• February 26, 2026

ओडिशा भर्ती घोटाला: बीजद का सीबीआई पर गंभीर आरोप, कहा- ‘चार्जशीट में बड़े चेहरों को बचाने के लिए छिपाए गए तथ्य’

भुवनेश्वर: ओडिशा में करोड़ों रुपये के सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती घोटाले को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। बीजद का आरोप है कि सीबीआई ने इस घोटाले के संबंध में जो प्रारंभिक चार्जशीट दाखिल की है, उसमें जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया गया है। पार्टी का दावा है कि जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य इस भ्रष्टाचार के पीछे छिपे ‘प्रभावशाली’ और ‘शक्तिशाली’ व्यक्तियों को कानूनी कार्रवाई से बचाना है। बीजद ने अब इस पूरे मामले की नए सिरे से और गहन जांच की मांग की है ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जिन्होंने सरकारी तंत्र के भीतर बैठकर इस बड़े घोटाले को अंजाम देने में मदद की।

प्रभावशाली लोगों को संरक्षण देने का प्रयास: लेनिन मोहंती

मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजद के प्रवक्ता लेनिन मोहंती ने सीबीआई की चार्जशीट को अधूरा और त्रुटिपूर्ण करार दिया। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सीबीआई की शुरुआती जांच रिपोर्ट यह संकेत देती है कि एजेंसी जितना उजागर कर रही है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण जानकारियां छिपा रही है। मोहंती ने आरोप लगाया कि घोटाले की गंभीरता और इसमें शामिल धन के बड़े पैमाने को देखते हुए यह संभव ही नहीं है कि बिना किसी उच्च सरकारी संरक्षण के इसे अंजाम दिया गया हो। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसी केवल बाहरी ठेकेदारों और छोटे सहयोगियों पर शिकंजा कस रही है, जबकि असली मास्टरमाइंड अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं। बीजद प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि क्या सीबीआई पर किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव है जिसके कारण वह सत्ता के गलियारों तक पहुंचने से कतरा रही है।

चार्जशीट में विसंगतियां और संदिग्ध अधिकारियों की अनुपस्थिति

लेनिन मोहंती ने सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट के तकनीकी पहलुओं पर बात करते हुए बताया कि इसमें ‘सिलिकॉन टेकला’ के मालिक को मुख्य आरोपी के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही ‘पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी’ के मालिक और 14 अन्य व्यक्तियों को इस अपराध में सहयोगी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। हालांकि, बीजद ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि पूरी भर्ती प्रक्रिया सीधे तौर पर राज्य के गृह विभाग और ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (OPRB) के अधीन आती है, लेकिन चार्जशीट में इन विभागों के किसी भी अधिकारी का नाम शामिल नहीं है। मोहंती ने तर्क दिया कि जब भर्ती बोर्ड और गृह विभाग की निगरानी में इतनी बड़ी परीक्षा आयोजित की जा रही थी, तो बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत या घोर लापरवाही के इतना बड़ा घोटाला संभव ही नहीं था। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराना सीबीआई की प्राथमिकता होनी चाहिए थी, लेकिन उन्हें क्लीन चिट देना या जांच के दायरे से बाहर रखना संदेह पैदा करता है।

आउटसोर्सिंग प्रक्रिया और विभागीय विफलता पर सवाल

बीजद ने गृह विभाग और ओपीआरबी की भूमिका को इस घोटाले की जड़ बताया है। मोहंती के अनुसार, “ओपीआरबी और गृह विभाग की विफलता ने ही इतने बड़े पैमाने पर घोटाले को संभव बनाया।” उन्होंने मांग की कि उन उच्च अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच होनी चाहिए जिन्होंने भर्ती प्रक्रिया के संवेदनशील कार्यों को बाहरी निजी कंपनियों को ‘आउटसोर्स’ करने की अनुमति दी थी। पार्टी का मानना है कि परीक्षा के गोपनीय डेटा और प्रश्नपत्रों तक बाहरी कंपनियों की पहुंच सुनिश्चित करना ही भ्रष्टाचार का पहला कदम था। बीजद ने पूछा कि क्या इन कंपनियों को काम सौंपने से पहले उनकी विश्वसनीयता की जांच की गई थी? और यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार नीति-निर्माता कौन थे? मोहंती ने जोर देकर कहा कि जब तक उन लोगों को सजा नहीं मिलती जिन्होंने यह रास्ता खोला, तब तक भविष्य की परीक्षाओं की पवित्रता सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

घोटाले का काला इतिहास: 125 गिरफ्तारियां और करोड़ों का लेन-देन

यह मामला राज्य के उन 15 लाख युवाओं के भविष्य से जुड़ा है जिन्होंने ओडिशा पुलिस, अग्निशमन सेवा और वन विभाग में कुल 933 सब-इंस्पेक्टर पदों के लिए आवेदन किया था। अक्टूबर 2025 में जब इस घोटाले की परतें खुलीं, तो राज्य सरकार ने इसकी गंभीरता को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इससे पहले, ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 125 लोगों को गिरफ्तार किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए लोगों में 114 ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने नौकरी पाने के लिए कथित तौर पर 10-10 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ था कि इन उम्मीदवारों ने चयन सूची में नाम आने के बाद प्रति व्यक्ति 25 लाख रुपये अतिरिक्त देने का सौदा किया था। इस प्रकार, यह घोटाला करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन तक फैला हुआ था।

युवाओं के भविष्य पर संकट और रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया

भर्ती घोटाले के उजागर होने के बाद, प्रशासन ने पूरी चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया था। 15 लाख उम्मीदवारों के सपनों पर पानी फिरता देख राज्य में भारी आक्रोश व्याप्त है। विपक्षी बीजद का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को रोकना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि अपराधियों को कड़ी सजा देना और व्यवस्था को पारदर्शी बनाना जरूरी है। पार्टी ने कहा कि हजारों गरीब मेधावी छात्रों ने अपनी मेहनत से परीक्षा की तैयारी की थी, लेकिन भ्रष्ट तंत्र ने उनके अवसरों को बेच दिया। बीजद ने आरोप लगाया कि वर्तमान जांच केवल सतह को छू रही है और अगर सीबीआई ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली, तो असली अपराधी कभी पकड़े नहीं जाएंगे।

राजनीतिक खींचतान और आगे की रणनीति

ओडिशा में इस समय भर्ती घोटाला राजनीति का केंद्र बन गया है। बीजद ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मुद्दे को केवल बयानों तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में सुधार नहीं किया और बड़े चेहरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वे इसे लेकर सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे। मोहंती ने अंत में कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीबीआई पर किसी प्रकार का आंचलिक या राजनीतिक प्रभाव न पड़े। ओडिशा के लाखों युवाओं की उम्मीदें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच एजेंसियां उन सफेदपोश चेहरों तक पहुंच पाएंगी जिन्होंने व्यवस्था के साथ खिलवाड़ किया है।

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