जेरूसलम, 31 अक्टूबर 2025: इजरायल-हमास संघर्ष विराम के बीच हमास ने गाजा में रेड क्रॉस को दो ताबूत सौंपे, जिनमें मृत बंधकों के अवशेष बताए जा रहे हैं। यह कदम शांति वार्ता की मुख्य शर्त का हिस्सा है, लेकिन हमास के पिछले धोखे से इजरायल भड़क चुका था। अब 13 और अवशेष लौटाने बाकी हैं। लेकिन क्या यह संघर्ष विराम को स्थायी बनाएगा? आइए, तीन हिस्सों में इस घटना को समझते हैं।
हमास का कदम और रेड क्रॉस को सौंपे ताबूत
हमास ने 30 अक्टूबर को गाजा में रेड क्रॉस को दो ताबूत सौंपे, जिनमें 7 अक्टूबर 2023 के हमले में बंधक बने दो इजरायली नागरिकों—सहार बरूच और अमीराम कूपर—के अवशेष हैं। इजरायली सेना ने पुष्टि की कि ताबूतों को रेड क्रॉस के माध्यम से किफसुफिम बॉर्डर क्रॉसिंग पर पहुंचाया गया, जहां ट्रूप्स ने इन्हें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक मेडिसिन भेजा। संघर्ष विराम शुरू होने के बाद हमास ने कुल 17 बंधकों के अवशेष लौटाए हैं, जबकि 11 और बरामद करने बाकी हैं। हमास का दावा है कि तबाही और इजरायली कंट्रोल से प्रक्रिया धीमी हुई। यह कदम US-ब्रोकरड पीस प्लान का हिस्सा है, लेकिन इजरायल ने राफा क्रॉसिंग बंद रखी है।
हमास का धोखा और इजरायल का भड़कना
इससे पहले हमास ने बंधकों के अवशेष लौटाने में देरी की, जिसे इजरायल ने धोखा माना। PM बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमास ने डील के प्रावधान तोड़े। 28 अक्टूबर को इजरायली हमलों में गाजा के खान यूनिस में 100 से अधिक लोग मारे गए, जिन्हें इजरायल ने राफा में एक सैनिक की हत्या का बदला बताया। हमास ने इन हमलों को संघर्ष विराम उल्लंघन कहा। नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अगर अवशेष नहीं लौटाए गए, तो युद्ध फिर शुरू हो सकता है। यह घटना दो साल पुराने संघर्ष को उजागर करती है, जहां हमास ने 7 अक्टूबर को 1,200 इजरायलियों को मारा और 251 को बंधक बनाया। इजरायल का जवाबी हमला गाजा में तबाही लाया।
गाजा की तबाही और संघर्ष विराम की उम्मीद
7 अक्टूबर 2023 से चले युद्ध में गाजा में 68,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें एक तिहाई बच्चे हैं, और घायलों की संख्या 1 लाख से ऊपर है। इजरायली हमलों से ऊर्जा ढांचा नष्ट हो गया, और 30 अक्टूबर को बड़े ड्रोन-मिसाइल हमलों से पूरे गाजा में बिजली गुल हो गई। हमास ने मध्यस्थों से सहायता बढ़ाने की मांग की। संघर्ष विराम 10 अक्टूबर को शुरू हुआ, जो बंधक-कैदी विनिमय पर आधारित है। इजरायल ने कहा कि हमास को निहत्था करना जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवशेष लौटाना शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा, लेकिन अनसुलझे मुद्दे जैसे गाजा का प्रशासन और सहायता प्रवाह चुनौती बने हैं।