महाराष्ट्र की राजनीति के एक युग का दुखद अवसान: बारामती विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन, देशभर में शोक की लहर
मुंबई/बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति के लिए आज का दिन इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक के रूप में दर्ज हो गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और कद्दावर राष्ट्रवादी नेता अजित पवार का बुधवार सुबह उनके अपने राजनीतिक गढ़ बारामती के पास एक भीषण विमान दुर्घटना में निधन हो गया। सुबह करीब 8:45 बजे हुए इस हादसे ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। जैसे ही यह खबर फैली, राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच शोक और सन्नाटे का माहौल छा गया। चार दशकों तक महाराष्ट्र की सत्ता और संगठन में अपनी निर्णायक भूमिका निभाने वाले ‘दादा’ के अचानक चले जाने से राज्य की सियासत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में असंभव प्रतीत होती है।
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान लैंडिंग के वक्त पूरी तरह से क्रैश हो गया और उसमें आग लग गई। इस दुखद घटना में अजित पवार के साथ सवार अन्य लोगों की भी जान चली गई। बारामती, जो अजित पवार का घर और कर्मभूमि रही है, वहां के लोग इस खबर को सुनकर गहरे सदमे में हैं। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और समर्थकों की आंखें नम हैं। सरकार ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इस हादसे की गहन और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।
अजित पवार के निधन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अत्यंत भावुक संदेश साझा करते हुए इसे एक अभूतपूर्व क्षति बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ने आज अपना एक महान सपूत और उन्होंने स्वयं एक अभिन्न मित्र खो दिया है। फडणवीस ने याद किया कि कैसे उन्होंने और अजित पवार ने मिलकर राज्य की राजनीति में कई कठिन दौर का सामना किया और जटिल चुनौतियों का समाधान निकाला। उन्होंने कहा कि अजित दादा की कार्यशैली और उनकी निर्णय लेने की क्षमता अद्वितीय थी, जिसका अभाव महाराष्ट्र को हमेशा खलेगा। व्यक्तिगत स्तर पर मुख्यमंत्री ने इसे एक ऐसी क्षति बताया जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
राज्य के एक अन्य उपमुख्यमंत्री और उनके सहयोगी एकनाथ शिंदे ने भी इस दिन को महाराष्ट्र के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। शिंदे ने कहा कि अजित दादा अपने वचन के पक्के नेता थे। उन्होंने उस समय को याद किया जब वे मुख्यमंत्री थे और अजित पवार उपमुख्यमंत्री के रूप में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे थे। एकनाथ शिंदे ने विशेष रूप से ‘लाडली बहन योजना’ का जिक्र करते हुए कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना को जमीन पर उतारने में अजित पवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि एक टीम के रूप में उनका सामंजस्य राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा था। शिंदे ने आश्वासन दिया कि जांच दल हादसे के हर पहलू की बारीकी से जांच करेगा ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस राष्ट्रीय त्रासदी पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपना शोक प्रकट करते हुए कहा कि अजित पवार का असामयिक निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अजित पवार हमेशा महाराष्ट्र की समृद्धि और प्रगति के प्रति समर्पित रहे। राजनाथ सिंह ने उन्हें एक ऐसा जनसेवक बताया जो करुणा और निष्ठा के साथ लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए जाना जाता था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना को हृदय विदारक बताया। उन्होंने दिवंगत पुण्यात्माओं की सद्गति के लिए प्रभु श्री राम से प्रार्थना की और शोकाकुल परिवार को इस अथाह दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर विपक्षी दलों के नेताओं ने भी अजित पवार के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घड़ी में पवार परिवार के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई। उन्होंने स्वयं अजित पवार की पत्नी और उनकी बहन सुप्रिया सुले से फोन पर बात कर उन्हें सांत्वना दी। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने स्वीकार किया कि हालांकि वैचारिक रूप से उनके बीच मतभेद रहे हैं, लेकिन अजित पवार की अपने काम के प्रति निष्ठा और समर्पण निर्विवाद था। उन्होंने पवार साहब और सुप्रिया सुले के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों ने भी अजित पवार के व्यक्तित्व और उनके योगदान को याद किया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने उन्हें अपना घनिष्ठ मित्र और महाराष्ट्र का एक दिग्गज नेता बताया। वहीं, नितिन गडकरी ने कहा कि उनके और अजित पवार के बीच पारिवारिक संबंध थे और यह क्षति उनके लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने उनके शानदार राजनीतिक रिकॉर्ड की प्रशंसा करते हुए उन्हें महाराष्ट्र का सबसे लोकप्रिय नेता बताया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी कैबिनेट बैठक के दौरान दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की, जो अजित पवार के अखिल भारतीय कद को दर्शाता है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने इस विमान हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए विभाग की ओर से जांच में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि एक ऊर्जावान नेतृत्व का इस तरह जाना व्यथित करने वाला है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में अपना एक विशिष्ट और स्वतंत्र स्थान बनाया था, जिसे कोई और नहीं भर सकता। विपक्ष के अन्य नेताओं जैसे इमरान मसूद, एचडी कुमारस्वामी और अरविंद सावंत ने भी उनके साहस और बारामती के विकास में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी ईश्वर से परिवार और पार्टी सदस्यों को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।
अजित पवार का जाना महाराष्ट्र के एक ऐसे युग का अंत है जहां राजनीति विकास और प्रशासनिक कौशल के इर्द-गिर्द घूमती थी। उनके कार्यकाल में महाराष्ट्र ने बुनियादी ढांचे, कृषि और बिजली क्षेत्र में कई नए आयाम स्थापित किए थे। आज पूरा देश उस साहसी और स्पष्टवादी नेता को अंतिम विदाई दे रहा है जिसने हमेशा अपनी शर्तों पर राजनीति की और अंत तक जनसेवा के पथ पर अडिग रहा।