• February 11, 2026

सिनेमा जगत में शोक की लहर: दिग्गज अभिनेता सुनील थापा का 68 वर्ष की उम्र में निधन, काठमांडू के अस्पताल में ली अंतिम सांस

काठमांडू/मुंबई। नेपाली सिनेमा के ‘भीष्म पितामह’ और बॉलीवुड के जाने-माने चरित्र अभिनेता सुनील थापा अब हमारे बीच नहीं रहे। 68 वर्षीय दिग्गज अभिनेता का शनिवार सुबह नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने न केवल नेपाली फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि बॉलीवुड और भोजपुरी सिनेमा जगत को भी स्तब्ध कर दिया है। सुनील थापा अपनी बहुमुखी प्रतिभा और स्क्रीन पर अपनी दमदार उपस्थिति के लिए जाने जाते थे। विशेष रूप से विलेन के किरदारों में उन्होंने जो जान फूंकी, उसने उन्हें दक्षिण एशिया के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया था।

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, सुनील थापा को शनिवार सुबह बेहद गंभीर और बेहोशी की हालत में काठमांडू के थापाथली स्थित नॉर्विक अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के चेयरपर्सन राजेंद्र बहादुर सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब वे पूरी तरह अचेत थे। डॉक्टरों की टीम ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन सुबह 7:44 बजे किए गए ईसीजी (ECG) परीक्षण के बाद उनकी मृत्यु की औपचारिक पुष्टि कर दी गई। डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि उनकी मृत्यु का कारण अचानक आया कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) था। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी, जिससे उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिल सका।

सुनील थापा का फिल्मी सफर किसी मिसाल से कम नहीं रहा। उन्होंने अपने करियर में 300 से अधिक नेपाली फिल्मों में अभिनय किया। नेपाली सिनेमा में उन्हें वह मुकाम हासिल था, जो बॉलीवुड में प्राण या अमरीश पुरी जैसे दिग्गजों को मिला। फिल्म ‘चीनो’ में उनके द्वारा निभाया गया ‘राते कैला’ का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। इस एक रोल ने उन्हें इंडस्ट्री के सबसे खूंखार और लोकप्रिय विलेन के रूप में स्थापित कर दिया था। नेपाली दर्शकों के बीच वे इस कदर लोकप्रिय थे कि उनके नाम मात्र से फिल्में हिट हो जाया करती थीं।

नेपाली सिनेमा के साथ-साथ सुनील थापा ने बॉलीवुड में भी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई। वे उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय कलाकारों में से थे, जिन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया। हाल के वर्षों में उन्हें प्रियंका चोपड़ा अभिनीत फिल्म ‘मैरी कॉम’ में कोच की भूमिका के लिए काफी सराहना मिली। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में भी नामांकन प्राप्त हुआ था, जो उनके टैलेंट का एक बड़ा प्रमाण है। इसके अतिरिक्त, मनोज बाजपेयी की मशहूर वेब सीरीज ‘द फैमिली मैन’ में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। उनके बॉलीवुड करियर की शुरुआत काफी पहले हो गई थी, जहां उन्होंने ‘एक दूजे के लिए’ और ‘आज की आवाज’ जैसी क्लासिक फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। हिंदी के अलावा उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया और वहां के दर्शकों का दिल जीता।

अभिनय की दुनिया में आने से पहले सुनील थापा का जीवन काफी विविधताओं से भरा था। 1970 के दशक के मध्य में उन्होंने मुंबई में एक मॉडल के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। वे खेलों के भी बड़े शौकीन थे और मुंबई के स्थानीय क्लबों के लिए पेशेवर फुटबॉल खेला करते थे। बहुत कम लोग जानते हैं कि सुनील थापा एक कुशल फोटो जर्नलिस्ट भी रह चुके थे। अपने शुरुआती वर्षों में उन्होंने प्रसिद्ध ‘जेएस पत्रिका’ (जूनियर स्टेट्समैन) के लिए काम किया और 1974 में भूटान के ऐतिहासिक राज्याभिषेक समारोह को कवर करने का गौरव हासिल किया था।

अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर सुनील थापा शिक्षा और कला के प्रसार में जुटे थे। वे एवरेस्ट फिल्म अकादमी के अध्यक्ष के रूप में नई पीढ़ी के कलाकारों को तराशने का काम कर रहे थे। उनकी आखिरी फिल्म ‘एकलो’ थी, जो उनकी कलात्मक विरासत का अंतिम हिस्सा बनी। पारिवारिक रूप से देखा जाए तो उनके परिवार के अन्य सदस्य मुंबई में रहते हैं, जबकि सुनील खुद काठमांडू के एक अपार्टमेंट में रहकर नेपाली सिनेमा की सेवा कर रहे थे। उनके निधन के बाद काठमांडू से लेकर मुंबई तक शोक संवेदनाओं का तांता लगा हुआ है। फिल्म जगत के तमाम सितारों ने उन्हें एक नेक इंसान और एक महान गुरु के रूप में याद किया है।

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