म का उपयोग करती है और जब बात परंपराओं के सम्मान की आती है, तो वह पीछे हट जाती है।
उन्होंने कहा, “शंकराचार्य का पूरा सम्मान होना चाहिए। उनके स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों में बाधा डालना अधर्म है। भाजपा सरकार प्रशासन का उपयोग कर संतों की आवाज दबाना चाहती है। यह वही सरकार है जो धर्म की राजनीति करती है, लेकिन आज इनके शासन में पूज्य शंकराचार्य अपमानित महसूस कर रहे हैं।” अखिलेश यादव ने मांग की कि सरकार को तुरंत इस मामले में माफी मांगनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक परंपराओं का निर्वहन पूरी गरिमा के साथ हो।
पूंजीवाद को बढ़ावा और बढ़ती आर्थिक खाई
सपा अध्यक्ष ने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा की आर्थिक नीतियां पूरी तरह से पूंजीवाद को समर्पित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के संसाधनों को बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों के हवाले किया जा रहा है। अखिलेश यादव के अनुसार, “आज जब हम जनेश्वर मिश्र जी के समाजवादी आंदोलन को याद करते हैं, तो हमें एहसास होता है कि देश किस गलत दिशा में जा रहा है। भाजपा बड़े उद्योगपतियों का समर्थन करती है, जिसके कारण देश की संपत्ति कुछ ही हाथों में सिमट गई है।”
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। अखिलेश ने तर्क दिया कि यह बढ़ती हुई खाई समाज में असंतोष पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा से धन के समान वितरण और सामाजिक न्याय की पक्षधर रही है, जबकि भाजपा की नीतियां केवल ‘कॉर्पोरेट’ जगत के हितों की रक्षा करती हैं। उनके मुताबिक, मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं, जबकि सरकार का पूरा ध्यान अपने ‘मित्र’ उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने पर केंद्रित है।
किसानों की बदहाली और पूंजीपतियों के लिए बनते कानून
अखिलेश यादव ने किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि अन्नदाता आज सबसे ज्यादा परेशान है। उन्होंने दावा किया कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य (MSP) नहीं मिल पा रहा है। सरकार द्वारा बनाए गए अधिकांश कानून और कार्यक्रम इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि उनका लाभ अंततः पूंजीपतियों को मिले। उन्होंने कहा, “खाद की बोरी से वजन चोरी हो रहा है, कीटनाशकों के दाम बढ़ रहे हैं और जब किसान अपनी फसल बाजार में लाता है, तो उसे लागत भी वापस नहीं मिलती। भाजपा ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन आज किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा कि समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र और नेताजी मुलायम सिंह यादव ने हमेशा किसानों और गरीबों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी थी। सपा उसी विरासत को आगे बढ़ा रही है और जनता को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि भाजपा के डिजिटल इंडिया और अन्य बड़े नारों के पीछे केवल पूंजीपतियों का मुनाफा छिपा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है क्योंकि सरकार का ध्यान गांव के बाजार के बजाय विदेशी निवेश और बड़े मॉल्स पर है।
बृजेश पाठक पर पलटवार और ‘बाटी चोखा’ का जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के उस बयान पर सवाल पूछा, जिसमें उन्होंने मुसलमानों और समाजवादी पार्टी के संबंधों पर टिप्पणी की थी, तो अखिलेश यादव ने बेहद तंज भरे लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बृजेश पाठक को अपने बयानों के लिए “चरणों में लोटकर माफी मांगनी चाहिए।” अखिलेश ने बाटी-चोखा का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर उन्होंने (पाठक ने) समाजवादी संस्कृति का हिस्सा बनकर बाटी-चोखा खाया है, तो उन्हें किसी निर्जीव प्रतिमा की तरह खड़ा नहीं रहना चाहिए, बल्कि सच बोलना चाहिए।
अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री की स्थिति पर चुटकी लेते हुए कहा कि जिस सरकार में वे नंबर दो के पद पर हैं, वहां उन्हें कई बार ‘डपट’ (डांट) पड़ती है और उनके पास कोई वास्तविक अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “डिप्टी सीएम साहब को पता होना चाहिए कि वे जिस विभाग के मंत्री हैं, वहां अस्पतालों की हालत क्या है। वे केवल दूसरों पर टिप्पणी करने के लिए रखे गए हैं, जबकि असल सत्ता कहीं और है।” उन्होंने भाजपा के भीतर चल रही अंतर्कलह की ओर इशारा करते हुए कहा कि भाजपा के नेता जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के सांप्रदायिक और विवादित बयान देते हैं।
समाजवादी आंदोलन की बढ़ती प्रासंगिकता
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन का समापन समाजवादी विचारधारा पर जोर देते हुए किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब सांप्रदायिक एजेंडा चलाकर समाज को बांटने की कोशिश हो रही है, तब जनेश्वर मिश्र जैसे नेताओं के विचार एक मार्गदर्शक के रूप में सामने आते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर भाजपा की जनविरोधी नीतियों का पर्दाफाश करें।
उन्होंने कहा, “समाजवादी आंदोलन का महत्व आज पहले से कहीं अधिक है। हम जनेश्वर मिश्र, मुलायम सिंह यादव और अन्य समाजवादी पूर्वजों के संघर्ष को व्यर्थ नहीं जाने देंगे। हम एक ऐसा उत्तर प्रदेश और भारत बनाना चाहते हैं जहां विकास का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे, न कि केवल बड़े व्यापारियों के तिजोरी तक।” अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी सड़कों पर उतरकर महंगाई, बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ेगी, ताकि भाजपा के ‘पूंजीवादी मॉडल’ को चुनौती दी जा सके।