• February 26, 2026

दिल्ली के तुर्कमान गेट पर भारी तनाव के बीच चला एमसीडी का बुलडोजर: फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण जमींदोज

दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में बुधवार तड़के जबरदस्त हंगामा और तनाव देखने को मिला। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों का पालन करते हुए फैज-ए-इलाही मस्जिद और उससे सटे कब्रिस्तान की भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान स्थिति तब हिंसक हो गई जब स्थानीय लोगों की भीड़ ने बुलडोजर का रास्ता रोकने की कोशिश की और पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसक झड़प में कम से कम पांच पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया और हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को खदेड़ा। फिलहाल पूरे इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

देर रात शुरू हुई कार्रवाई और स्थानीय विरोध की चिंगारी

एमसीडी की यह कार्रवाई कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट के लंबे समय से चल रहे आदेशों की तामील थी। प्रशासन ने रणनीतिक तौर पर देर रात और तड़के का समय चुना ताकि शहर की यातायात व्यवस्था और सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो। दिल्ली नगर निगम के डीसी विवेक अग्रवाल के नेतृत्व में लगभग 32 जेसीबी मशीनों, 4 पोकलेन मशीनों और भारी ट्रकों का बेड़ा तुर्कमान गेट पहुंचा। जैसे ही बुलडोजर ने अवैध ढांचों को गिराना शुरू किया, आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए और कार्रवाई का विरोध करने लगे। स्थानीय लोगों का तर्क था कि यह ढांचा वर्षों पुराना है, जबकि एमसीडी का दावा था कि मस्जिद के मुख्य हिस्से को छोड़कर बाकी तमाम निर्माण अवैध जमीन पर किए गए थे। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया और भीड़ ने पुलिस को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

पथराव और पुलिस की जवाबी कार्रवाई से दहला इलाका

सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी निधिन वलसन के अनुसार, जब एमसीडी के कर्मचारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे, तो पुलिस ने पहले से ही सुरक्षा घेरा बना रखा था। पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर की जा रही है और इसमें बाधा डालना कानून का उल्लंघन होगा। हालांकि, करीब 150 लोगों की भीड़ वहां जमा हो गई और अचानक करीब 25-30 उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थरों की बारिश शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस ने संयम बरतते हुए पहले चेतावनी दी और फिर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे। हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) कर पुलिस ने उपद्रवियों को गलियों की तरफ धकेला, जिसके बाद एमसीडी की टीम अपना काम जारी रख सकी।

अतिक्रमण की जद में आए बरात घर और अन्य अवैध निर्माण

एमसीडी और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई मुख्य मस्जिद के विरुद्ध नहीं थी। सेंट्रल रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि मस्जिद के पास स्थित एक बरात घर के एक बड़े हिस्से को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया है। इसके अलावा, दो दुकानें और तीन डिस्पेंसरी, जो अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाई गई थीं, उन पर भी कार्रवाई की गई है। नगर निगम के अनुसार, यह पूरा विवाद लगभग 36,400 वर्ग फुट के क्षेत्र को लेकर था। इस जमीन पर एक मंजिला ढांचा और दो मंजिला दीवारें खड़ी कर दी गई थीं। निगम ने स्पष्ट किया कि मस्जिद के लिए आवंटित जमीन को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है और केवल उसी हिस्से को ढहाया गया है जिसके स्वामित्व के दस्तावेज मस्जिद प्रबंध समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड पेश नहीं कर पाए थे।

कब्रिस्तान की जमीन पर बरात घर बनाने का विवाद

इस पूरी घटना के बीच स्थानीय स्तर पर भी मतभेद उभर कर सामने आए हैं। इलाके के ही कुछ पुराने निवासियों ने बताया कि जिस जगह पर आज बरात घर बना हुआ था, वहां मूल रूप से एक पुराना कब्रिस्तान हुआ करता था। एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरगाह और मस्जिद से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्रिस्तान की जमीन को समतल कर वहां बरात घर का निर्माण कर लिया था, जो कि धार्मिक और कानूनी दोनों लिहाज से गलत था। लोगों का कहना है कि अगर वहां कब्रिस्तान ही रहता तो शायद आज यह नौबत नहीं आती। इस बयान से संकेत मिलता है कि अतिक्रमण को लेकर स्थानीय समुदाय के भीतर भी दो फाड़ थे, हालांकि सार्वजनिक रूप से भीड़ ने प्रशासन की कार्रवाई का ही विरोध किया।

हाई कोर्ट में लंबित मामला और मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई

यह विवाद दिल्ली हाई कोर्ट में लंबे समय से विचाराधीन है। सैयद फैज इलाही मस्जिद की प्रबंध समिति ने एमसीडी के 22 दिसंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 0.195 एकड़ जमीन को छोड़कर बाकी सभी संरचनाओं को ध्वस्त करने का फरमान जारी किया गया था। एमसीडी का रुख यह रहा है कि वक्फ बोर्ड या मस्जिद समिति इस अतिरिक्त जमीन पर अपना वैध कब्जा साबित करने में विफल रही है। मंगलवार को ही न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने इस मामले में एमसीडी, डीडीए, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि, कोर्ट ने पूर्व के ध्वस्तीकरण आदेश पर कोई तात्कालिक रोक नहीं लगाई थी, जिसके कारण निगम ने इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।

सुरक्षा व्यवस्था और उपद्रवियों पर पुलिस का शिकंजा

पथराव की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। घायल हुए पांच पुलिसकर्मियों की शिकायत पर संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। डीसीपी निधिन वलसन ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय स्तर पर बनाए गए वीडियो की जांच की जा रही है। हिरासत में लिए गए लोग मुख्य रूप से चांदनी महल और आसपास के इलाकों के निवासी हैं। पुलिस का कहना है कि जो भी व्यक्ति पत्थरबाजी और सरकारी काम में बाधा डालने में शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए अर्धसैनिक बलों की छोटी टुकड़ियों को भी एहतियातन तैनात किया गया है और वरिष्ठ अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं।

संवेदनशील पृष्ठभूमि: लाल किला विस्फोट और मस्जिद का कनेक्शन

इस मस्जिद का नाम हाल के दिनों में एक बेहद संवेदनशील मामले में भी चर्चा में आया था। सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास एक कार में हुए भीषण विस्फोट से ठीक पहले, संदिग्ध आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी ने इसी फैज-ए-इलाही मस्जिद में करीब 10 मिनट बिताए थे। उस विस्फोट में 15 लोगों की दुखद मृत्यु हुई थी। हालांकि, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का इस घटना से सीधा संबंध नहीं बताया गया है, लेकिन इस पृष्ठभूमि ने इलाके की संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस मस्जिद और आसपास की गतिविधियों पर पहले से ही कड़ी नजर रख रही थीं।

भविष्य की रणनीति और मलबे का निस्तारण

एमसीडी के डीसी विवेक अग्रवाल ने आश्वासन दिया है कि ध्वस्तीकरण के बाद जो भारी मात्रा में मलबा (वेस्ट) वहां जमा हो गया है, उसे हटाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। इसके लिए अतिरिक्त ट्रकों और मजदूरों को लगाया गया है। निगम का कहना है कि जमीन को पूरी तरह खाली कराकर उसे संबंधित विभाग को सौंप दिया जाएगा ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। पुलिस अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक एमसीडी का काम पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षा बल वहां मौजूद रहेंगे। स्थानीय अमन कमेटी के सदस्यों से भी बातचीत की जा रही है ताकि अफवाहों को फैलने से रोका जा सके और इलाके में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे। प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन और हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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