• January 3, 2026

ट्रक ड्राइवर की लुंगी-पगड़ी पहनकर धर्मेंद्र ने बचाई थी महेश भट्ट की नौकरी: वो किस्सा जो आज हर कोई सुना रहा है

मुंबई, 24 नवंबर 2025: जब बॉलीवुड का “ही-मैन” चला गया, तो पुरानी यादों की बाढ़ आ गई। सबसे ज्यादा बार-बार सुनाई दे रहा है वो 50 साल पुराना किस्सा – जब 21 साल के डरे-सहमें असिस्टेंट डायरेक्टर महेश भट्ट ने ट्रक ड्राइवर का कुर्ता-लुंगी-पगड़ी होटल में भूल दिया था और धर्मेंद्र ने बिना एक शब्द बोले, सड़क पर खड़े असली ट्रक ड्राइवर से कपड़े मांगकर पहन लिए। सिर्फ एक सीन के लिए नहीं, बल्कि एक नौजवान की नौकरी और इज्जत बचाने के लिए। आज जब धर्मेंद्र नहीं रहे, तो महेश भट्ट, पीयूष पांडे और पूरा बॉलीवुड बार-बार यही कह रहा है – “ऐसा दिलदार इंसान फिर कहां मिलेगा?”

लोकेशन पर हड़कंप: “कपड़े कहाँ हैं?” महेश भट्ट की सांसें अटकीं

साल था 1970 का आसपास। राज खोसला की फिल्म की शूटिंग चल रही थी। सीन था – धर्मेंद्र ट्रक ड्राइवर बने हुए हैं। असिस्टेंट डायरेक्टर महेश भट्ट की जिम्मेदारी थी लुंगी, कुर्ता और पगड़ी लाना। पूरी यूनिट लोकेशन पर पहुंच गई, कैमरा रेडी, लाइट्स ऑन – और अचानक खोजबीन शुरू हुई – “ड्रेस कहाँ है?” महेश भट्ट को याद आया कि सारी ड्रेस होटल के कमरे में रह गई। उस ज़माने में मोबाइल नहीं थे, कोई दूसरी ड्रेस नहीं थी। डायरेक्टर राज खोसला गुस्से में थे। 21-22 साल का महेश भट्ट समझ गया था – आज नौकरी जाएगी, फजीहत होगी, शायद करियर ही खत्म। डरते-डरते धर्मेंद्र के पास पहुंचे और कांपती आवाज में बोले, “साहब… कपड़े होटल में रह गए।” सबकी नजरें धर्मेंद्र पर टिक गईं।

धर्मेंद्र ने जो किया, वो आज भी बॉलीवुड सुना-सुनाकर रो रहा

हैलोकेशन पर मौन छा गया। धर्मेंद्र ने एक पल को महेश भट्ट को देखा, फिर मुस्कुराए और बोले – “अरे यार, चिंता मत कर।” पास में एक असली ट्रक ड्राइवर खड़ा था। धर्मेंद्र उसके पास गए, हाथ जोड़कर बोले, “भाई, दो मिनट के लिए अपनी लुंगी, कुर्ता और पगड़ी दे देगा? बस एक सीन है।” ड्राइवर ने हैरानी से देखा, फिर हंसकर कपड़े उतार दिए। धर्मेंद्र ने वहीं सड़क किनारे वो लुंगी-कुर्ता-पगड़ी पहनी, सीन पूरा किया और शूटिंग खत्म होने के बाद कपड़े धोकर लौटाए। महेश भट्ट बाद में लिखते हैं – “मैंने सोचा था आज मेरी नौकरी गई, मेरी इज्जत गई। लेकिन धर्मेंद्र ने मुझे बचा लिया। उस दिन मुझे समझ आया कि स्टारडम और इंसानियत में फर्क क्या होता है।”

वो दौर, वो लोग: जब धर्मेंद्र खुद थे बॉलीवुड की आत्मा

पीयूष पांडे कहते हैं – “धर्मेंद्र ने बॉलीवुड का पूरा एक युग देखा। 1957-58 में फिल्मफेयर का पहला टैलेंट कॉन्टेस्ट हुआ था, वो रनर-अप रहे। विमल रॉय ने उन्हें ‘बंदिनी’ ऑफर की जो छह साल बाद रिलीज हुई। पंजाब से आए उस लड़के ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।” आज जब वो नहीं रहे, तो महेश भट्ट से लेकर अमिताभ बच्चन तक हर कोई एक ही बात दोहरा रहा है – “उनका जाना किसी युग का अंत है।” ट्रक ड्राइवर की लुंगी-पगड़ी वाला वो किस्सा सिर्फ एक वाकया नहीं, धर्मेंद्र की उस इंसानियत का सबूत है जो हमेशा याद रहेगा। बॉलीवुड आज रो रहा है, क्योंकि उसका सबसे बड़ा “दिलवाला” चला गया।
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