• January 31, 2026

बांकेबिहारी मंदिर में ‘VIP दर्शन’ के नाम पर ठगी की कोशिश: मंदिर समिति ने किया खंडन, बताया पूरी तरह निशुल्क है व्यवस्था

वृंदावन: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में स्थित सुप्रसिद्ध ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में वीआईपी दर्शन (VIP Darshan) को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक भ्रामक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इस खबर में दावा किया जा रहा है कि मंदिर प्रशासन ने वीआईपी दर्शन के लिए एक आधिकारिक पोर्टल शुरू किया है, जिसके माध्यम से 501 रुपये का शुल्क देकर ऑनलाइन बुकिंग कराई जा सकती है। इस जानकारी के फैलते ही श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, जिसे देखते हुए श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड कमेटी (High Powered Committee) ने कड़ा रुख अपनाया है।

मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है और वीआईपी दर्शन के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है। समिति के सदस्यों ने इस तरह के दावों को पूरी तरह आधारहीन और भ्रामक करार देते हुए श्रद्धालुओं को धोखाधड़ी से बचने की सलाह दी है।

भ्रामक वेबसाइट और 501 रुपये का फर्जी दावा

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एक समाचार चैनल की वेबसाइट और कुछ सोशल मीडिया पोर्टल्स पर यह दावा किया गया कि श्रीबांकेबिहारी मंदिर में अब वीआईपी दर्शन के लिए कतार में लगने की जरूरत नहीं होगी और श्रद्धालु घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। रिपोर्ट में 501 रुपये का बुकिंग चार्ज लेने की बात भी कही गई थी। जैसे ही यह खबर वायरल हुई, मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने मंदिर कार्यालय में इस पोर्टल के बारे में पूछताछ शुरू कर दी।

इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य और मंदिर सेवायत दिनेश गोस्वामी ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा, “ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी के दर्शन निशुल्क हैं। मंदिर प्रशासन ऐसी किसी भी वेबसाइट का संचालन नहीं करता है जो पैसे लेकर वीआईपी दर्शन की बुकिंग करती हो। जिस वेबसाइट पर यह दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।” दिनेश गोस्वामी ने आगे बताया कि यह वेबसाइट श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है और मंदिर की छवि को नुकसान पहुँचा रही है।

हाई पावर्ड कमेटी की कार्रवाई और जांच के आदेश

वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग और शुल्क की भ्रामक जानकारी सामने आने के बाद दिनेश गोस्वामी ने इसकी विस्तृत रिपोर्ट हाई पावर्ड कमेटी को भेज दी है। कमेटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं ताकि संबंधित वेबसाइट और इसे प्रसारित करने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

प्रशासन का कहना है कि अक्सर त्योहारों और विशेष अवसरों पर कुछ असामाजिक तत्व फर्जी पोर्टल बनाकर भोले-भले श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। मंदिर समिति ने स्पष्ट किया कि दर्शन के नाम पर किसी भी व्यक्ति को नकद या ऑनलाइन भुगतान न करें, क्योंकि मंदिर में प्रवेश और दर्शन की पूरी प्रक्रिया निशुल्क है।

वीआईपी दर्शन की वास्तविक प्रक्रिया: ‘एक दिन पहले’ की अनिवार्य शर्त

भ्रम को दूर करने के लिए दिनेश गोस्वामी ने मंदिर में वीआईपी दर्शन की वास्तविक और आधिकारिक प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वीआईपी दर्शन के लिए मंदिर प्रशासन ने ‘सेवायत गोस्वामी’ के माध्यम से एक व्यवस्थित प्रक्रिया तय की है। मंदिर की हाई पावर्ड कमेटी के नियमों के अनुसार, प्रत्येक सेवायत गोस्वामी प्रतिदिन अधिकतम पांच यजमानों को वीआईपी दर्शन करा सकते हैं।

इस प्रक्रिया के तहत, यजमानों को दर्शन करने से कम से कम एक दिन पहले अपने संबंधित गोस्वामी के माध्यम से अपना पहचान पत्र (ID Proof) भेजना अनिवार्य है। इसके बाद, संबंधित गोस्वामी उस पहचान पत्र की प्रति मंदिर कार्यालय में जमा करेंगे। कार्यालय से अनुमति मिलने के बाद ही निर्धारित समय पर उन पांच यजमानों को निशुल्क वीआईपी दर्शन कराए जाते हैं। यह व्यवस्था केवल अनुशासन बनाए रखने और भीड़ प्रबंधन के उद्देश्य से लागू की गई है।

नववर्ष की विशेष छूट समाप्त, पुराने नियम फिर से लागू

बांकेबिहारी मंदिर में नववर्ष और छुट्टियों के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने अस्थाई तौर पर नियमों में कुछ ढील दी थी। दिनेश गोस्वामी ने बताया कि नववर्ष के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वीआईपी दर्शन की संख्या प्रति गोस्वामी पांच से बढ़ाकर 20 कर दी गई थी। यह विशेष व्यवस्था 20 जनवरी, 2026 तक के लिए लागू थी।

अब चूंकि प्रमुख पर्वों की भीड़ सामान्य हो चुकी है, इसलिए कमेटी ने फिर से पुराने आदेश को बहाल कर दिया है। 21 जनवरी से एक बार फिर प्रति गोस्वामी केवल पांच यजमानों के ही वीआईपी दर्शन हो सकेंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी सूचना के लिए केवल मंदिर कार्यालय या अधिकृत सेवायत गोस्वामियों से ही संपर्क करें और सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें।

श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह और सुरक्षा निर्देश

वृंदावन आने वाले लाखों भक्तों की सुरक्षा और सुलभ दर्शन सुनिश्चित करने के लिए मंदिर प्रशासन और जिला पुलिस लगातार समन्वय कर रहे हैं। मंदिर समिति ने दोहराया कि दर्शन मार्ग पर किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें। यदि कोई व्यक्ति वीआईपी दर्शन या जल्दी दर्शन कराने के नाम पर धन की मांग करता है, तो तुरंत पास के पुलिस बूथ या मंदिर कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।

बांकेबिहारी जी के दर्शनों की भारी मांग के कारण अक्सर ठग सक्रिय हो जाते हैं, लेकिन मंदिर प्रशासन की यह स्पष्ट घोषणा कि ‘कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है’ और ‘दर्शन निशुल्क है’, इन फर्जीवाड़ों पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में मंदिर प्रशासन दर्शन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सूचना पट्टों और सार्वजनिक उद्घोषणाओं का भी सहारा ले रहा है।

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