वाराणसी: देश का पहला हाइड्रोजन चालित जलयान गंगा में उतरा, सोनोवाल बोले- भारत की तकनीकी प्रगति और स्वदेशीकरण का प्रतीक
वाराणसी। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार को वाराणसी के नमो घाट से भारत के पहले स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल चालित पैसेंजर जलयान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सोनोवाल ने कहा कि यह क्रूज हरित परिवहन के नए युग की शुरुआत है और भारत की तकनीकी प्रगति, दक्षता तथा आत्मनिर्भरता का जीता-जागता प्रतीक है। उन्होंने कहा, “गंगा जैसे पवित्र जलमार्ग पर शून्य-उत्सर्जन वाला यह जहाज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
”जलयान की खासियतें
निर्माता: कोच्चि शिपयार्ड लिमिटेड
लागत: करीब 10 करोड़ रुपये
क्षमता: 50 यात्री + 10 क्रू मेंबर
लंबाई × चौड़ाई: 28 मीटर × 5.8 मीटर
गति: 20-25 किलोमीटर प्रति घंटा
संचालन समय: एक बार फुल चार्ज पर 8 घंटे
ईंधन: हाइड्रोजन (4 सिलेंडर) + बैकअप इलेक्ट्रिक बैटरी
तकनीक: ब्रिटिश टेक्नोलॉजी आधारित, पूर्णतः भारत में निर्मित
सुरक्षा: सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा
फ्यूल स्टेशन: राल्हूपुर (रामनगर) मल्टी मॉडल टर्मिनल पर देश का पहला हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन
शुरुआत में यह क्रूज नमो घाट से रविदास घाट तक चलेगा। जल्द ही आसी घाट और मार्कंडेय धाम को भी रूट में जोड़ा जाएगा। टिकट मूल्य प्रति व्यक्ति करीब 500 रुपये रखा गया है।
जलमार्ग क्रांति: 5 से 111 नेशनल वाटरवेज
सोनोवाल ने बताया कि 2014 में देश में सिर्फ 5 नेशनल वाटरवेज थे, जो अब बढ़कर 111 हो गए हैं। इनमें से:32 जलमार्गों पर कार्गो और यात्री जहाज चल रहे हैं
13 नेशनल वाटरवेज पर क्रूज संचालन हो रहा है
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जलमार्ग परिवहन को नई ऊंचाई मिली है और यह जहाज उस दिशा में एक और मजबूत कदम है।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहे मौजूद
उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह
स्टांप एवं न्यायालय शुल्क राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल
आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’
पत्तन एवं जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार
IWAI चेयरमैन सुनील पालीवाल
पिंडरा विधायक डॉ. अवधेश सिंह (विशेष अतिथि)
महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह
सभी ने जलयान को गंगा में उतारने को प्रधानमंत्री मोदी के “स्वच्छ भारत-हरित भारत” विजन की बड़ी उपलब्धि बताया।काशी में पर्यटन को नया आयामयह हाइड्रोजन क्रूज काशी के पर्यटन को नया आयाम देगा। शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ गंगा की लहरों पर सैर करने का अनुभव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।वाराणसी में इस ऐतिहासिक लॉन्च के साथ भारत नॉर्वे, जापान और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइड्रोजन चालित कमर्शियल पैसेंजर जहाज हैं। गंगा अब न सिर्फ आस्था की धारा है, बल्कि हरित परिवहन की नई क्रांति का साक्षी भी बन गई है।