मीट ग्राइंडर के भीतर छिपा था करोड़ों का सोना: डीआरआई ने मुंबई में कूरियर तस्करी के बड़े सिंडिकेट का किया पर्दाफाश
मुंबई: राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही सोने की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। डीआरआई की मुंबई क्षेत्रीय इकाई ने रियाद से भेजे गए एक कूरियर पार्सल के जरिए विदेशी मूल के सोने की तस्करी की कोशिश को नाकाम कर दिया है। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने 1.815 किलोग्राम सोना जब्त किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 2.89 करोड़ रुपये बताई जा रही है। तस्करी का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि तस्करों ने सोने को छिपाने के लिए एक बेहद ही अनोखा और शातिराना तरीका अपनाया था।
जांच एजेंसी को खुफिया जानकारी मिली थी कि रियाद से मुंबई के इंटरनेशनल कूरियर टर्मिनल पर आने वाले एक पार्सल में प्रतिबंधित सामान की तस्करी की जा रही है। इसी इनपुट के आधार पर डीआरआई की टीम ने टर्मिनल पर पहुंचकर संदिग्ध पार्सल की पहचान की और उसे गहन जांच के लिए रोक लिया। जब पार्सल को खोला गया, तो ऊपर से यह एक सामान्य ‘मीट ग्राइंडर’ यानी मांस पीसने वाली मशीन दिखाई दे रही थी। पहली नजर में मशीन बिल्कुल सामान्य लग रही थी, लेकिन तकनीकी जांच और स्कैनिंग के दौरान अधिकारियों को इसके अंदर कुछ संदिग्ध धातु होने का आभास हुआ।
डीआरआई के अधिकारियों ने जब मीट ग्राइंडर मशीन को पूरी तरह से खोलकर उसके आंतरिक हिस्सों की जांच शुरू की, तो उनकी हैरानी का ठिकाना नहीं रहा। तस्करों ने मशीन के मोटर और अन्य हिस्सों के बजाय उसके ‘गियर्स’ के भीतर सोना छिपाया था। मशीन के भीतर लगे भारी गियर को जब विशेष उपकरणों की मदद से तोड़ा गया, तो उसके खोखले हिस्सों के अंदर सोने के टुकड़े बरामद हुए। अधिकारियों ने बताया कि इन गियर्स के भीतर अलग-अलग आकार और वजन के सोने के कुल 32 कटे हुए टुकड़े बहुत ही बारीकी से फिट किए गए थे ताकि मशीन के वजन या उसकी आवाज से किसी को शक न हो।
सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के कड़े प्रावधानों के तहत डीआरआई ने 1,815 ग्राम विदेशी सोना और उसे छिपाने के लिए इस्तेमाल की गई मीट ग्राइंडर मशीन को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया। इस बरामदगी के तुरंत बाद एजेंसी ने कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए उन लोगों की तलाश शुरू की, जो इस खेप को हासिल करने वाले थे। त्वरित कार्रवाई करते हुए डीआरआई ने मुंबई और आसपास के इलाकों से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इनमें से एक व्यक्ति वह था जिसे इस कूरियर पार्सल की डिलीवरी लेनी थी, जबकि दूसरे आरोपी ने इस अवैध शिपमेंट को क्लियर कराने के लिए फर्जी या हेरफेर किए गए केवाईसी (KYC) दस्तावेजों की व्यवस्था की थी।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान तस्करी के एक बड़े नेटवर्क के संकेत मिले हैं। डीआरआई का मानना है कि यह केवल एक बार की घटना नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह है जो खाड़ी देशों से भारत में सोने की अवैध आवाजाही के लिए कूरियर सेवाओं का दुरुपयोग कर रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रियाद में इस पार्सल को किसने भेजा था और भारत में इसके पीछे मास्टरमाइंड कौन है। अक्सर देखा गया है कि तस्कर हवाई अड्डों पर व्यक्तिगत तलाशी से बचने के लिए अब कूरियर और कार्गो सेवाओं का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि मशीनों के भीतर छिपाया गया सोना पकड़ना मुश्किल होगा।
राजस्व खुफिया निदेशालय ने इस सफलता के बाद एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि यह मामला स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि तस्करी करने वाले सिंडिकेट कानून प्रवर्तन एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए लगातार अपने तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। कभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कभी खिलौनों तो कभी इस तरह की भारी मशीनों का उपयोग तस्करी के लिए किया जा रहा है। हालांकि, डीआरआई ने यह भी स्पष्ट किया कि वह तस्करी के इन नए और उभरते तरीकों को उजागर करने, अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की कमर तोड़ने और देश की आर्थिक सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
मुंबई अंतरराष्ट्रीय कूरियर टर्मिनल पर हुई यह बड़ी जब्ती सीमा शुल्क विभाग और डीआरआई की मुस्तैदी का प्रमाण है। पिछले कुछ महीनों में मुंबई हवाई अड्डे और कूरियर पोर्ट्स पर सोने की जब्ती के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जिसे देखते हुए निगरानी को और भी सख्त कर दिया गया है। फिलहाल, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और डीआरआई इस पूरे सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन और पिछले ऑपरेशन्स की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है, जिससे सोने की तस्करी के इस ‘इंटरनेशनल रूट’ का पूरी तरह से भंडाफोड़ हो सके।