डिजिटल क्रांति की ओर भारतीय संसद: 27 भाषाओं में कार्यवाही का प्रसारण और सांसदों को AI से मिलेगी मदद, कीर्ति आजाद मामले में जांच तेज
नई दिल्ली: भारतीय संसद अब एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है, जहाँ परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कार्यप्रणाली को अधिक समावेशी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए कई क्रांतिकारी घोषणाएं की हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एकीकरण से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए उठाए गए सख्त कदमों तक, स्पीकर बिरला ने स्पष्ट कर दिया है कि नए साल में संसद का चरित्र पूरी तरह बदल जाएगा। इस व्यापक बदलाव के केंद्र में भारत की भाषाई विविधता और तकनीक के माध्यम से सांसदों की कार्यक्षमता को बढ़ाना है।
संसद की कार्यवाही में AI का प्रवेश: 27 भाषाओं में होगा प्रसारण
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक संसद की कार्यवाही का सभी 27 अधिसूचित भारतीय भाषाओं में प्रसारण करना है। भारत जैसे विविध देश में, जहाँ भाषाएं संस्कृति का आधार हैं, यह कदम ऐतिहासिक माना जा रहा है। वर्तमान योजना के अनुसार, आगामी मानसून सत्र में 22 भाषाओं में कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ाकर सभी 27 अधिसूचित भाषाओं तक ले जाया जाएगा। इसके लिए अत्याधुनिक एआई तकनीक की मदद ली जा रही है, जो सदन में होने वाली चर्चाओं का वास्तविक समय (रियल-टाइम) में अनुवाद करेगी। बिरला का मानना है कि इससे न केवल सांसदों को अपनी मातृभाषा में विचार व्यक्त करने का बेहतर विकल्प मिलेगा, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक भी अपनी भाषा में लोकतंत्र के इस मंदिर की गतिविधियों को देख और समझ सकेंगे।
सांसदों के लिए डिजिटल सुविधा: व्हाट्सएप पर मिलेंगे सवालों के जवाब
तकनीक का उपयोग केवल प्रसारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांसदों की तैयारी को भी पुख्ता करेगा। लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि अब एआई के माध्यम से सांसदों को उनके तारांकित प्रश्नों के बारे में तीन दिन पहले ही सूचित कर दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि पूछे गए सवालों के आधिकारिक जवाब सत्र से एक दिन पहले ही सांसदों को व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य सांसदों को पूरक प्रश्न (Supplementary Questions) तैयार करने के लिए पर्याप्त समय देना है, जिससे सदन के भीतर होने वाली चर्चाएं अधिक गहरी और तर्कपूर्ण हो सकें। इसके अतिरिक्त, लोकसभा की कार्यवाही के लिखित विवरण को अब केवल एक घंटे के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा, जिसे भविष्य में घटाकर मात्र 30 मिनट करने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रमंडल देशों के पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन: पाक-बांग्लादेश बाहर
नई दिल्ली 14 से 16 जनवरी तक राष्ट्रमंडल देशों के संसद के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) की मेजबानी करने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन संविधान भवन में करेंगे। हालांकि, इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दो पड़ोसी देशों, पाकिस्तान और बांग्लादेश की भागीदारी नहीं होगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान इस सम्मेलन का हिस्सा नहीं होगा। वहीं, बांग्लादेश के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वहां की संसद वर्तमान में भंग होने के कारण उनका कोई प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल नहीं हो पाएगा। यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर संसदीय लोकतंत्रों के बीच सहयोग बढ़ाने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
सदन की मर्यादा पर सख्त रुख: कीर्ति आजाद ई-सिगरेट मामले में अंतिम चरण में जांच
संसद के भीतर अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के मुद्दे पर भी स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा संदेश दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद द्वारा सदन के भीतर कथित तौर पर ई-सिगरेट के इस्तेमाल से जुड़े विवाद पर बिरला ने कहा कि इस मामले की जांच अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद की मर्यादा का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। स्पीकर ने स्पष्ट किया कि सदन केवल कानून बनाने की जगह नहीं है, बल्कि यह देश के लिए एक आदर्श आचरण का केंद्र भी है, और किसी भी सदस्य द्वारा इसकी पवित्रता को ठेस पहुंचाना स्वीकार्य नहीं होगा।
भाषाई समावेशिता और प्रपत्रों का डिजिटलीकरण
लोकसभा अध्यक्ष ने जानकारी दी कि इस सत्र से सदन के महत्वपूर्ण प्रपत्र (Documents) दस विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराए जाएंगे। धीरे-धीरे इन भाषाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि प्रत्येक सांसद अपनी पसंदीदा भाषा में विधायी कार्यों का अध्ययन कर सके। बिरला के अनुसार, एआई के बढ़ते प्रयोग से न केवल अनुवाद की सटीकता बढ़ी है, बल्कि इससे समय की भी काफी बचत हो रही है। आने वाले समय में सांसद अपनी सीटों पर बैठकर भी कई भाषाओं में अनुवाद की सुविधा ले सकेंगे, जिससे सदन के भीतर होने वाले भाषाई अवरोध पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे।
यह बदलाव भारतीय संसदीय इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत हैं, जो तकनीक के माध्यम से लोकतंत्र को और अधिक मजबूत और सुलभ बनाने की दिशा में निर्देशित हैं।