• March 18, 2026

माघ मेले में धरने पर बैठे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ी, छह दिन खुले आसमान में रहने से हुआ बुखार

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार हो गया है। बताया जा रहा है कि बीते छह दिनों से खुले आसमान के नीचे लगातार धरने पर बैठे रहने के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा है। चिकित्सकों से परामर्श लिया गया है और फिलहाल उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है।

शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने उनकी तबीयत खराब होने की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फिलहाल लोगों से मुलाकात नहीं कर रहे हैं और चिकित्सकीय निगरानी में आराम कर रहे हैं।


18 जनवरी से जारी है धरना

ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 18 जनवरी, मौनी अमावस्या के दिन से ही माघ मेले में धरने पर बैठे हुए हैं। यह धरना उस घटना के विरोध में शुरू किया गया, जिसमें मेला प्रशासन द्वारा उनकी पालकी को रोक दिया गया था और उन्हें स्नान के लिए आगे बढ़ने से वापस लौटा दिया गया था।

इस घटना के बाद से शंकराचार्य अपने त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के बाहर पालकी पर ही बैठे हैं और लगातार धरना दे रहे हैं। ठंड, खुले वातावरण और पर्याप्त विश्राम न मिलने के कारण उनकी सेहत पर इसका असर पड़ा है।


बुखार की शिकायत, डॉक्टरों की सलाह पर आराम

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी के अनुसार, उन्हें शुक्रवार को बुखार की शिकायत हुई। इसके बाद चिकित्सकों से तत्काल परामर्श लिया गया। डॉक्टरों ने उन्हें पूर्ण विश्राम और लोगों से मिलने से बचने की सलाह दी है।

हालांकि शंकराचार्य ने फिलहाल अपना धरना समाप्त करने का कोई संकेत नहीं दिया है। उनके शिष्य और समर्थक लगातार उनकी सेवा और देखरेख में जुटे हुए हैं।


मौनी अमावस्या पर हुआ था विवाद

पूरा विवाद मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। आरोप है कि मेला प्रशासन ने उनकी पालकी को रास्ते में ही रोक दिया और उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।

शंकराचार्य के शिष्यों और साथ मौजूद संतों का आरोप है कि इस दौरान प्रशासनिक कर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। संतों का दावा है कि:

  • शंकराचार्य और उनके शिष्यों की चोटी और शिखा पकड़कर उन्हें धक्का दिया गया

  • पालकी को जबरन रोका गया

  • दंड (छड़ी) छीनकर फेंक दिए गए

  • कई साधु-संतों के साथ मारपीट हुई, जिससे कुछ की हालत भी खराब हो गई

हालांकि मेला प्रशासन ने इन आरोपों को लेकर अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।


घटना से नाराज शंकराचार्य ने शुरू किया धरना

घटना के बाद नाराज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मौके पर ही धरना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि पुलिस उन्हें पालकी समेत त्रिवेणी मार्ग स्थित उनके शिविर के सामने छोड़कर चली गई थी।

इसके बाद से शंकराचार्य उसी अवस्था में, अपनी पालकी पर बैठे हुए हैं और शिविर के अंदर जाने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।


क्या हैं शंकराचार्य की मांगें?

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. मेला प्रशासन सार्वजनिक रूप से इस घटना के लिए माफी मांगे

  2. उन्हें ससम्मान संगम स्नान कराया जाए

  3. इसके बाद ही वे अपने शिविर में प्रवेश करेंगे

उनका कहना है कि यह मामला केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि संपूर्ण सनातन परंपरा और साधु-संतों के सम्मान से जुड़ा हुआ है।


शिष्यों और संत समाज में नाराजगी

शंकराचार्य की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद संत समाज और उनके शिष्यों में गहरी नाराजगी और चिंता का माहौल है। कई संतों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने सम्मानजनक समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

कुछ संतों ने आरोप लगाया है कि साधु-संतों के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि माघ मेले जैसी पवित्र धार्मिक परंपरा की गरिमा को भी आघात पहुंचाता है।


प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद मेला प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे विवाद और गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों और धार्मिक संगठनों ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संवाद और समाधान नहीं किया गया, तो यह मामला कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक छवि के लिए भी चुनौती बन सकता है।


स्वास्थ्य और आंदोलन के बीच संतुलन की चुनौती

शंकराचार्य की बिगड़ती सेहत के बीच उनके समर्थकों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि धरने और स्वास्थ्य के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद उनका खुले आसमान में बैठना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा माना जा रहा है।

हालांकि शंकराचार्य अपने रुख पर अडिग हैं और उनका कहना है कि सम्मान और परंपरा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।


आगे क्या?

अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। यदि शंकराचार्य की तबीयत और अधिक बिगड़ती है, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और माघ मेले में आ रहे श्रद्धालुओं के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज है।


निष्कर्ष

माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ना न केवल एक स्वास्थ्य संबंधी मामला है, बल्कि यह प्रशासन और संत समाज के बीच बढ़ते तनाव का भी संकेत है। छह दिन से खुले आसमान के नीचे धरना, बुखार और चिकित्सकीय सलाह के बावजूद जारी विरोध—यह सब दर्शाता है कि मामला केवल एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है।

अब यह देखना अहम होगा कि क्या प्रशासन सम्मानजनक समाधान निकाल पाता है या यह विवाद और गहराता जाएगा।

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